1. संविधान को मानक गणराज्य (ब्रह्माण्डीय गणराज्य-अवतारी परम्परा) के अनुसार करना जिससे भारत एक मानक गणराज्य और लोकतन्त्र का उदाहरण बने सके।
“रामराज्य”, का प्रारूप “परशुराम परम्परा” है। ईश्वर के सातवें अवतार भगवान श्रीराम ने ईश्वर के छठें अवतार भगवान परशुराम द्वारा दी गई व्यवस्था का ही प्रसार किये थे।
छठें अवतार भगवान परशुराम द्वारा दी गई व्यवस्था इस प्रकार थी-
1. प्रकृति में व्याप्त तीन गुण- सत्व, रज और तम के प्रधानता के अनुसार मनुष्य का चार वर्णों में निर्धारण। सत्व गुण प्रधान - ब्राह्मण, रज गुण प्रधान- क्षत्रिय, रज एवं तम गुण प्रधान- वैश्य, तम गुण प्रधान- शूद्र।
2. गणराज्य का शासक राजा होगा जो क्षत्रिय होगा जैसे- ब्रह्माण्डीय गणराज्य में प्रकृति जो रज गुण अर्थात् कर्म अर्थात् शक्ति प्रधान है।
3. गणराज्य में राज्य सभा होगी जिसके अनेक सदस्य होंगे जैसे- ब्रह्माण्डीय गणराज्य में प्रकृति के सत्व, रज एवं तम गुणों से युक्त विभिन्न वस्तु हैं।
4. राजा का निर्णय राजसभा का ही निर्णय है जैसे- ब्रह्माण्डीय गणराज्य में प्रकृति का निर्णय वही है जो सत्व, रज एवं तम गुणों का सम्मिलित निर्णय होता है।
5. राजा का चुनाव जनता करे क्योंकि वह अपने गणराज्य में सर्वव्यापी और जनता का सम्मिलित रुप है जैसे- ब्रह्माण्डीय गणराज्य में प्रकृति सर्वव्यापी है और वह सत्व, रज एवं तम गुणों का सम्मिलित रुप है।
6. राजा और उसकी सभा राज्य वादी न हो इसलिए उस पर नियन्त्रण के लिए सत्व गुण प्रधान ब्राह्मण का नियन्त्रण होगा जैसे- ब्रह्माण्डीय गणराज्य में प्रकृति पर नियन्त्रण के लिए सत्व गुण प्रधान आत्मा का नियन्त्रण होता है।
यह व्यवस्था जब तक निराकार आधारित लोकतन्त्र में संविधान का स्वरूप ग्राम से लेकर विश्व तक नहीं होता तब तक रामराज्य नहीं बन सकता।
भारत में निम्न्लिखित रुप व्यक्त हो चुका था।
1. ग्राम, विकास खण्ड, नगर, जनपद, प्रदेश और देश स्तर पर गणराज्य और गणसंघ का रुप।
2. सिर्फ ग्राम व नगर स्तर पर राजा (ग्राम व नगर पंचायत अध्यक्ष) का चुनाव सीधे जनता द्वारा।
3. गणराज्य को संचालित करने के लिए संचालक का निराकार रुप- संविधान।
4. गणराज्य के तन्त्रों को संचालित करने के लिए तन्त्र और क्रियाकलाप का निराकार रुप-नियम और कानून।
5. राजा पर नियन्त्रण के लिए ब्राह्मण का साकार रुप- राष्ट्रपति, राज्यपाल, जिलाधिकारी इत्यादि।
निम्नलिखित शेष समष्टि कार्य पूर्ण करना है।
1. गणराज्य या लोकतन्त्र के सत्य रुप- गणराज्य या लोकतन्त्र के स्वरुप का अन्तर्राष्ट्रीय/ विश्वमानक।
2. राजा और सभा सहित गणराज्य पर नियन्त्रण के लिए साकार ब्राह्मण का निराकार रुप- मन का अन्तर्राष्ट्रीय/ विश्वमानक।
3. गणराज्य के प्रबन्ध का सत्य रुप- प्रबन्ध का अन्तर्राष्ट्रीय/ विश्वमानक।
4. गणराज्य के संचालन के लिए संचालक का निराकार रुप- संविधान के स्वरुप का अन्तर्राष्ट्रीय/ विश्वमानक।
5. साकार ब्राह्मण निर्माण के लिए शिक्षा का स्वरुप- शिक्षा पाठ्यक्रम का अन्तर्राष्ट्रीय/ विश्वमानक।
अधिकतम प्रभावी लाभ – अधिकतम अधिकार से युक्त मुख्य/प्रधान संचालक (भारत में प्रधानमंत्री) के सीधे जनता द्वारा चुनाव होने पर वह सच्चे अर्थों में जनता का प्रतिनिधि होगा और सरकार अपने कार्यकाल तक स्थिर रहेगी, सरकार के हटाने का रास्ता बन्द हो चुका होगा जिससे विकास कार्य में बाधा नहीं आयेगी। सदस्यों के खरीद-फरोख्त की अलोकतान्त्रिक रास्ता हमेशा के लिए बन्द हो जायेगा।
न्यूनतम प्रभावी हानि – पार्टी/दल तन्त्र का धीरे-धीरे अवनति।
2. पूर्ण गणराज्य के लिए नगर व ग्राम पंचायत को देश के संविधान की भाँति संविधान देकर गणराज्य बनाते हुये उसका सम्बन्ध सीधे जिलाधिकारी, केन्द्र सरकार और सम्बन्धित मन्त्रालय से करना।
अधिकतम प्रभावी लाभ – “स्वयं का कर्म और स्वयं का परिणाम” के आधार पर पंचायत और निवासी आत्मनिर्भर बनेंगे। पंचायत की सभी वर्तमान स्थिति जिलाधिकारी, केन्द्र सरकार और सम्बन्धित मन्त्रालय के सामने होंगे।
न्यूनतम प्रभावी हानि – पंचायत स्तर के भ्रष्टाचारीयों को नुकसान होगा।
3. राज्यों के विधानसभा को सदैव के लिए समाप्त करना।
अधिकतम प्रभावी लाभ – जन प्रतिनिधियों पर बढ़ते खर्च को कम किया जा सकेगा और विकास कार्य में बेवजह बाधा नहीं आयेगी।
न्यूनतम प्रभावी हानि – विधानसभा स्तर पर राजनीति को व्यापार बना लेने वालों को नुकसान होगा।
4. संसदीय क्षेत्र का परिसीमन करते हुये सांसद की संख्या कम से कम दो गुना करना।
अधिकतम प्रभावी लाभ – संसदीय क्षेत्र में विकास कार्य पर दृष्टि रखने में सांसदों को आसानी होगी।
न्यूनतम प्रभावी हानि – कुछ भी नहीं ।
5. संसदीय क्षेत्र में सांसद का कार्यालय, संसद सत्र के दौरान दिल्ली केवल अस्थायी निवास के लिए हास्टल।
अधिकतम प्रभावी लाभ – सांसद के अतिरिक्त खर्च में कमी और अपने संसदीय क्षेत्र पर अधिक ध्यान। जन सम्पर्क में सदैव उपलब्ध रहने का अवसर।
न्यूनतम प्रभावी हानि – अकर्मठ सांसदों को।
6. सांसद प्रत्याशी केवल उसी क्षेत्र का पैत्रिक निवासी और एक चुनाव में केवल एक चुनाव क्षेत्र से ही चुनाव प्रत्याशी बनने की अनुमति।
अधिकतम प्रभावी लाभ – सांसद, जनता से पूर्णतया परिचित। दो स्थानों से चुनाव में आने पर प्रतिबन्ध अर्थात चुनाव खर्च को बचाना।
न्यूनतम प्रभावी हानि – कई स्थानों और कहीं से भी चुनाव में आ जाने वालों का रास्ता बन्द।
7. भारतीय ऋषि आश्रम पद्धतिनुसार सरकारी सेवा का सेवानिवृत्ति की उम्र 50 वर्ष (गृहस्थ आश्रम), फिर 25 वर्ष सम्बन्धित विभाग का मार्गदर्शक मण्डल (वानप्रस्थ आश्रम) में 50 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य और 50 प्रतिशत वेतन, फिर जीवनपर्यन्त पेंशन और अन्य सुविधाएँ (सन्यास आश्रम)।
अधिकतम प्रभावी लाभ – कर्मचारीयों की शारीरिक कर्मठता और अनुभव के मार्गदर्शन पर आधारित होने से कार्य कुशलता-पूर्णता में तेजी आयेगी और नये युवा वर्ग को सेवा के अवसर मिलने में भी अधिक अवसर प्राप्त होगा। 50 वर्ष के बाद समाज से जुड़ने का भी अवसर प्राप्त होगा अन्यथा वे विशेष प्रकार के बनकर घर-समाज में अव्यवस्था उत्पन्न करते हैं।
न्यूनतम प्रभावी हानि – अकर्मठ-निकम्में कर्मचारीयों को नुकसान होगा।
8. बढ़ती जनसंख्या और चुनाव एक बहुत बड़ी समस्या है। एक नागरिकता संख्या (इण्टिग्रेटेड सर्किट-चिप युक्त आधार कार्ड) से मतदाता सूची का बार-बार बनाना, चुनाव खर्च में अप्रत्याशित रूप से कमी, मतदान प्रतिशत में अत्यधिक बढ़ोत्तरी, 100 प्रतिशत सत्य मतदाता इत्यादि को मात्र एक साफ्टवेयर से नियंत्रित किया जा सकता है। स्मार्टफोन/इन्टरनेट से आनलाइन मत के साथ ही डिजीटल मत का प्रमाण पत्र मिले जो विकेन्द्रित खुला वेबसाइट पर अपलोड करने की सुविधा हो जिससे दोनों (सरकार और जनता) मत का परिणाम सामने हो।
अधिकतम प्रभावी लाभ – चुनाव खर्च में कमी, अधिकतम मतदाताओं की भागीदारी, परिणाम शीघ्र, पूर्णतया पारदर्शी, मतदाता सूची हमेशा तैयार।
न्यूनतम प्रभावी हानि – चुनाव में भ्रष्टाचार करने वालों पर पूर्ण प्रतिबन्ध।
9. नागरिक के सभी प्रकार के सबसीडी को समाप्त कर सीधे एक न्यूनतम आर्थिक सहायता उनके एक अलग बैंक खाते में मासिक रूप से दी जाये जिसका उपयोग वे केवल दैनिक जीवनयापन के खरीददारी में कर सकें। खरीद की ये वस्तुऐं उसके अपने जिले में निर्मित/उत्पादित होती हों (यहाँ तक की राशन भी वे अपने पंचायत से निर्धारित मूल्य पर ही खरीदें) जिससे “आत्मनिर्भर भारत और लोकल-वोकल” के सिद्धान्त को व्यावहारिक बनाया जा सके। योग्य नागरिक की खोज बैंक में जमा धनराशि से की जा सकती है।
अधिकतम प्रभावी लाभ – जिला स्तर पर उद्योगों का विकास, सरकारी राशन की दुकान का भ्रष्टाचार पूर्णतया बन्द, केवल योग्य नागरिक को ही सबसीडी
न्यूनतम प्रभावी हानि –भ्रष्टाचार करने वालों पर पूर्ण प्रतिबन्ध।
10. सरकारी विभागीय स्तर पर सफाई-सुधार (भ्रष्टाचार समाप्त) करने के लिए पहली गलती पर 1000/-रुपये जुर्माना, दूसरी गलती निश्चित समय में होने पर 5 गुना (5000/-रुपये) जुर्माना, तीसरी गलती पर 10 गुना (20000/-रुपये) जुर्माना राजकोष में जमा करायें। इससे देश की आर्थिक स्थिति ठीक होगी। विभाग का हर कर्मचारी ठीक चलने और सुधार का ध्यान रखेगा। साथ ही गलती करने वाले के परिवार वाले भी सुधरेंगे और गलती करने वाले को, गलती न करने के लिये प्रेरित करेंगे। जबकि सारा परिवार नमकहरामी के पैसे से मौज कर रहा था, तो वह सजा का हकदार भी तो है। जब कम पगार आयेगी, तो परेशानी तो बढ़ेगी ही। जिससे आने वाला नेता भी पहले से सीखें। उसके घर के प्राणी, सम्बन्धी भी गलती करने से रोकें। समाज, जनता, उसकी गलती पर, उसे नफरत की निगाह से देखें। (पुस्तक – “विशाल ज्ञान विज्ञान - सबका समाधान” में विस्तृत विवरण उपलब्ध)
अधिकतम प्रभावी लाभ – कर्मचारीयों में कर्मठता बढ़ेगी, समयानुसार कार्य पूर्ण होगा, नागरिक में सरकारी कामों के प्रति निगरानी की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
न्यूनतम प्रभावी हानि –भ्रष्टाचार करने वालों पर पूर्ण प्रतिबन्ध।
स. गणराज्य के सशक्तता के लिए
01. नगर व ग्राम पंचायत कार्यालय में कम्प्यूटर केन्द्र।
02. प्राथमिक शिक्षा (प्राथमिक विद्यालय), नगर व ग्राम पंचायत के अधीन करना और उसी क्षेत्र के शिक्षक का दैनिक भुगतान के आधार पर भर्ती करना। ताकि निवासी का बच्चा और निवासी शिक्षक, स्वयं का कर्म और स्वयं का परिणाम के अनुसार निवासी में कर्तव्य भावना का विकास हो सके।
03. नगर व ग्राम पंचायत के लाभ-हानि का ब्यौरा सार्वजनिक करना और उस अनुसार ही पिछड़े क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना।
04. नगर व ग्राम पंचायत से ही सीधे प्रतिदिन सभी आकड़े केन्द्र को जिससे जनगणना, पशुगणना या अन्य आकड़ों के लिए विशेष अभियान की जरूरत नहीं। कार्ड, भूमि व नागरिक से सम्बन्धित सभी प्रमाण-पत्र नगर व ग्राम पंचायत से ही।
05. कृषि उत्पाद का भण्डारण (गोदाम) ग्राम पंचायत स्तर पर। पंचायत से ही सीधे नागरिक, अन्य पंचायत और भारत सरकार द्वारा खरीददारी एवं भण्डारण।
06. “अतिथि देवो भवः” - नगर व ग्राम पंचायत के द्वारा बाहरी आगन्तुक, खोजकर्ता, आविष्कारक, निराश्रित के लिए “भोजन की गारण्टी” जिसे अन्नक्षेत्र कहते हैं। बाहरी का अर्थ कम से कम 50 किलोमीटर दूर का निवासी। लगातार 2 भोजन से अधिक नहीं, फिर उस पंचायत या 50 किलोमीटर के दायरे के अन्य पंचायत में 7 दिन बाद सम्भव)
द. गणराज्य: एक भारत - श्रेष्ठ भारत के स्थिरता के लिए
01. नागरिक के मस्तिष्क को आधुनिक, चिन्तनशील, पूर्ण, एकीकृत, समकक्षीकरण व समझ से युक्त करने के लिए “सत्य मानक शिक्षा” से युक्त करना। जिसके लिए राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक नागरिक पात्रता परीक्षा (National Democratic Civilian Elegibility Test - NDCET) सरकारी सेवाओं के लिए अनिवार्य करना साथ ही छात्र के लिए अनिवार्य रूप से कभी भी उत्तीर्ण करना आवश्यक तभी उनका शैक्षिक डिग्री मान्य। इस प्रकार शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Elegibility Test - TET) अपने आप समाप्त हो जायेगी।
02. भारत के प्रति समर्पित नागरिक निर्माण का पाठ्यक्रम “सत्य मानक शिक्षा” को संविधान का अंग बनाना।
03. एक राष्ट्र - एक पाठ्यक्रम - एक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था क्योंकि शिक्षा का सम्बन्ध राष्ट्र से है न कि राष्ट्र के किसी भाग से।
04. शिक्षा और आवश्यक वस्तु के विपणन क्षेत्र में भारतीय आध्यात्म एवं दर्शन आधारित स्वदेशी विपणन प्रणाली: 3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) अनिवार्य रूप से लागू करना जिससे उनका खर्च ही उन्हें आर्थिक लाभ दे। फलस्वरूप क्रय शक्ति में बढ़ोत्तरी।
05. न्याय क्षेत्र में समय सीमा में बद्ध न्याय और आर्थिक अपराध का दण्ड सर्वोच्च करना।
06. आरक्षण का आधार शारीरिक, आर्थिक व मानसिक करना।
07. नीजी क्षेत्र के विद्यालय और चिकित्सालय के शुल्क को नियंत्रित करना।
08. भूमि विक्रय पंजीकरण, ब्रोकर को दर्ज कराये बिना न करना। ब्रोकर को कानून के दायरे में लाना।
09. एक राष्ट्र - एक बिक्री कर - एक आयकर। सभी कर समाप्त।
10. एक राष्ट्र - एक राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक नागरिक संहिता, दण्ड संहिता जो महिला-पुरूष में भेद ना करे।
11. एक राष्ट्र - एक राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक धर्म (समष्ठि धर्म) जिसकी सीमा देश स्तर, अन्य प्रचलित धर्म व्यक्तिगत धर्म (व्यष्टि धर्म) जिसकी सीमा परिवार क्षेत्र।
12. एक राष्ट्र - एक नागरिकता संख्या (इण्टिग्रेटेड सर्किट-चिप युक्त आधार कार्ड) - सम्पूर्ण शारीरिक - आर्थिक/संसाधन - मानसिक - क्रियाकलाप - उपलब्धता (नागरिक डाटाबेस), निगरानी अर्थात यात्रा सम्बन्धित टिकट, होटल व थाने से भी जोड़ना।
13. पद पर नियुक्ति के समय न्यूनतम योग्यता को ही अधिकतम योग्यता निर्धारित करना अर्थात जिस पद के लिए जो योग्यता निर्धारित की जाती है, नियुक्ति के समय उम्मीदवार की अधिकतम योग्यता भी वही होनी चाहिए अन्यथा अयोग्य घोषित। नियुक्ति उपरान्त शिक्षा ग्रहण करने की स्वतन्त्रता।
14. भारतीय ऋषि आश्रम पद्धतिनुसार उत्तराधिकार सम्बन्धी अधिनियम जिसमें यह प्राविधान हो कि 25 वर्ष की अवस्था (गृहस्थ आश्रम में प्रवेश) में उसे पैतृक सम्पत्ति अर्थात दादा की सम्पत्ति जिसमें पिता की अर्जित सम्पत्ति शामिल न रहें, पुत्र के अधिकार में हो जाये।
भारत की सम्पूर्ण क्रांति को सफल बनाने के लिए सभी भारतवासियों को अपनी सहभागिता देना अनिवार्य है । सरकारों पर ही निर्भर रहना से लक्ष्य की प्राप्ति होना असंभव है ।
ReplyDeleteदेश मे बैठे देश का ही खा कर देश को ही बर्बाद करने वालों गद्दारों पर जब तक अंकुश नही लगाया जाएगा । जब देश मे जातिवाद ,क्षेत्रवाद और निजिस्वार्थ की राजनीति रहेगी जनता चुनाव में अपना मत जब तक राष्ट्रहित में नही करेंगे और किसी लालचबस अपना मत करेंगे तो कैसे सम्पूर्ण क्रांति विकास पथ पर देश को ले जाये जाएगा । वर्तमान सरकार अपने कार्य का निर्वाह सकुशलता से कर रही है । बस अब कुछ तथाकथित लोगों पर अंकुश लगाया जाये जो समाज में अपने निजी राजनीति एवं स्वयं के लाभ हेतु समाज मे देश और सरकार के खिलाफ भ्रांतियां फैलाते है ।
Ati sunder plan
ReplyDeleteI am with our nation. I love Bharat.
ReplyDeleteमैं अपने देश की सेवा के लिए हमेशा तत्पर हूँ।
ReplyDelete🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिंद 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
अति सुन्दर 🇮🇳🇮🇳जय हिंद 🇮🇳🇮🇳
ReplyDeleteजय भारती उत्तम सेवा के लिए आभार
ReplyDeletehttps://thepanchali.blogspot.com/2020/10/meri-vasundhra-poem-including-narendra.html
Amnesh. 9306872673
ReplyDeleteसही बात कही गयी है।
ReplyDeleteविकास हर नागरिक के दरवाजे से सुरु हो। जो नही हो रहा है चाहे गांव हो या शहर। जनता प्रधानों व सभासदों की कठपुतली बन के राह गई है।
Best hai bhai
ReplyDeleteDaily current affairs Yt
Very good
ReplyDeleteDaily current affairs
सत्य की जीत हमेशा अंत में ही होती है जब झूठ परेशान होकर थक-हारकर बैठ जाता है। हमें गर्व है कि हमारे देश का नेतृत्व एक ऐसे कुशल व्यक्ति के हाथों में है जिसके मनसा वाचा कर्मणा में एकरूपता देखने को मिलती है। आशा ही नहीं बल्कि पुर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि आगामी कुछेक सालों में हमें एक नया भारत देखने को मिलेगा। हमें अपना विश्वास बनाए रखने की एवं नव-भारत निर्माण में अपने सामर्थ्य अनुसार सहभागिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। हम मंजिल के निकट पहुंच गए हैं। हमारा नया भारत विश्व का मार्गदर्शन करेगा।
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