Wednesday, September 16, 2020

लोकल – वोकल (LOCAL - VOCAL) - www.leledirect.com

ये विचार नहीं, 
सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित 
"राष्ट्रवाद की मुख्यधारा" और "राष्ट्र निर्माण की सर्वोच्च योजना" है

"कोरोना महामारी के दौरान हमें इसी लोकल ने बचाया है। यह देश की ताकत हैए जिसे हमें पहचानना होगा। इस संकट ने हमें बताया कि लोकल प्रोडक्ट और लोकल सप्लाई चेन कितनी जरूरी है। हमें लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देना हैए लोकल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। लोकल से ग्लोबल बनना है। आज से हर भारतवासी को लोकल के लिए वोकल बनना है। ना केवल लोकल प्रोडक्ट खरीदना है बल्कि उनका प्रचार करना है।"

- नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री


विषय- सूची
सार्वभौम आर्थिक प्रणाली (UNIVERSAL ECONOMIC SYSTEM)
3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) विपणन प्रणाली
लोकल – वोकल (LOCAL - VOCAL) का अर्थ
ले ले डायरेक्ट - www.leledirect.com : परिचय और वैधानिक (LEGAL) स्थिति
प्रणाली (SYSTEM) की मुख्य विशेषताएँ
चरण - 1 (PHASE-1) : सुविधा का उपयोग
चरण – 2 (PHASE-2) : आर्थिक लाभ
चरण - 3 (PHASE-3) : आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल
एजेन्ट (AGENT)
पिन कोड एरिया एजेन्सी  (PIN CODE AREA AGENCY-PCAA) 
आर्थिक लाभ
बेरोजगारों व एम. एल. एम नेटवर्करों को आमंत्रण
दान नहीं, व्यापार
सारांश - सीधी समझ


बुधवार, 20 जनवरी, 2016 ई0
तैयार करें मूल्यों और उम्मीदों पर आधारित ब्लूप्रिन्ट। (विडिओ कान्फ्रेसिंग से छात्रों और शिक्षकों को सन्देश - राष्ट्र निर्माण का आह्वानं) साभार -दैनिक जागरण, 20 जनवरी, 2016
- श्री प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति, भारत

अपने जीवकोपार्जन के लिए शारीरिक गुलामी से चला आर्थिक स्वतन्त्रता का सफर अभी पेंशन तक ही पहुँचा है। जब हम रायल्टी तक पहुँच जायेंगे तब हम सभी सत्य आर्थिक स्वतन्त्रता के अन्तिम लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
आध्यात्म का अर्थ, सार्वभौम आत्मा के सिद्धान्त के अनुसार प्रणाली का विकास है। मोबाइल/कम्प्यूटर की पूजा, विज्ञान के सिद्धान्त को समझना नहीं है बल्कि विज्ञान के उत्पाद की केवल पूजा मात्र है।

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सार्वभौम आर्थिक प्रणाली 
(UNIVERSAL ECONOMIC SYSTEM)

ब्रह्माण्ड की समस्त गति तरंगाकार (उपर-नीचे) होते हुये भी गोलाकार की ओर गतिशील है। ब्रह्माण्ड की समस्त स्वतन्त्र वस्तुऐं गोलाकार और सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आदान-प्रदान/परिवर्तन/e=mc2 के अन्तर्गत है। गीता में कहा गया है – “यह संसार उल्टे वृक्ष के समान है जिसका जड़ (मूल) उपर तथा शाखाऐं संसार की ओर हैं।“ यह जड़ (मूल) ही सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त (समष्टि विचार) तथा शाखाऐं ही विभिन्न मत-मतान्तर (व्यष्टि विचार) हैं। वृक्ष, जड़ (मूल) से शक्ति पाता है इसलिए ज्ञान के लिए जड़ (मूल) को ही समझना चाहिए।
ब्रह्माण्डीय प्रणाली में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक विशाल वट वृक्ष (Big Banyan Tree) के समान है अर्थात एक मुख्य जड़ होते हुये भी अनेक जड़ें स्थान-स्थान पर अपने स्वायत्तशासी वृक्ष के रूप में है। स्वायत्तशासी होते हुये भी अपने से बड़े स्वायत्तशासी के उपर निर्भर रहना, यही ब्रह्माण्डीय प्रबन्ध प्रणाली है। स्वायत्तशासी ही विकेन्द्रीत है और सभी को एक पर ही निर्भर कर देना केन्द्रीत करना है।
आर्थिक प्रणाली में प्रत्येक व्यक्ति ही एक स्वायत्तशासी विकेन्द्रीत प्रणाली है और आर्थिक वृक्ष का जड़ (मूल) है। इस व्यक्ति के कारण ही समस्त आर्थिक प्रणाली चल रहा होता है इसलिए इसके खरीद क्षमता को बनाये रखना ही सार्वभौम आर्थिक प्रणाली है। यही आत्मनिर्भर आर्थिक प्रणाली है।
इस ब्रह्माण्ड में जिस प्रकार उत्प्रेरक सार्वभौम आत्मा की उपस्थिति में समस्त क्रिया का संचालन चल रहा है उसी प्रकार मानव समाज में उत्प्रेरक मुद्रा की उपस्थिति में मानव के समस्त व्यापार चल रहे हैं। पैसे (मुद्रा) पेड़ पर नहीं उगते बल्कि वह किसी विचार के आधार पर आदान-प्रदान होने से बढ़ते और शामिल व्यक्ति को संतुष्ट करते हैं। यह विचार शेयर बाजार, क्रिप्टो करेंसी, वस्तु खरीद, शिक्षा, आस्था, सलाह सेवा, खेल, मनोरंजन इत्यादि हो सकते हैं।
भारत में कोई भी कम्पनी पंजीकृत हो जाने मात्र से उसमें निवेश किये गये धन के जिम्मेदारी की गारन्टी नहीं हो जाती, सरकारी बैंकों में भी आपका धन चाहे जितना जमा हो सरकार केवल रूपये 5 लाख तक का ही जिम्मेदारी लेती है।
              
3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) विपणन प्रणाली
(आविष्कारक द्वारा कापीराइट के अन्तर्गत)
कुल मिलाकर उपभोक्ता जो कहीं किसी और माध्यम से धन अर्जित करता है उसके उस धन को लेने के लिए किये गये सारे प्रपंच विपणन के अन्तर्गत आते हैं। यदि उपभोक्ता के पास धन नहीं तो ये सारे प्रपंच बेकार सिद्ध हो जाते हैं उसके लिए फाइनेन्स (आसान किस्तों में धन चुकाने की व्यवस्था), खरीदे और दूसरे को खरीद करायें वाली प्रणाली भी विपणन के प्रपंच में से ही है।
विश्व में शायद किसी भी देश में सरकार द्वारा निश्चित की गई विपणन प्रणाली लागू नहीं हैं। सरकार को केवल विभिन्न प्रकार के करों (Taxes) से मतलब होता है। निर्माता अपने उत्पाद को चाहे जिस विधि/प्रणाली से बेचे। बस मल्टीलेवेल मार्केटिंग के लिए कुछ दिशा निर्देश भारत में समय-समय पर निर्धारित होते रहते हैं।
इस संसार में प्रत्येक जीव का अपना मौलिक कर्म-इच्छा है और वह उसी अनुसार कर्म कर रहा है। ईश्वर और पुनर्जन्म के सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार हम यह पाते हैं कि हम जो भी कर्म-इच्छा करते हैं वह हमें उस अनुसार जन्म-जन्मान्तर तक कर्म-इच्छा के परिणाम/फल के रूप में प्राप्त होता रहता है। 
  जिस प्रकार हमारे सभी कर्म-इच्छा का परिणाम/फल रायल्टी के रूप में सार्वभौम आत्मा द्वारा प्रदान किये जा रहे हैं। उसी प्रकार मानव समाज के वस्तुओं से सम्बन्धित व्यापार में भी उसके साथ किये गये कर्म के भी परिणाम/फल रायल्टी के रूप में प्राप्त होनी चाहिए। मौलिक खोज/आविष्कार के साथ रायल्टी का प्राविधान बढ़ते बौद्धिक विकास के साथ तो है ही परन्तु यदि किसी कम्पनी के उत्पाद का प्रयोग हम करते हैं तो ये उस कम्पनी के साथ किया गया हमारा कर्म भी रायल्टी के श्रेणी में आता है क्योंकि हम ही उस कम्पनी के विकास में योगदान देने वाले हैं। रायल्टी का सीधा सा अर्थ है-हमारे कर्मों का परिणाम/फल हमें मिलना चाहिए। जिस प्रकार ईश्वर हमें जन्म-जन्मान्तर तक परिणाम/फल देता है, उसी प्रकार मनुष्य निर्मित व्यापारिक संस्थान द्वारा भी हमें उसका परिणाम/फल मिलना चाहिए।
वर्तमान समय में स्थिति यह है कि भले ही कच्चा माल (रा मैटिरियल) ईश्वर द्वारा दी गई है लेकिन उसके उपयोग का रूप मनुष्य निर्मित ही है और हम उससे किसी भी तरह बच नहीं सकते। जिधर देखो उधर मनुष्य निर्मित उत्पाद से हम घिरे हुए हैं। हमारे जीवन में बहुत सी दैनिक उपयोग की ऐसी वस्तुएँ हैं जिनके उपयोग के बिना हम बच नहीं सकते। बहुत सी ऐसी निर्माता कम्पनी भी है जिनके उत्पाद का उपयोग हम वर्षों से करते आ रहे हैं लेकिन उनका और हमारा सम्बन्ध केवल निर्माता और उपभोक्ता का ही है जबकि हमारी वजह से ही ये कम्पनी लाभ प्राप्त कर आज तक बनी हुयी हैं, और हमें उनके साथ इतना कर्म करने के बावजूद भी हम सब को रायल्टी के रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं होता। जबकि स्थायी ग्राहक बनाने के लिए रायल्टी देना कम्पनी के स्थायित्व को सुनिश्चित भी करता है।
  3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) विपणन प्रणाली, चूँकि भारतीय आध्यात्म एवं दर्शन आधारित स्वदेशी विपणन प्रणाली और एक सत्य मानक विपणन प्रणाली है इसलिए भारत के जो भी नेतृत्वकर्ता ये चाहते हों कि भारत को सोने की चिड़िया बनायेंगे और आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत के आधार पर एक भारत - श्रेष्ठ भारत का निर्माण करेंगे, उन्हें उत्पाद के ऐसे क्षेत्र में जो मनुष्य के लिए उपयोग करना मजबूरी हो, उस क्षेत्र के विपणन कम्पनी/संगठन को इस प्रणाली का संचालन अनिवार्य कर देना चाहिए और अन्य क्षेत्र में विपणन स्वैच्छिक रूप से चलते रहने देना चाहिए। अनिवार्य करने के क्षेत्र ये हो सकते हैं जैसे - शिक्षा क्षेत्र, दैनिक उपभोग के वस्तु क्षेत्र।

                   “व्यापार, व्यापार के नियमों से चलता है न कि विश्वास से। विश्वास से तो ईश्वर और आस्था चलता है। चाय की दुकान पर किसी व्यक्ति के विश्वास न करने से वह बन्द नहीं हो जायेगी क्योंकि वह व्यापार के नियम पर आधारित है न कि विश्वास पर।”   

- लव कुश सिंह“विश्वमानव”

लोकल – वोकल (LOCAL - VOCAL) का अर्थ

                सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की व्यवस्था, एक स्वायत्तशासी स्वतन्त्र इकाई होते हुये भी अपने से बड़े स्वायत्तशासी स्वतन्त्र इकाई के अधीन रहकर है। शरीर की एक कोशिका से लेकर शरीर तक की यही व्यवस्था है। दूसरे रूप में पहले छोटी इकाई अपनी पूर्ति करती है फिर अधिक होने पर अपने से बड़ी स्वायत्तशासी स्वतन्त्र इकाई को वह स्थानान्तरित करती है। इस प्रकार पहले सबसे छोटे स्थानीय चक्र से विस्तार करते हुये अन्ततः वह सर्वोच्च और अन्तिम ब्रह्माण्डीय विस्तार के अन्तिम चक्र में समाहित होता है। यही विकेन्द्रीकृत प्रणाली है, यही सार्वभौम आत्मा का सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त है और इस पर निर्भर प्रणाली ही आत्मनिर्भर का सत्य रूप है। यही स्वदेशी है और इसको व्यवहार में लाने की प्रेरणा ही लोकल-वोकल अर्थात स्थानीय के लिए आवाज उठाना है। यही “वैश्विक सोच - स्थानीय कार्यवाही (THINK GLOBAL-ACT LOCAL)” है।
उपरोक्त सूत्र विचार नहीं, सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त है जो कभी बदला नहीं जा सकता, और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर प्रभावी है। इस अनुसार ही मानवीय प्रणाली विकसित करने पर व्यवस्थाएँ संतुलन युक्त विकास की ओर विकसित होती है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हो सकते हैं-
1. सिंचाई के लिए छोटे-छोटे बाँध से प्रारम्भ होकर बड़े बाँध की ओर गति।
2. आर्थिक प्रणाली में जिला सतर पर जमा किये जाने वाले स्थानीय निवासी के कुल धन में से अधिकतम का निवेश जिला स्तर पर उसके उपरान्त प्रदेश और देश तथा विश्व की ओर गति।
3. खाद्यान्न भण्डारण में पंचायत स्तर पर भण्डारण की व्यवस्था और आपूर्ति के उपरान्त बड़े क्षेत्र के स्तर की ओर गति।
4. जिला स्तर पर उत्पादित वस्तुओं का प्राथमिकता से प्रयोग उसके उपरान्त बड़े क्षेत्र के द्वारा उत्पादित वस्तु का प्रयोग।
किसी भी देश के लिए उपरोक्त प्रणाली स्वैच्छिक न होकर बाध्यकारी नीति के आधार पर होनी चाहिए तभी विकास में गति आ सकती है और देश का निरन्तर विकास सम्भव है। किसी भी विषय का केंद्रीकरण (Centralization) समस्या और विकेंद्रीकरण (De-centralization) समस्या को कम करता है।

ले ले डायरेक्ट - www.leledirect.com

परिचय और वैधानिक (LEGAL) स्थिति

उद्देश्य आत्मनिर्भर की प्राप्ति के लिए लोकल-वोकल पर आधारित भारतीय आध्यात्म-दर्शन सिद्धान्त के अनुसार मानक विपणन प्रणाली 3F (Fuel-Fire-Fuel) से युक्त साफ्टवेयर www.leledirect.com है। जो इसके आविष्कारक द्वारा कापीराइट के अन्तर्गत है। लोकल-वोकल के लिए डिजिटलाइजेशन - ले ले डायरेक्ट, न तो कोई कम्पनी है और ना ही कोई संगठन/पार्टी या दल, यह केवल एक उद्देश्य है जो नागरिक को केवल एक विकेन्द्रीकृत प्रणाली उपलब्ध कराते हुये विकास की मुख्यधारा को दिखा रहा है। साथ ही प्रत्येक नागरिक को उसके स्वयं के विकास के लिए मार्ग दे रहा है। लोकल-वोकल के लिए डिजिटलाइजेशन - ले ले डायरेक्ट, व्यक्ति के शिक्षा, सामाजिक-राष्ट्रीय चिन्तन और व्यापार पर आधारित है।
विकेन्द्रीकृत प्रणाली होने के कारण इसके समस्त कार्यवाही इसके पिन कोड क्षेत्र कार्यालय से ही संचालित होते हैं। ना कोई मैनेजिंग डायरेक्टर और ना ही कोई कम्पनी। भारत में कोई भी कम्पनी पंजीकृत हो जाने मात्र से उसमें निवेश किये गये धन के जिम्मेदारी की गारन्टी नहीं हो जाती, सरकारी बैंकों में भी आपका धन चाहे जितना जमा हो सरकार केवल रूपये 5 लाख तक का ही जिम्मेदारी लेती है। कम्पनी पंजीकृत होना केवल कार्य प्रारम्भ के लिए और कर (Tax) जमा करने की सरकार को एक सूचना मात्र होती है। इतने घोटाले हुये और कम्पनी ग्राहकों का धन ले कर भाग गयी तो वैधानिक (LEGAL) का क्या अर्थ है सब आपके सामने है। www.leledirect.com इस समस्या को ही समाप्त करता है और विकेन्द्रीकृत करते हुये आपके अपने पिन कोड क्षेत्र कार्यालय को ही अधिकृत करता है। www.leledirect.com, लोकल-वोकल को सफल करने के लिए और पंजीकृत सदस्य के धन को पूर्ण सुरक्षा के साथ लाभ देने का एक साफ्टवेयर मात्र है।
कम्पनी बल (COMPANY FORCE) में कम्पनी की प्राथमिकता प्रणाली को आगे बढ़ाने में होती है। टीम बल (TEAM FORCE) में टीम की प्राथमिकता प्रणाली को आगे बढ़ाने में होती है। जबकि मानवीय बल (MAN FORCE) में व्यक्ति की आवश्यकता ही प्रणाली को आगे बढ़ाने में स्वतः होती है। FACEBOOK, TWITTER, WHATSAPP इत्यादि मानवीय बल (MAN FORCE) के उदाहरण हैं। इन सोशल वेबसाइट पर व्यक्ति स्वयं अपनी आवश्यकता के लिए पंजीकृत होते हैं। कम्पनी / संगठन इस पर पंजीकरण करने के लिए कोई सेमिनार या दबाव नहीं डालती क्योंकि ये सब आपके स्वयं के विकास के लिए संसाधन होते हैं।
लोकल-वोकल के लिए डिजिटलाइजेशन - ले ले डायरेक्ट www.leledirect.com राजनीतिक, विकास की मुख्यधारा का शैक्षिक और व्यापारिक स्वरूप का मिश्रित प्रणाली है। जो मानवीय आवश्यकता की मूल आवश्यकता है इसलिए इसे मानवीय बल (MAN FORCE) आधारित प्रणाली भी कहते हैं।
लोकल-वोकल के लिए डिजिटलाइजेशन - ले ले डायरेक्ट www.leledirect.com प्रणाली, समाज समर्थित प्रणाली है जबकि ऐसे प्रणाली को किसी भी देश की सरकार अपनाकर अपने नागरिकों को एक बेहतरीन सुरक्षा का अवसर दे सकती है। उदाहरणस्वरूप भारत के लिए- नागरिकों को दी जाने वाली सभी प्रकार के अनुदान को हटाकर सीधे उनके खाते में धन भेजा जाये और यह धन केवल वह अपने जीवन के आवश्यक सामग्री और वह भी जिले में ही उत्पादित वस्तु को खरीदने में ही खर्च करने को बाध्य रहे तो सफलतापूर्वक लोकल-वोकल के उद्देश्य को पाया जा सकता है साथ ही देश के सुख और आर्थिक विकास का स्थायी समाधान भी। 

भारत में लोकल-वोकल के लिए डिजिटलाइजेशन - ले ले डायरेक्ट www.leledirect.com प्रणाली, प्रत्येक राज्यों के लिए अलग-अलग अधिकृत व्यक्ति/संस्था द्वारा संचालित की जायेगी। 

“मैंने एक योजना सोची तथा उसे कार्यान्वित करने का मैंने दृढ़ सकल्प किया। कन्याकुमारी में माता कुमारी के मन्दिर में बैठकर, भारतवर्ष की अन्तिम चट्टान पर बैठकर, मैंने सोचा कि हम जो इतने संन्यासी घूमते फिरते हैं और लोगों को दर्शनशास्त्र की शिक्षा दे रहे हैं, यह सब निरा पागलपन है। क्या हमारे गुरुदेव नहीं कहा करते थे कि खाली पेट से धर्म नहीं होता?”
- स्वामी विवेकानन्द

ले ले डायरेक्ट प्रणाली (SYSTEM) की मुख्य विशेषताएँ
पंजीकृत सदस्य के लिए इस प्रणाली में निम्नलिखित चरण हैं।
चरण - 1 (PHASE-1) : सुविधा का उपयोग
चरण – 2 (PHASE-2) : आर्थिक लाभ
चरण - 3 (PHASE-3) : आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल

चरण - 1 (PHASE-1) : : सुविधा का उपयोग
पंजीकरण किये बिना
1. भारत के किसी पिन कोड क्षेत्र से पंजीकृत सदस्य की सूची देख सकते हैं।
2. भारत के किसी जिला क्षेत्र से पंजीकृत संगठन की सूची देख सकते हैं और उसके वेबसाइट पर जा सकते हैं।
3. भारत के किसी भी विधायक और संसदीय क्षेत्र के टाप 25 प्रत्याशी (नेता-LEADER)) जिन्हें पंजीकृत सदस्यों ने अपना मत देकर बनाया है, की सूची देख सकते हैं।
4. भारत के किसी भी पिन कोड क्षेत्र के कार्यालय का पता (ADDRESS) देख सकते हैं।
5. राष्ट्रीय नीति आयोग (रानीआ) के “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के मुद्दे पढ़ सकते हैं जो समाज द्वारा राष्ट्र निर्माण के लिए निर्धारित किये गये हैं।
6. राष्ट्र निर्माण और युग परिवर्तन के लिए भारतीय आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत पर आधारित शास्त्र-साहित्य की सूची देख सकते हैं और वे कहाँ से प्राप्त होंगे, उसे देख सकते हैं।
7. प्रत्याशी अपने क्षेत्र में A4 साइज में बनाये गये प्रचार सामग्री को देख सकते हैं।
8. वेबसाइट संचालन के लिए सम्पूर्ण जानकारी पढ़, देख और डाउनलोड कर सकते हैं।

पंजीकरण के उपरान्त
पंजीकरण करते ही वह इस प्रणाली का सदस्य बन जाता है जिसे निम्न सुविधा प्राप्त हो जाती है-
1. सदस्य, यदि चाहे तो वह स्वयं को 1.पिनकोड क्षेत्र (कार्यालय), 2.विधायक क्षेत्र (प्रत्याशी/नेता) या 3. संसदीय क्षेत्र (प्रत्याशी/नेता) के रूप में स्वयं नियुक्त कर सकता है लेकिन इन तीनों में से केवल एक ही हो सकता है।
2. पिनकोड क्षेत्र (कार्यालय), एक व्यावसायिक स्थान है इसलिए इसकी योग्यता होना आवश्यक है। यह एक पिनकोड क्षेत्र के लिए एक ही होगा। योग्यता के लिए वेबसाइट देखें।
3. पंजीकृत सदस्य अपने क्षेत्र के प्रत्याशी (विधायक/सांसद) को वेबसाइट से अपना वोट देकर सर्वमान्य प्रत्याशी चुन सकेंगे जिसे काई भी देख सकेगा।
4. पंजीकृत सदस्य कार्य योजना और शिक्षा-ज्ञान विकास के लिए निम्न पुस्तक को e-Book के रूप में डाउनलोड कर सकेगा।
ISBN - 9781649834607               ISBN - 9781649833204

5. पंजीकृत सदस्य प्रापर्टी कारोबार से सम्बन्धित अनेक वर्गों के खरीद-बिक्री के लिए डाटा दे सकेगा। और दूसरे द्वारा दिये गये डाटा को देख व देने वाले से सम्पर्क कर सकेगा। इस प्रकार किसी भी पिन कोड क्षेत्र में बिकने वाले प्रपार्टी को देखा जा सकेगा और आपस में व्यापार कर सकेंगे। सौदे में प्रणाली का कोई हस्तक्षेप या लाभ में भागीदारी नहीं।
चरण - 2 (PHASE-2) :  आर्थिक लाभ
जिस प्रकार यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, सार्वभौम एकात्म आत्मा की उपस्थिति में आदान-प्रदान/व्यापार/परिवर्तन कर रहा है उसी प्रकार अब मानव जीवन में मुद्रा की उपस्थिति में समस्त आदान-प्रदान/व्यापार/परिवर्तन हो रहें हैं। जिस प्रकार सार्वभौम एकात्म आत्मा विकास का मूल आधार है उसी प्रकार मुद्रा भी विकास का मूल आधार बन चुका है। ये दोनों ही आदान-प्रदान के मानक हैं।
चरण – 2 में चरण - 1 से पंजीकृत सभी सदस्य स्वतः ही भारतीय दर्शन आधारित मानक विपणन प्रणाली 3F (Fuel-Fire-Fuel) से जुड़ जायेंगे और उन्हें आर्थिक लाभ भी प्राप्त होने लगेगा।

3F (Fuel-Fire-Fuel) विपणन प्रणाली से जुड़ने के उपरान्त
1. सभी पंजीकृत सदस्य, लाभ प्राप्त करने के श्रेणी में आ जायेंगे।
2. विकेन्द्रीकृत आर्थिक प्रणाली होने के कारण आप सीधे अपने नजदीकी पिनकोड क्षेत्र के कार्यालय से सभी आर्थिक लेन-देन करेंगे। जबकि भारत के किसी पिनकोड क्षेत्र कार्यालय से भी कर सकेंगे। प्रणाली (Software) केवल आपके लाभ को बताता रहेगा जिसे आप वेबसाइट से देख सकेंगे।
3. सेवा शुल्क हमेशा सुरक्षित एवं 100 प्रतिशत वापसी/समायोजन योग्य। विशेष रूप में जब तक कि आप लाभांस नहीं प्राप्त कर चुके हैं। 
4. आपके प्रापर्टी व्यवसाय में सम्पर्क का विस्तृत दायरा। पिन कोड क्षेत्र स्तर पर प्रापर्टी खोज व सीधे खरीदने व बेचने वाले से सम्पर्क और सूचना या सौदे में प्रणाली का कोई हस्तक्षेप या लाभ में भागीदारी नहीं।
5. सूचना, सम्पर्क, लाभ, लाभांस, सेवा शुल्क सब आपका। प्रणाली मात्र एक अवसर उपलब्ध कराने वाले की भूमिका में। क्योंकि वह एक अपने बड़े परियोजना के लिए रियल इस्टेट एजेन्ट नेटवर्क तैयार करने के उद्देश्य से काम कर रही है जिसमें प्रथम अवसर पंजीकृत एजेन्ट को ही मिलेगा।
6. आपका सभी आर्थिक लेन-देन पिनकोड क्षेत्र कार्यालय पर ही रहता है इसलिए किसी भी समय आप पिनकोड क्षेत्र कार्यालय से सम्पर्क कर लेन-देन कर सकते हैं।  इसके लिए जरूरी नहीं कि वह पिनकोड क्षेत्र कार्यालय आपके क्षेत्र का ही हो। जैसे बैंक में खाता किसी भी शाखा में होने पर भी आप किसी भी ATM से धन प्राप्त और जमा कर सकते हैं। लेकिन यह सुविधाजनक होगा कि जिस पिनकोड क्षेत्र से आपने जमा करने का कार्य प्ररम्भ किया हैं वहीं से लेन-देन करें।
चरण - 3 (PHASE-3) : आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल

1.      1.   लाभ प्राप्त कर रहे सदस्यों के आय का 25% उसके अपने जिले में उत्पादित वस्तु को खरीदना आवश्यक होगा अर्थात लाभ का 25% धन आप नगद नहीं प्राप्त कर सकते।

2.      2. जिले में उत्पादित वस्तु की सूची आपको वेबसाइट से दिखेगी। आप स्वयं उसे खरीदें और खरीद का रसीद दिखाकर पिनकोड क्षेत्र से भुगतान प्राप्त कर लेंगे।


बारिश उन्हीं कमरे में पहुँचती है, जिनके छत नहीं होते हैं।
अच्छे दिन उन्हीं के आते हैं, जिनके मस्तिष्क बन्द नहीं होते हैं।

एजेन्ट (AGENT)
प्रणाली के अनुसार एजेन्ट निम्नलिखित 3 प्रकार के होते हैं-

1. प्रशिक्षु एजेन्ट (TRAINEE AGENT)-प्रशिक्षु एजेन्ट वे हैं जो इस सेवा का कोई भुगतान नहीं करते हैं। ऐसे एजेन्ट पंजीकरण के प्रणाली की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं जो हमारी प्रणाली के साथ-साथ अन्य एजेन्ट भी देख सकते हैं परन्तु उनसे सम्पर्क प्रणाली के सिवा कोई नहीं कर सकता। अर्थात् प्रारम्भ में लिखित चरण 1 (PHASE-1) :  सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।

2. स्वतन्त्र एजेन्ट (FREELANCE AGENT)-स्वतन्त्र एजेन्ट वे हैं जो इस सेवा के लिए रू0 5 हजार का भुगतान करते हैं। ऐसे एजेन्ट पंजीकरण के उपरान्त प्रणाली की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं जो हमारी प्रणाली के साथ-साथ अन्य एजेन्ट भी देख सकते हैं और उनसे सम्पर्क प्रणाली तथा अन्य सभी स्वतन्त्र एजेन्ट कर सकते हैं। यह भुगतान हमारे द्वारा प्लाट/फ्लैट लेने पर समायोजन योग्य भी है। अर्थात् प्रारम्भ में लिखित चरण - 2 (PHASE-2) : आर्थिक लाभ और चरण - 3 (PHASE-3) : आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल की सुविधा का लाभ प्राप्त करेंगे। साथ ही सबसे आवश्यक व्यपार की समझ का निम्नलिखित 4 बेहतरीन मुद्रित पुस्तक उपहार स्वरूप अपने पिनकोड क्षेत्र कार्यालय से प्राप्त करेंगे।

ISBN - 9781649193513       ISBN - 9781649510037

ISBN - 9781649835482        ISBN - 9781636061351

3. स्थायी एजेन्ट (PERMANENT AGENT)-स्थायी एजेन्ट वे हैं जो इस सेवा से रू0 5 हजार का लाभांस प्राप्त कर चुके हैं और उसके उपरान्त कम से कम दो अन्य एजेन्ट का पंजीकरण इस सेवा के लिए करा चुके हैं।

पिन कोड एरिया एजेन्सी 
(PIN CODE AREA AGENCY-PCAA) 

                प्रणाली का पिन कोड एरिया एजेन्सी वे बनते हैं जो स्वयं के साथ 11 स्वतन्त्र एजेन्ट एक साथ बनाकर नियुक्त होते हैं। 

योग्यता
1. सरकार द्वारा प्रमाणित योग्यता
  सरकार द्वारा प्रमाणित किसी भी शैक्षणिक व तकनीकी योग्यता का पिन कोड एरिया एजेन्सी की नियुक्ति के लिए मुख्य आधार नहीं है। क्योंकि ये योग्यताएँ अगली कक्षा में प्रवेश व सरकारी नौकरी में प्रयोग होती हैं, राष्ट्र निर्माण के कार्य के लिए प्रमाणित योग्यता महत्व नहीं रखती। इतिहास गवाह है राष्ट्र निर्माण में प्रमाणित योग्यताधारी का योगदान कम ही रहा है।

2. अप्रमाणित योग्यता
 पिन कोड एरिया एजेन्सी की नियुक्ति के लिए मुख्य आधार अप्रमाणित योग्यता है जिसमें-व्यक्ति की चिंता, समाज की चिंता, अपने कार्य क्षेत्र की चिंता, अपने देश व इस पृथ्वी की चिंता और उसके लिए कुछ अच्छा करने के लिए शारीरिक-आर्थिक-मानसिक रूप से सशक्तता और इच्छा है।

3. अनिवार्य योग्यता
पिन कोड एरिया एजेन्सी की नियुक्ति के लिए उसका अपना कम्प्यूटर (लैपटाप/डेस्कटाप), प्रिंटर, स्कैनर व बिजली की उपलब्धता के लिए इन्वर्टर, इन्टरनेट कनेक्शन और इन सबको चलाने का ज्ञान अनिवार्य है। और वह अपने कार्य क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।

पिन कोड एरिया एजेन्सी (PIN CODE AREA AGENCY) का कार्य
1. अपने पिन कोड क्षेत्र के ADVOCATE, BRICK SUPPLIER, BUILDING MATERIAL SUPPLIER, CEMENT DEALER, CENTERING MATERIAL SUPPLIER, ELECTRICAL SUPPLIER, FINANCIER, FOUR WHEELER AGENCY, FOUR WHEELER SERVICE CENTER, FURNISHING SUPPLIER, GENERAL INSURANCE AGENT, GOVERNMENT SERVANT, HARDWARE SUPPLIER, HOUSING FINANCE AGENT, INTERIOR DECORATION, LIFE INSURANCE AGENT, MLM NET WORKER, PLUMBER, POP & PAINT WORKER, PROPERTY DEALER, REAL ESTATE COMPANY, REAL ESTATE INVESTOR, SAND SUPPLIER, STONE SUPPLIER, TILES & MARBLE SUPPLIER, TRADING BUSINESS OWNER, TWO WHEELER AGENCY, TWO WHEELER SERVICE CENTER, OTHER-NON OF THE ABOVE इत्यादि का स्वतन्त्र एजेन्ट के रूप में पंजीकरण करना।
2. किसी भी एजेन्ट का के.वाई.सी. सत्यापित करना और उस अनुसार वेबसाइट को अपडेट करना और उसे प्रधान कार्यालय को भेजना।
3. शुल्क संग्रह, वापसी इत्यादि के आदान-प्रदान में वेबसाइट के माध्यम से प्रणाली और एजेन्ट के बीच का माध्यम बनना।
4. प्रत्येक पिन कोड एरिया एजेन्सी देश के किसी भी क्षेत्र के एजेन्ट का प्रवेश, शुल्क आदान-प्रदान, आय का अंश आदान-प्रदान करने के लिए अधिकृत है।
5. आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल के अन्तर्गत एजेन्ट द्वारा प्रस्तुत खरीद बिल का भुगतान करना एवं दिशनिर्देश द्वारा कार्य करना।
6. “सृष्टि पुस्तकालय” के लिए पुस्तक खरीद कर रखना व माँग पर विक्रय करना या उचित किराये के आधार पर अन्य को पढ़ने के लिए आबंटित करना।
आर्थिक लाभ
           यह तो सत्य हो चुका है कि बिना लाभ के कोई किसी भी प्रणाली (सिस्टम) से नहीं जु़ड़ता और यह भी उतना ही सत्य है कि बिना सिस्टम को समझे और उसमें जु़ड़े बिना कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाता, पशुवत् जीवन जी लेना अलग बात है। पशु को ईश्वरीय सिस्टम चलाती है जिसे कहते हैं-”जाहीं विधि राखे राम, ताहीं विधि रहिए“। लेकिन मनुष्य का सिस्टम ईश्वरीय सिस्टम को पूर्णतः स्वीकार व आत्मसात् करते हुए, मनुष्य द्वारा विकसित सिस्टम से विकास को गति मिलती है। ईश्वरीय सिस्टम से ही लाखो-करोड़ों वर्षों में हम सभी यहाँ तक पहुँचे हैं जो एक धीमी गति की प्रक्रिया है। मनुष्य के सिस्टम और ईश्वरीय सिस्टम दोनों को मिलाकर विकास को गति देने के लिए ही दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, अवतारों का आना लगा रहता है चाहे उसे मनुष्य स्वयं समझ ले या भीड़ उसे समझा दे। 
  मनुष्य के सिस्टम और ईश्वरीय सिस्टम से मिलकर ही यह सिस्टम विकसित की गयी है। विश्व में पहली बार प्रयोग की जा रही इस सिस्टम का नाम-भारतीय आध्यात्म एवं दर्शन आधारित स्वदेशी विपणन प्रणाली : 3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) है।
1. प्रशिक्षु एजेन्ट (TRAINEE AGENT)- प्रणाली के लाभांस में प्रशिक्षु एजेन्ट भी शामिल होता है परन्तु उसे उसका भुगतान तब तक नहीं होता जब तक कि वह सेवा शुल्क रू0 5 हजार का भुगतान कर स्वतन्त्र एजेन्ट नहीं बनता।
2. स्वतन्त्र एजेन्ट (FREELANCE AGENT)- प्रणाली के लाभांस में स्वतन्त्र एजेन्ट शामिल होता है और वह उसका भुगतान केवल एक बार रू0 5,000/- प्राप्त करता है।
3. स्थायी एजेन्ट (PERMANENT AGENT)- प्रणाली के लाभांस में स्थायी एजेन्ट शामिल होता है और वह उसका भुगतान अनेक बार रू0 5,000/- के गुणक में प्राप्त करता है।
4. पिन कोड एरिया एजेन्सी (PIN CODE AREA AGENCY)- प्रणाली के लिए चाहे जिस एजेन्ट ने भी एजेन्ट बनाया हो, वह किसी न किसी पिन कोड एरिया का ही होता है। एजेन्ट जिस पिन कोड एरिया का है उस पिन कोड एरिया एजेन्सी को एक निश्चित राशि लाभांस के रूप में भुगतान होता है। 
इसलिए एजेन्ट व एजेन्सी के लिए अवसर क्या हैं यह जानना आवश्यक है। एजेन्ट का शुल्क यदि रू0 5,000/- है तो आर्थिक लाभ वितरण निम्न प्रकार होता है।
 **अ.शुल्क से लाभ- प्राप्त शुल्क का वितरण है।
***ब.लाभांस पर लाभ-वितरण प्रक्रिया प्रणाली (3-F : Fuel-Fire-Fuel) द्वारा एजेन्ट को प्रत्येक लाभांस रू0 5,000/- वितरण पर एजेन्सी और पंजीकरण करने वाले एजेन्ट को लाभ है।

नोट: कार्य न करने की इच्छा पर पद को छोड़ने की स्थिति में पद द्वारा किये गये निवेश को 100 प्रतिशत वापस करने का प्राविधान है यदि आपने प्रणाली से कोई लाभ नहीं प्राप्त किया है। जबकि आपके पद पर लाभांस बनता रहता है, केवल उसका भुगतान रोक दिया जाता है। आप पुनः बिलम्ब शुल्क रू0 100/- प्रतिदिन के साथ हमारे साथ आ सकते हैं और अपना लाभांस प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा हम इसलिए करते हैं क्योंकि जब तक भी आपने हमारे साथ कार्य किया है उससे आपने हमारा प्रचार-प्रसार ही किया है। जो आपके पद पर न रहने से नष्ट नहीं होता क्योंकि यह रायल्टी का सत्य-सिद्धान्त है। और हम स्थायी व्यापार की स्थिति में हैं।

डाक क्षेत्र प्रवेश केन्द्र के लिए अन्य लाभ व मार्गदर्शन-
1. पिन कोड एरिया एजेन्सी को अलग से प्रोत्साहन (Incentive) राशि दी जाती है जो उन्हें वित्तीय वर्ष के उपरान्त भुगतान होता है।
2. पिन कोड एरिया एजेन्सी द्वारा माह में एक बार निर्धारित कार्यक्रमानुसार निर्धारित तिथि को प्रणाली के रायल्टी के रूप में संग्रहित शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है। जो पाँच कार्य दिवस के अन्दर रायल्टी होल्डर कम्पनी को प्राप्त हो जाने चाहिए क्योंकि 6वें दिन से संग्रहित शुल्क पर 2 प्रतिशत प्रतिदिन का बिलम्ब शुल्क निर्धारित है और यह प्रोत्साहन (Incentive) राशि से घटा दी जाती है। 15 दिनों तक संग्रहित शुल्क न पहुँचने पर पिन कोड एरिया एजेन्सी निरस्त कर दिया जाता है।
3. प्रोत्साहन (Incentive) राशि पिन कोड एरिया एजेन्सी अपने लागइन क्षेत्र से देख सकता है।
4. पिन कोड एरिया एजेन्सी, ऐसे सौदों के बीच अपना सेवा शुल्क निर्धारित कर ले सकता है जो सौदे फ्री एजेन्ट द्वारा डाले गये हैं और उसका सम्पर्क सिर्फ पिन कोड एरिया एजेन्सी के पास है।

बेरोजगारों व एम. एल. एम नेटवर्करों को आमंत्रण

प्रिय एम. एल. एम नेटवर्कर दोस्तों,
महर्षि मनु ने कहा है कि- ”इस कलयुग में मनुष्यों के लिए एक ही कर्म शेष है आजकल यज्ञ और कठोर तपस्याओं से कोई फल नहीं होता। इस समय दान ही अर्थात एक मात्र कर्म है और दानों में धर्म दान अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान का दान ही सर्वश्रेष्ठ है। दूसरा दान है विद्यादान, तीसरा प्राणदान और चौथा अन्न दान। जो धर्म का ज्ञानदान करते हैं वे अनन्त जन्म और मृत्यु के प्रवाह से आत्मा की रक्षा करते हैं, जो विद्या दान करते हैं वे मनुष्य की आँखें खोलते, उन्हें आध्यात्म ज्ञान का पथ दिखा देते हैं। दूसरे दान यहाँ तक कि प्राण दान भी उनके निकट तुच्छ है। आध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार से मनुष्य जाति की सबसे अधिक सहायता की जा सकती है।“ 
इस पुनर्निर्माण के व्यापार में आपको केवल पाठ्यक्रम प्रवेश पंजीकरण के लिए अधिकृत किया गया है। आपके काम को आसान करने के लिए शुल्क (धन) लेने से पूर्णतः मुक्त रखा गया है अर्थात केवल आप रेफर करते जायें और इस सत्य शिक्षा के व्यवसाय का रायल्टी व अन्य लाभ पायें।
प्रिय एम. एल. एम नेटवर्कर दोस्तों, उठें और दुनिया को बता दें कि इस दुनिया में परिवर्तन लाने वाले हम लोग हैं। हम सत्य ज्ञान का व्यापार करते हैं। हम राष्ट्र निर्माण का व्यापार करते हैं। हम समाज को सहायता प्रदान करने का व्यापार करते हैं। हम, लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का व्यापार करते हैं और वहाँ करते हैं जिस क्षेत्र, जिला, मण्डल, प्रदेश व देश के निवासी हैं। जहाँ हमारे भाई-बन्धु, रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि रहते हैं।
अब इस जिले, उस जिले, इस प्रदेश, उस प्रदेश में भागकर अपने खर्चों को न बढ़ायें। आप जहाँ के हैं वहीं से, अपने घर पर रहते हुये और अन्य कार्यों को देखते हुये सहज भाव व आराम से काम करने का समय व सिस्टम (प्रणाली) आ गया है। यदि आप अन्य कम्पनी को कर रहें हों तो उसे भी करते रहें परन्तु इसे राष्ट्र का कार्य समझ कर इसे भी अवश्य करें और इसे एक राष्ट्रीय साझा कार्यक्रम समझें। अन्य कम्पनीयों की तरह न कोई बड़ा सपना, न ही कोई सेमिनार-हंगामा और न ही साल-दो साल चलने वाली कम्पनी। हम हैं युगों में एक बार काम करने वाले लोग, और नहीं हैं तो हम आज ही यह काम बन्द कर सकते हैं। हम राष्ट्र की आवश्यकता की पूर्ति के लिए काम कर रहें हैं न कि अपार धन कमाने की महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए।
यह काम राष्ट्रीय भाव-समाज सेवा का भाव सामने रखकर करें। लोगों को ज्ञान-बुद्धि की जरूरत है। यह उनके लिए ही है परन्तु उसे हम लोगों को बताना पड़ रहा है। यही ज्ञान-बुद्धि ग्रहण न करने से वे बेरोजगार हैं। सिर्फ और सिर्फ नौकरी पर आश्रित हो गये हैं। जिसके कारण सरकार भी उनसे व्यापार करने लगी है। हमारे इस व्यापार में ज्ञान भी लो और छात्रवृत्ति (स्कालरशिप) भी। साथ में सामाजिक सहायता और अन्य प्रकार की सुविधा भी।
यह काम पारम्परिक व्यवसाय के प्रकार से करें। जैसे शिक्षा व्यवसाय में पत्राचार शिक्षा का व्यवसाय चलता है। आप केवल इस शिक्षा में लोगों के प्रवेश कराने वाले बनें। अधिक से अधिक प्रवेश करायें और अधिक से अधिक सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त करें। अपने निवास स्थान से करें। किसी कार्य से जहाँ जाते हैं वहाँ करें। कोई बाधा नहीं और सिर ऊँचा कर शान से कहें-”हम राष्ट्र निर्माण का व्यापार“ करते हैं। राष्ट्रीय-वैश्विक स्तर पर आ गये बौद्धिक कमी की पूर्ति का व्यापार करते हैं।
हम आपके आय और नेटवर्क को बढ़ाने के कार्य से मुक्त करने के लिए अन्य अच्छे और स्थायी लम्बे समय तक चलने वाले एम. एल. एम कम्पनीयों से साझेदारी भी कर रहें हैं क्योंकि अब समय एकल कम्पनीयों का नहीं बल्कि समूह का है। जिससे निवेश से लाभ, स्थिरता और शक्ति का अधिकतम विकास व लाभ मिलता है। यह एम. एल. एम कम्पनीयों के लिए एक नये युग की शुरूआत भी होगी। साथ ही हमें बार-बार नये नेटवर्क के लिए मेहनत की आवश्यकता भी नहीं होगी। इस कार्य के लिए आवश्यकता पड़ने पर हम आपसे अलग से निवेश न कराकर आपके छात्रवृत्ति की राशि का अंश ही उपयोग करेंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें।
  जय बेरोजगार, जय नेटवर्कर
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दान नहीं, व्यापार

अधिकतम व्यक्ति अपने बहुत सी खुशियों व इच्छाओं की पूर्ति अपने व्यक्तिगत समस्याओं के कारण नहीं कर पाते। इसी कारण ऐसा कार्य जो उन्हें आनन्द प्रदान करता है, कार्य करने वाले को पुरस्कार या दान देकर स्वयं को सतुंष्टि प्रदान करते हैं। प्रणाली का कार्य भारत सहित विश्व के मानवता के लिए सर्वोच्च व अन्तिम कार्य है। फलस्वरुप यह अनेक मानवों की इच्छा की पूर्ति भी है। प्रणाली का कार्य मनुष्य के उस बिन्दु पर कार्य है, जहाँ से मनुष्य स्वयं अपनी सहायता के लिए तैयार हो सके। प्रणाली संघर्षशीलता व कर्म में विश्वास करता है न कि मनुष्य को सीधे धन उपलब्ध कराकर उसे निकम्मा बना देने में। प्रणाली इस सर्वोच्च और अन्तिम कार्य के लिए जन साधारण से सहयोग की अपेक्षा करता है जिसका वह सुयोग्य पात्र भी है। जिसका रूप प्रणाली में शामिल होना है और ऐसे लोगों को शामिल कराना है जो इस प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।
प्रणाली में प्रत्यक्ष दान लेने का कोई प्राविधान नहीं है। यदि आप दान देना चाहते हैं तो स्वयं का पंजीकरण करें फिर उसका पंजीकरण करें जिसे आप दान करना चाहते हैं। या पहले से पंजीकृत किसी सदस्य को दान करें। दान भी हो जायेगा और पुन: आपके पास लौट कर आ भी जायेगा।

”इस कलयुग में मनुष्यों के लिए एक ही कर्म शेष है आजकल यज्ञ और कठोर तपस्याओं से कोई फल नहीं होता। इस समय दान ही अर्थात एक मात्र कर्म है और दानों में धर्म दान अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान का दान ही सर्वश्रेष्ठ है। दूसरा दान है विद्यादान, तीसरा प्राणदान और चौथा अन्न दान। जो धर्म का ज्ञानदान करते हैं वे अनन्त जन्म और मृत्यु के प्रवाह से आत्मा की रक्षा करते हैं, जो विद्या दान करते हैं वे मनुष्य की आँखें खोलते, उन्हें आध्यात्म ज्ञान का पथ दिखा देते हैं। दूसरे दान यहाँ तक कि प्राण दान भी उनके निकट तुच्छ है। आध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार से मनुष्य जाति की सबसे अधिक सहायता की जा सकती है।“   - महर्षि मनु

”पुण्य, व्यक्तिगत कर्म के लिए सत्य पात्र को दान, दूसरों की सेवा और देखभाल, अपने पुण्य का भाग दूसरों को देना, दूसरे द्वारा दिये गये पुण्य के भाग को स्वीकारना।“   -भगवान बुद्ध 

”सावधान रहो। तुम मनुष्यों को दिखाने के लिए अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्वर्ग स्थित पिता से कोई फल नहीं पाओगे। इसलिए जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा जैसा कपटी लोग सभाओं व गलियों में करते हैं, ताकि लोग उनकी बड़ाई करें। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वे अपना फल पा चुकें।“     - ईसामसीह

”यह कि तू कहे कि मैनें सर्वोच्च अल्लाह की दासता स्वीकार की है और मैं उसका ही हूँ और यह कि तू नमाज (प्रार्थना) कायम कर और जकात (दान) दे। यह कि तू भूखों को खाना खिला और तू जिन्हें जानता है और जिन्हें नहीं जानता, उन सबको सलाम कर“   - मुहम्मद पैगम्बर

”धनी व्यक्तियों को अपने धन से भगवान और भक्तों की सेवा करनी चाहिए और निर्धनों को भगवान का नाम जपते हुए उनका भजन करना चाहिए।“   - श्री माँ शारदा

”दान से बड़ा और धर्म नहीं। हाथ सदा देने के लिए ही बनाए गये थे। कुछ मत माँगों बदले में कुछ मत चाहो। तुम्हें जो देना है दे दो, वह तुम्हारे पास लौटकर आयेगा, पर अभी उसकी बात मत सोचो। वह वर्धिक होकर, सहस्त्र गुना वर्धिक होकर वापस आयेगा, पर ध्यान उधर न जाना चाहिए। तुममें केवल देने की शक्ति है। दे दो, बस बात वहीं पर समाप्त हो जाती है।“ - स्वामी विवेकानन्द
”भगवान से दान लेने वाले थक जाते हैं किन्तु उनकी उदारता अथक है। युगों से मानव, भगवान की उदारता पर पलता आ रहा है। अरे नानक, उनकी इच्छा संसार का निर्देशन करती है परन्तु फिर भी वे असक्त अथवा चिन्ता से अलिप्त रहते है।“  -गुरू नानक

सारांश - सीधी समझ
हमारी उत्पत्ति ज्ञान से हुई है। जिन्हें ज्ञान है वही अपने आप को संघर्ष में पाते हैं और सर्वश्रेष्ठता के लिए कर्मशील हैं। शेष सभी तो प्रकृति के अनुसार आते-जाते रहते हैं। इस ज्ञान को ही ब्रह्म कहते हैं। देवता रूप में इस ज्ञान को ब्रह्मा के रूप में प्रक्षेपित किया गया है। यह ज्ञान जिस-जिस अंगो द्वारा प्राथमिकता से अनुभव में आता है उतने प्रकार के मानव अपने-आप को उत्पन्न समझते हैं। पुराण रचनाकार महर्षि व्यास ने ब्रह्मा अर्थात ज्ञान के पुत्रों का प्रक्षेपण किये हैं। ब्रह्मा के 10 मानस पुत्रों 
01. मन (विचार) से ज्ञान प्राप्त करने वाले मरीचि 
02. नेत्रों (देखकर) ज्ञान प्राप्त करने वाले अत्रि
03. मुख (वाणी) से ज्ञान प्राप्त करने वाले अंगिरा
04. कान (सुन) कर ज्ञान प्राप्त करने वाले पुलस्त्य
05. नाभि (केन्द्र) से ज्ञान प्राप्त करने वाले पुलह 
06. हाथ (कर्म) से ज्ञान प्राप्त करने वाले कृतु
07. त्वचा (स्पर्श) से ज्ञान प्राप्त करने वाले भृगु
08. प्राण (श्वास) से ज्ञान प्राप्त करने वाले वशिष्ठ
09. अँगूठे (आत्मा) से ज्ञान प्राप्त करने वाले दक्ष
10. गोद (प्रेम) से ज्ञान प्राप्त करने वाले नारद
ये दस प्रकार ज्ञान से उत्पन्न है और इतने प्रकार के मानव निर्मित होकर संसार में विचरण कर रहे हैं। इसे ये न समझना चाहिए कि मन या नेत्र इत्यादि से कैसे ब्रह्मा ने अपने पुत्रों को उत्पन्न किया? चूंकि शरीर का अस्तित्व अस्थायी है इसलिए विचार के आधार पर ये मनुष्य के वर्ग या श्रेणी का निर्धारण है। 
किसी कार्य को करने में बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो किसी कार्य/प्रणाली को पूरी तरह समझना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह पुस्तिका और सम्बन्धित अन्य स्रोत/आधार शास्त्र-साहित्य हैं।
वहीं बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो बहुत कुछ समझना नहीं चाहते, बस उन्हें सीधे निर्देश चाहिए होता है कि इसे केवल ऐसे करो। उनके लिए सीधा निम्न निर्देश है-
1. आगे वर्णित 3 वेबसाइट में से किसी के माध्यम से रायल्टी क्रम में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए पंजीकरण करें और सुविधा का लाभ उठायें।
2. सुविधा में पिनकोड स्तर पर क्रय-विक्रय करें, विधायक व सांसद प्रत्याशी के लिए स्वयं को व्यक्त करने वालों को अपना मत देकर एक सर्वमान्य नेता चुनें। अन्य ज्ञानवर्धक जानकारी को समय मिलने पर पढ़ते रहें। व्यक्तिगत चिन्तन के साथ राष्ट्रीय व वैश्विक चिन्तन भी आवश्यक है।
3. यह प्रणाली विकेन्द्रित आर्थिक प्रणाली है जिसमें कोई कम्पनी नहीं है और ना ही आपका धन कम्पनी के पास केन्द्रित होता है इसलिए अभी तक का जो अनुभव रहा है कि कम्पनी धन लेकर भाग जायेगी वो रास्ता ही नहीं है। आपका धन आपके पिनकोड क्षेत्र के कार्यालय के पास ही रहता है, वहीं से लेन-देन बिना किसी भय के करें।
4. सुविधाओं का प्रयोग करते हुये वेबसाइट से लागइन कर अपने लाभ, लेन-देन को भी देखते रहें। यह व्यापार है, बैंक नहीं, जो निश्चित अवधि में निश्चित लाभ आपको निश्चित करता है।
5. प्रणाली शुल्क हमेशा सुरक्षित है। किसी भी समय दिमाग में नकारात्मक किटाणु पैदा होने पर अपने पिनकोड क्षेत्र के कार्यालय जहाँ आपने दिया है वहीं से ले सकते हैं।
6. यह प्रणाली आपको, आपके जीवन का जिम्मेदार स्वयं आपको ही बना कर आत्मनिर्भर करने की प्रणाली है। ताकि आप कम से कम ईश्वर को दोष ना दे सकें।






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