Thursday, June 11, 2020

सम्पूर्ण क्रान्ति-अन्तिम कार्य योजना www.moralrenew.com

ये विचार नहीं, 
सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित 
"राष्ट्रवाद की मुख्यधारा" और "राष्ट्र निर्माण की सर्वोच्च योजना" है
शनिवार, 17 मई 2014 ई0 
वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुने गये वर्तमान प्रधानमंत्री (उस समय भावी) ने वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के पूजन के उपरान्त अपने सत्य विचार रखे, और वह था-
    "काशी के राष्ट्र गुरू बने बिना भारत जगत गुरू नहीं बन सकता। देश अतीत की तरह आध्यात्मिक ऊँचाई पर पहुँचेगा तो स्वतः आर्थिक वैभव प्राप्त हो जायेगा। इसी खासियत की वजह से इतिहास में कभी भारत सोने की चिड़िया थी।"
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ISBN - 9781636062808
विषय- सूची
व्यापार का आधार
परियोजना – 1 (PROJECT-1)
सम्पूर्ण क्रांति

सम्पूर्ण क्रांति
सम्पूर्ण क्रान्ति की अवधारणा में डिजिटलाइजेशन
वेबसाइट : परिचय और उपयोगिता
वेबसाइट का  मीनू
“सामाज” क्षेत्र द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
वेबसाइट www.rashtriyanitiayog.com की उपयोगिता
एक भारत - श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य
अ. भारत के विश्व गुरू बनने के लिए
ब. संविधानानुसार पूर्ण गणराज्यों के संघ के निर्माण के लिए
स. गणराज्य के सशक्तता के लिए
द. गणराज्य: एक भारत - श्रेष्ठ भारत के स्थिरता के लिए

“सत्य मानक शिक्षा” द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
वेबसाइट www.moralrenew.com की उपयोगिता
शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी 
मानक
“सम्पूर्ण मानक” का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्य
सत्य मानक शिक्षा
“व्यापार” और “शिक्षा का व्यापार”
पिन कोड एरिया स्तर पर ”सृष्टि पुस्तकालय“
पुनर्निर्माण - सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग
एक नागरिक - श्रेष्ठ नागरिक के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य
नेतृत्वकर्ताओं के सम्बन्धित विचार

“व्यापार” क्षेत्र द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
वेबसाइट www.leledirect.com की उपयोगिता
सार्वभौम आर्थिक प्रणाली (UNIVERSAL ECONOMIC SYSTEM)
3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel) विपणन प्रणाली
लोकल – वोकल (LOCAL - VOCAL) का अर्थ
ले ले डायरेक्ट - www.leledirect.com : परिचय और वैधानिक (LEGAL) स्थिति
प्रणाली (SYSTEM) की मुख्य विशेषताएँ
चरण - 1 (PHASE-1) : सुविधा का उपयोग
चरण – 2 (PHASE-2) : आर्थिक लाभ
चरण - 3 (PHASE-3) : आत्मनिर्भर और लोकल-वोकल
एजेन्ट (AGENT)
पिन कोड एरिया एजेन्सी  (PIN CODE AREA AGENCY-PCAA) 
आर्थिक लाभ
बेरोजगारों व एम. एल. एम नेटवर्करों को आमंत्रण
दान नहीं, व्यापार
सारांश - सीधी समझ
नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया
एजेन्ट पंजीकरण (Agent Registration)
एजेन्ट लाग इन (Agent Login)
आय और रायल्टी देने का हमारा आधार


परियोजना – 2 (PROJECT-2)
पुनर्निर्माण - सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग

पुनर्निर्माण-राष्ट्र निर्माण का व्यापार
राष्ट्र निर्माण का व्यापार और उसकी विधि क्या है?
पुननिर्माण पद
छात्रों को आमंत्रण

परियोजना – 3 (PROJECT-3)

एक शहर - प्रोजेक्ट को पूर्ण करने की योजना
व्यक्ति, एक विचार और अरबों रूपये का व्यापार

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व्यापार का आधार
प्रत्येक मनुष्य के लिए 24 घंटे का दिन और उस पर आधारित समय का निर्धारण है और यह पूर्णतः मनुष्य पर ही निर्भर है कि वह इस समय का उपयोग किस गति से करता है। उसके समक्ष तीन बढ़ते महत्व के स्तर है -शरीर, धन/अर्थ और ज्ञान। इन तीनों के विकास की अपनी सीमा, शक्ति, गति व लाभ है। जिसे यहाँ स्पष्ट करना आवश्यक समझता हूँ-
01. शरीर आधारित व्यापार- यह व्यापार की प्रथम व मूल प्रणाली है जिसमें शरीर के प्रत्यक्ष प्रयोग द्वारा व्यापार होता है। इससे सबसे कम व सबसे अधिक धन कमाया जा सकता है। परन्तु यह कम धन कमाने के लिए अधिक लोगों को अवसर तथा अधिक धन कमाने के लिए कम लोगों को अवसर प्रदान करता है। अर्थात् शरीर का प्रत्यक्ष प्रयोग कर अधिक धन कमाने का अवसर कम ही लोगों को प्राप्त होता है। यह प्रकृति द्वारा प्राप्त गुणों पर अधिक आधारित होती है। जो एक अवधि तक ही प्रयोग में लायी जा सकती है। क्योंकि शरीर की भी एक सीमा होती है। उदाहरण स्वरुप-किसान, मजदूर, कलाकार, खिलाड़ी, गायक, वादक, पहलवान इत्यादि। जिसमें अधिकतम संख्या कम कमाने वालों की तथा न्यूनतम संख्या अधिक कमाने वालों की है। शरीर आधारित व्यापारी हमेशा धन व ज्ञान आधारित व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। इस व्यापार में शरीर की उपयोगिता अधिक तथा धन व ज्ञान की उपयोगिता कम होती है।
02. धन/अर्थ आधारित व्यापार- यह व्यापार की दूसरी व मध्यम प्रणाली है जिसमें धन के प्रत्यक्ष प्रयोग द्वारा व्यापार होता है। इससे अधिक धन कमाया जा सकता है और उन सभी को अवसर प्रदान करता है जिनके पास धन होता है। उदाहरण स्वरुप-दुकानदार, उद्योगपति, व्यापारी इत्यादि। धन आधारित व्यापारी हमेशा शरीर व ज्ञान आधारित व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। इस व्यापार में धन की उपयोगिता अधिक तथा शरीर व ज्ञान की उपयोगिता कम होती है।
03. ज्ञान आधारित व्यापार- यह व्यापार की अन्तिम व मूल प्रणाली है जिसमें ज्ञान के प्रत्यक्ष प्रयोग द्वारा व्यापार होता है। इससे सबसे अधिक धन कमाया जा सकता है और उन सभी को अवसर प्रदान करता है जिनके पास ज्ञान होता है। उदाहरण स्वरुप-विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं अन्य शिक्षा व विद्या अध्ययन संस्थान, शेयर कारोबारी, बीमा व्यवसाय, प्रणाली व्यवसाय, कन्सल्टेन्ट, ज्ञान-भक्ति-आस्था आधारित ट्रस्ट-मठ इत्यादि। ज्ञान आधारित व्यापारी हमेशा शरीर व धन आधारित व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। इस व्यापार में ज्ञान की उपयोगिता अधिक तथा शरीर व धन की उपयोगिता कम होती है।
शरीर के विकास के उपरान्त मनुष्य को धन के विकास की ओर, धन के विकास के उपरान्त मनुष्य को ज्ञान के विकास की ओर बढ़ना चाहिए अन्यथा वह अपने से उच्च स्तर वाले का गुलाम हो जाता है। बावजूद उपरोक्त सहित इस शास्त्र से अलग विचारधारा में होकर भी मनुष्य जीने के लिए स्वतन्त्र है। परन्तु अन्ततः वह जिस अटलनीय नियम-सिद्धान्त से हार जाता है उसी सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त को ईश्वर कहते हैं और इसके अंश या पूर्ण रूप को प्रत्यक्ष या प्रेरक विधि का प्रयोग कर समाज में स्थापित करने वाले शरीर को अवतार कहते हैं। तथा इसकी व्याख्या कर इसे व्यक्ति में स्थापित करने वाले शरीर को गुरू कहते हैं। मनुष्य केवल प्रकृति के अदृश्य नियमों को दृश्य में परिवर्तन करने का माध्यम मात्र है। इसलिए मनुष्य चाहे जिस भी विचार में हो वह ईश्वर में ही शरीर धारण करता है और ईश्वर में ही शरीर त्याग देता है, इसे मानने या न मानने से ईश्वर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह उसी प्रकार है जैसे कोई किसी देश में रहे और वह यह न मानने पर अड़ा रहे कि वह उस देश का नहीं है या कोई स्वयं को यह समझ बैठे कि मेरे जैसा कोई ज्ञानी नहीं और यदि हो भी तो मैं नहीं मानता।
उदाहरण, ये जान लेना कि ये सब ट्रेन दिल्ली जाती है, “ज्ञान” है और यदि दिल्ली जाना है तो उस पर बैठना “कर्मज्ञान” है। दिल्ली जाना भी है और नहीं बैठना है इसके जिम्मेदार स्वयं हो, कोई दूसरा नहीं। हाँ, दिल्ली जाने वालों को ट्रेन की जानकारी देने वाला व्यपार कर सकते हो।
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परियोजना – 1 (PROJECT-1)
सम्पूर्ण क्रांति
अपने जीवकोपार्जन के लिए शारीरिक गुलामी से चला आर्थिक स्वतन्त्रता का सफर अभी पेंशन तक ही पहुँचा है। जब हम रायल्टी तक पहुँच जायेंगे तब हम सभी सत्य आर्थिक स्वतन्त्रता के अन्तिम लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
आध्यात्म का अर्थ, सार्वभौम आत्मा के सिद्धान्त के अनुसार प्रणाली का विकास है। मोबाइल/कम्प्यूटर की पूजा, विज्ञान के सिद्धान्त को समझना नहीं है बल्कि विज्ञान के उत्पाद की केवल पूजा मात्र है।

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सम्पूर्ण क्रांति
              लोकनायक जयप्रकाश नारायण के अनुसार सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है – 1. राजनैतिक, 2. आर्थिक, 3. सामाजिक, 4. सांस्कृतिक, 5. बौद्धिक, 6. शैक्षणिक व 7. आध्यात्मिक क्रांति।  इसके लिए सन् 1994 से ही व्यापक अध्ययन और वर्तमान युगानुसार रूपान्तरण कर शास्त्र-साहित्य तैयार करने का कार्य “सत्यकाशी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विश्वविद्यालय” (ट्रस्ट), सत्यकाशी उ0प्र0 पिन-231305, भारत में किया जा रहा था। व्यक्ति सहित भारत (देश) और विश्व (राष्ट्र) के सम्पूर्ण क्रान्ति और मानवता के अगले पीढ़ी के विकास के लिए निम्नलिखित रूपान्तरण किये गये हैं।
1. राजनैतिक – 
        वैश्विक -  विश्व राजनीतिक पार्टी संघ (World Political Party Organisation - WPPO)
        भारत स्तरीय - राष्ट्रीय नीति आयोग (रा.नी.आ)
2. आर्थिक - मानक विपणन प्रणाली : 3F (Fuel-Fire-Fuel)
        भारत स्तरीय - पुनर्निर्माण - सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग
        भारत स्तरीय -   डिजिटल प्रापर्टी और एजेन्ट नेटवर्क
3. सामाजिक -  ईश्वरीय समाज
4. सांस्कृतिक - एकात्मकर्मवाद
5. बौद्धिक - एक राष्ट्रीय शास्त्र - विश्वशास्त्र
6. शैक्षणिक - सत्य मानक शिक्षा - पूर्ण ज्ञान का पूरक पाठ्यक्रम 
7. आध्यात्मिक क्रांति -  मन (मानव संसाधन) का विश्वमानक (WS-0) श्रृंखला

उपरोक्त को व्यक्ति सहित विश्व तक पहुँचाने हेतु तकनीकी की सहायता से आर्थिक-मानसिक-राष्ट्रीय विकास के लिए वेबसाइट का माध्यम बनाया गया है जिसके परिचय, संचालन और उपयोगिता का यह विवरणिका है।
सम्पूर्ण क्रान्ति की अवधारणा में डिजिटलाइजेशन
कम्पनी बल (COMPANY FORCE) में कम्पनी की प्राथमिकता प्रणाली को आगे बढ़ाने में होती है। टीम बल (TEAM FORCE) में टीम की प्राथमिकता प्रणाली को आगे बढ़ाने में होती है। जबकि मानवीय बल (MAN FORCE) में व्यक्ति की आवश्यकता ही प्रणाली को आगे बढ़ाने में स्वतः होती है। FACEBOOK, TWITTER, WHATSAPP इत्यादि मानवीय बल (MAN FORCE) के उदाहरण हैं। इन सोशल वेबसाइट पर व्यक्ति स्वयं अपनी आवश्यकता के लिए पंजीकृत होते हैं। कम्पनी / संगठन इस पर पंजीकरण करने के लिए कोई सेमिनार या दबाव नहीं डालती क्योंकि ये सब आपके स्वयं के विकास के लिए संसाधन होते हैं।
सम्पूर्ण क्रान्ति के लिए डिजिटलाइजेशन राजनीतिक, विकास की मुख्यधारा का शैक्षिक और व्यापारिक स्वरूप का मिश्रित प्रणाली है। जो मानवीय आवश्यकता की मूल आवश्यकता है इसलिए इसे मानवीय बल (MAN FORCE) आधारित प्रणाली भी कहते हैं।
“सम्पूर्ण क्रान्ति”, न तो कोई कम्पनी है और ना ही कोई संगठन/पार्टी या दल, यह केवल एक उद्देश्य है जो नागरिक को केवल एक विकेन्द्रीकृत प्रणाली उपलब्ध कराते हुये विकास की मुख्यधारा को दिखा रहा है। साथ ही प्रत्येक नागरिक को उसके स्वयं के विकास के लिए मार्ग दे रहा है।
       सम्पूर्ण क्रान्ति के लिए डिजिटलाइजेशन, व्यक्ति के शिक्षा, सामाजिक-राष्ट्रीय चिन्तन और व्यापार पर आधारित है।
वेबसाइट : परिचय और उपयोगिता
सम्पूर्ण क्रान्ति के लिए इस प्रणाली में निम्नलिखित 3 वेबसाइट हैं-
1- www.rashtriyanitiayog.com – “सामाज” क्षेत्र द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
2- www.moralrenew.com – “सत्य मानक शिक्षा” द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
3- www.leledirect.com – “व्यापार” क्षेत्र द्वारा भारत स्तरीय सम्पूर्ण क्रान्ति  के लिए नेटवर्क
        उपरोक्त किसी भी एक वेबसाइट से पंजीकृत व्यक्ति/संगठन, स्वतः ही अन्य दो वेबसाइट के लिए भी पंजीकृत हो जाता है। इसलिए सभी पर अलग-अलग पंजीकरण नहीं करना है। अलग-अलग पंजीकरण कर देने पर आपके अगल-अलग 3 खाते हो जायेंगे।
वेबसाइट का मीनू

सभी उपरोक्त तीनों वेबसाइट के मीनू एक समान हैं।

 

मुख्य पृष्ठ - वेबसाइट खोलते ही यह मीनू सर्वप्रथम सामने होता है। जो प्रणाली के समाचार बोर्ड के रूप में कार्य करता है।

 

हमसे जुड़ें - इस मीनू से कोई भी नया पंजीकरण करके प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य के रूप में प्रणाली में शामिल होता है।

 

हमारा नेटवर्क - जो प्रणाली के समाचार बोर्ड के रूप में कार्य करता है।

 

प्रापर्टी खोजें – इस मीनू से कोई भी पिनकोड क्षेत्र स्तर पर विभिन्न वर्ग के प्रापर्टी इत्यादि से सम्बन्धित विक्रय हेतु उपलब्ध वस्तु को देख सकता है।

 

हम

       हमारे बारे में - इस मीनू से प्रणाली के नेटवर्क संगठन/संस्थान के परिचय को देख सकते हैं। जिसे नेटवर्क संगठन/संस्थान  के वेबसाइट नियंत्रक (Admin) ने अपलोड किया है।

 

      समाचार - इस मीनू से प्रणाली के नेटवर्क संगठन/संस्थान के समाचार को देख सकते हैं। जिसे नेटवर्क संगठन/संस्थान  के वेबसाइट नियंत्रक (Admin) ने अपलोड किया है।

 

       सेवा कार्य - इस मीनू से प्रणाली के नेटवर्क संगठन/संस्थान के सेवा कार्य को देख सकते हैं। जिसे नेटवर्क संगठन/संस्थान  के वेबसाइट नियंत्रक (Admin) ने अपलोड किया है।

 

       सम्पर्क - इस मीनू से प्रणाली के नेटवर्क संगठन/संस्थान के वेबसाइट नियंत्रक (Admin) से सम्पर्क किया जा सकता है।

                  

नेतृत्व

        संसदीय क्षेत्र - इस मीनू से कोई भी संसदीय क्षेत्र स्तर पर टाप 25 प्रत्याशी (नेता-LEADER)) जिन्हें पंजीकृत सदस्यों ने अपना मत देकर बनाया है, की सूची देख सकते हैं।

       विधायक क्षेत्र - इस मीनू से कोई भी विधायक क्षेत्र स्तर पर टाप 25 प्रत्याशी (नेता-LEADER)) जिन्हें पंजीकृत सदस्यों ने अपना मत देकर बनाया है, की सूची देख सकते हैं।

        डाक क्षेत्र - इस मीनू से कोई भी पिनकोड क्षेत्र स्तर पर पिन कोड एरिया एजेन्सी का अनुमानित आय, पता (यदि नियुक्त है) और कुल प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य की संख्या को देख सकता है।

 

        सदस्य   इस मीनू से कोई भी पिनकोड क्षेत्र स्तर पर विभिन्न वर्ग के प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य को देख सकता है।

 

विस्तृत जानकारी

        प्रेरक प्रणाली के प्रेरक/एजेन्ट के विषय में विवरण इस मीनू में है।

       

       विवरणिका - प्रणाली का विवरणिका (Prospectus) इस मीनू में है। अर्थात इस पुस्तिका को इस मीनू से भी पढ़ सकते हैं और PDF File के रूप में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

 

        प्रचार सामग्री इस मीनू में विभिन्न प्रकार के प्रचार सामग्री उपलब्ध हैं जिन्हें डाउनलोड कर प्रणाली से जुड़े व्यक्ति कर सकते हैं।

 

        सम्पूर्ण क्रान्ति -  इस मीनू में “सम्पूर्ण क्रान्ति” से सम्बन्धित शिक्षाप्रद सामग्री उपलब्ध हैं।

 

    घोषणा-पत्र इस मीनू में सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित “एक भारत-श्रेष्ठ भारत निर्माण” के लिए वे आवश्यक कार्य हैं जिन्हें भारत के नागरिक को जानना चाहिए और इसके लिए समर्थन भी करना चाहिए। महान भारत निर्माण के लिए नागरिकों का यह कर्तव्य भी है।

     शास्त्र-साहित्य इस मीनू में सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” निर्माण के लिए आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत के आधार पर युग परिवर्तन श्रृंखला के शास्त्र-साहित्य की सूची और उन्हें खरीदने की व्यवस्था है।

 

लाभकारी वेबसाइट - इस मीनू से ऐसे अनेक वेबसाइट की जानकारी प्राप्त होती है जिससे घर से बिना धन निवेश किये ही इन्टरनेट द्वारा धन कमा सकते हैं।

 

लोगिन -     इस मीनू से पंजीकृत प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य लागइन करके अपना कार्य सम्पन्न करता है।

 

सम्पर्क - इस मीनू से प्रणाली के मुख्य वेबसाइट नियंत्रक (Admin) से सम्पर्क किया जा सकता है।

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नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया
सभी उपरोक्त तीनों वेबसाइट से सम्बन्धित  संगठन/संस्थान नेटवर्क से जुड़ सकता है जिससे वह कहीं से भी देखा जा सके और एक-दूसरे के सम्पर्क में आ सकें।  इसके लिए निम्न प्रक्रिया है-

1. डोमेन नेम (Domain name)  संगठन/संस्थान के नाम से जो उपलब्ध हो, वेबसाइट डेवलपमेन्ट और होस्टिंग (Hosting), सुरक्षा (Security) के लिए https://  जिससे Google Chrome पर भी वेबसाइट खुले का शुल्क रूपये 5000/- (प्रथम बार) हैं। और रूपये 3000/- प्रतिवर्ष नवीनीकरण शुल्क है।
2. 1600x300 PPI( Pixel Per Inch) में संगठन/संस्थान के बैनर का JPG File.
उपरोक्त के साथ निम्न पते पर सम्पर्क करें

एजेन्ट पंजीकरण (Agent Registration)
उपरोक्त तीनों में से किसी वेबसाइट से पंजीकरण (Registration) करने पर वह प्रणाली का एजेन्ट कहलाता है जिसे प्रणाली द्वारा एक ID No. और स्वयं द्वारा बनाया गया पासवर्ड (Password) प्राप्त होता है जिसे आपको याद रखना होता है। पंजीकरण (Registration) में निम्नलिखित जानकारी मांगी जाती है-

स्पान्सर आईडी (Sponsore ID) - (यदि हो, नहीं तो खाली छोड़ दें)
नाम (जैसा बैंक खाते में है) - (भरना है)
(Name as in Bank Account) 
देश (Country) – भारत (INDIA) (क्योंकि प्रणाली केवल भारत के लिए ही है)
प्रदेश (STATE) - (चुनना है)
जिला (District) - (चुनना है)
संसदीय क्षेत्र  (MP AREA) - (चुनना है)
विधायक क्षेत्र (MLA AREA) - (चुनना है)
पिन कोड (PIN CODE) - (चुनना है)
मकान संख्या/गाँव/मोहल्ला - (भरना है)
(HOUSE NO./VILLAGE/MOHALLA) 
मोबाइल नम्बर (MOBILE NO.) - (भरना है)
व्यवसाय (PROFFESION) - (चुनना है)

एजेन्ट लाग इन (Agent Login)

उपरोक्त तीनों में से किसी वेबसाइट से पंजीकरण (Registration) करने पर प्रणाली द्वारा प्राप्त ID No. और स्वयं द्वारा बनाया गया पासवर्ड (Password) प्राप्त होता है जिससे आप लागइन (Login) करते हैं। लागइन (Login) करने पर निम्न मीनू सामने आते हैं।

DASH BOARD
लागइन (Login) करने पर यह स्थिति आपकी अपने आप आ जाती है। जिसमें आपका सारांश स्थिति दिखता है। जैसे आपका नाम, ID No., DESIGNATION, STATUS, EARNING, WITHDRAW इत्यादि।
PROFILE
इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य अपना व्यक्तिगत विवरण, पासवर्ड, बैंक विवरण इत्यादि भर या बदल सकता है।
DESIGNATION
इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य स्वयं को परियोजना-1 (PROJECT-1) के पद 1. पिन कोड एरिया एजेन्सी  (PIN CODE AREA AGENCY-PCAA) 2. विधायक प्रत्याशी 3. सांसद प्रत्याशी और परियोजना-2 (PROJECT-2) के पद 1. मण्डल प्रेरक (Division Catalyst-Dv.C) - मण्डल क्षेत्र - पद – 1, 2. जिला प्रेरक (District Catalyst-Dt.C) - जिला क्षेत्र - पद – 1, 3. ”विश्वशास्त्र“ मन्दिर (Vishwshastra Temple-V.T) - जिला क्षेत्र - पद – 1, 4.  ब्राण्ड फ्रैन्चाइजी (Brand Franchisee-B.F) - जिला क्षेत्र - पद – 1, 5. ग्राम/नगर वार्ड प्रेरक (Village/City ward Catalyst-V.C) - ग्राम/नगर वार्ड क्षेत्र - पद – 1 के लिए नियुक्त कर सकता है। पद विधायक प्रत्याशी और सांसद प्रत्याशी को छोड़कर शेष पदों को अपना बायोडाटा e_mail : rashtranitiayog@gmail.com पर ईमेल करना होगा। योग्य की नियुक्ति कर दी जायेगी। योग्यता के लिए आगे परियोजना-2 (PROJECT-2) का पृष्ठ देंखे।
VOTING - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य अपने विधायक और सांसद प्रत्याशी को वोट दे सकता है।
PROPERTY - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य जिसे यदि प्रापर्टी सम्बन्धित कुछ बेचना हो उसका विवरण दे सकता है। और उसमें बदलाव या हटा सकता हे।
LOCAL-VOCAL - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य अपने जिले में उत्पादित की जाने वाली वस्तु के निर्माता की सूची देख सकता है। जिसके उत्पाद को आय के 25% की धनराशि से खरीदना है।
AGENT - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य अपने पिनकोड क्षेत्र के 1.प्रशिक्षु एजेन्ट (TRAINEE AGENT), 2.स्वतन्त्र एजेन्ट (FREELANCE AGENT), 3.स्थायी एजेन्ट (PERMANENT AGENT) की सूची देख सकता है। और किसी भी प्रशिक्षु एजेन्ट (TRAINEE AGENT) जो FREE AGENT होता है का अपने उपलब्ध FUND से शुल्क का भुगतान कर सकता है।
STATUS - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य स्वयं की स्थिति को देख सकता है कि वह 1.प्रशिक्षु एजेन्ट (TRAINEE AGENT), 2.स्वतन्त्र एजेन्ट (FREELANCE AGENT), 3.स्थायी एजेन्ट (PERMANENT AGENT) में से किस स्थिति में है।
FUND - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य उपलब्ध FUND,  प्राप्त FUND और भुगतान किया गया FUND देख सकता है।
EARNING - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य स्वयं के आय का विवरण देख सकता है।
WITHDRAW - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य स्वयं के आय जो वह प्राप्त कर चुका है, का विवरण देख सकता है।
LOGOUT - इस मीनू से प्रेरक/एजेन्ट/सदस्य 

आय और रायल्टी देने का हमारा आधार
राष्ट्र निर्माण का हमारा कार्य एक महान और ऐतिहासिक उद्देश्य के लिए व्यक्ति से लेकर विश्व के चहुमुखी विकास के लिए विकसित की गयी है जिसका सपना सत्य रूप में अपने देश भारत से प्रेम करने वाले देखते होंगे। हमारा कार्य नागरिकों को कैसे और किन क्षेत्रों में लाभ देता है इसके लिए निम्नलिखित का क्रमिक अध्ययन आवश्यक है-
01. व्यापार का जन्म विचार से होता है। विचार पहले किसी एक व्यक्ति के अन्दर जन्म लेता है उसके उपरान्त भले ही वह कई व्यक्ति के समूह का बन जाये, अलग बात है। जब समूह का बन जाता है तब वह कम्पनी, कार्पोरेशन, एन.जी.ओ., ट्रस्ट और यदि अधिक शक्तिशाली हो तो राष्ट्र का व्यापार बन समाज के सामने आता है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं-
राजनीतिक क्षेत्र में एक ग्राम प्रधान/सभासद, क्षेत्र पंचायत सदस्य, क्षेत्र प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, मंत्री इत्यादि बनने का विचार सर्वप्रथम उस व्यक्ति के मन में आता है। फिर वह बाहर व्यक्त होता है और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह धन, सम्बन्ध, जन आधार इत्यादि का प्रयोग करता है।
व्यापारिक क्षेत्र में व्यापार के वस्तु का विचार सर्वप्रथम व्यक्ति के अन्दर आता है फिर वह बाहर प्रोप्राइटरश्पि, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी, लिमिटेड कम्पनी इत्यादि के रूप में बाहर आता है और उस व्यापार के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह सरकारी प्रक्रिया, कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च करता है।
धार्मिक क्षेत्र में भी आजकल स्वयं के विचार के अनुसार स्वयं को लक्ष्य के अनुसार स्थापित करने के लिए व्यक्ति सरकारी प्रक्रिया, कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च करता है।
उपरोक्त कर्म करने के बाद भी बहुत से व्यक्ति अपना लक्ष्य नहीं प्राप्त कर पाते फिर भी वे कोशिश जारी रखते हैं। जिस प्रकार भारत सरकार हो या प्रदेश सरकार घाटे में भी चलने के बावजूद अपना व्यापार, सामाजिक-जन कल्याण का कार्य बन्द नहीं करती बल्कि कर्ज लेकर भी उसे चलाते रहती है।
02. राष्ट्र निर्माण के इस व्यापार में भी उपरोक्त के अनुसार इसके आविष्कारक ने आविष्कार की स्थापना को प्राप्त (लक्ष्य) करने के लिए सरकारी प्रक्रिया, कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च कर रहा है। जिसके निम्न स्रोत हैं-
आविष्कारक का स्वयं का धन।
आविष्कारक के शुभचिन्तकों द्वारा प्राप्त आर्थिक सहयोग।
आविष्कार के स्थापनार्थ स्थापित प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में शामिल शेयरधारकों द्वारा निवेश किया गया धन।
व्यापार के सशक्त प्रणाली के कारण अन्य स्थापित प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी व मल्टीनेशनल कम्पनी से समझौता।
व्यापार प्रारम्भ होने से प्राप्त धन व लाभ को व्यापार विकास में निवेश करने की प्रबल इच्छा।
  अर्थात् हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तक अपने व्यापार में शामिल लोगों के साख को सदैव निभाने में पूर्णतया सक्षम हैं। 
  उदाहरण स्वरूप सभी शिक्षा संस्थान, शिक्षा देने के बदले एक शुल्क लेते हैं। उसमें से शिक्षकों का वेतन, अन्य खर्चों इत्यादि देने के बाद जो बचता है। वह उस शिक्षा संस्थान का लाभ होता है। छात्रवृत्ति, सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। बहुत कम लेकिन ऐसे शिक्षा संस्थान भी हैं जो सभी छात्रों को शिक्षण शुल्क का शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं। ये छात्रवृत्ति की राशि उन्हें सरकार, औद्यौगिक व व्यापारिक समूहों द्वारा शिक्षा के विकास के लिए प्राप्त होती है जो कहीं न कहीं से जनता के साथ किये गये व्यापार द्वारा ही उन्हें प्राप्त होता है। एक तरफ व्यापार, दूसरी तरफ समाज सेवा और लक्ष्य विकास और करने वाले की प्रसिद्धि यही एक पूर्ण व्यापार का कर्मज्ञान है। यदि यह आप समझ गये तो आपको व्यापार समझ में आ जायेगा।
  हमारे प्रणाली में हम आय, बाद के छात्र से प्राप्त शुल्क में से लाभ को पहले के छात्रों में आय के रूप में वितरित करते रहते हैं। स्पष्ट है हम विद्यार्थी से जो शुल्क पाते हैं उसमें हमारा लाभ भी है। हम अपने खर्चों को सम्भालते हुए, शेष राशि को आय के रूप में प्रदान करते रहते हैं जिससे इस शिक्षा के प्रति रूचि बढ़े। शिक्षा संस्थान ऐसा नहीं करते लेकिन हम ऐसा कर रहे हैं। भारत में ऐसा कोई कानून नहीं कि उत्पाद का मूल्य सरकार निर्धारित करे। और ऐसी स्थिति में तो और भी मुश्किल है जब उत्पाद का आविष्कार किसी व्यक्ति का स्वयं का हो। 
  पुनर्निर्माण, राष्ट्र निर्माण का व्यापार है इसे उसी प्रकार किया जा रहा है जिस प्रकार एक कम्पनी का प्रबन्ध और मार्केटिंग की जाती है। आम जनता से जुड़ा हुआ जब कोई व्यापार होता है तब कम्पनी एक निर्धारित धन विज्ञापन व प्रचार-प्रसार में खर्च करती है जो पम्फलेट, पोस्टर, बैनर, पत्रिका, समाचार-पत्र, प्रदर्शन, पुस्तिका इत्यादि के रूप में होती है। इस व्यापार के प्रचार-प्रसार में भी समय-समय पर इनका प्रयोग सदैव होता ही रहेगा। इन सब के साथ एक और विधि प्रयोग की जा रही है जिससे हमें प्रचार-प्रसार का लाभ प्राप्त होता है वह है नगद राशि (छात्रवृत्ति)। यह छात्रवृत्ति इस व्यापार के प्रचार-प्रसार के अन्तर्गत विज्ञापन खर्च का ही हिस्सा है। जिसकी राशि भी समूह व कम्पनी के अन्य परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार व मार्केटिंग विकास के कारण व्यापारिक, ऋण, निवेश व अनुदान के रूप में प्राप्त होती है और उसका प्रयोग हम नगद राशि (छात्रवृत्ति) व सामाजिक सहायता के रूप में प्रदान करते रहते हैं।
  कोई अपने व्यापार से प्राप्त लाभ को अपने व अपने परिवार के लिए संचित करता है। यदि कोई अपने व्यापार से प्राप्त लाभ को सम्पूर्ण रूप से समाज पर ही खर्च कर दें तो उस पर भारत का कौन सा कानून काम करेगा? व्यापार से अलग साख का लाभ गोपनीय और बेहिसाब होता है। अगर उसे हमें समाज को देना है तो वह मनुष्य को ही दिया जाता है। इसलिए पता तो हो किसे दिया जाय, जिसके लिए पंजीकरण आवश्यक है।
  हमारे आय व धन आदान-प्रदान के विभिन्न परियोजनाएँ भी हैं। आविष्कारक के स्वयं के आय का अनुमान उन्हें Google पर Lava Kush Singh Vishwmanav सर्च कर देखा जा सकता है। अधिकतर e-commerce वेबसाइट पर उनकी पुस्तकें अभी हिन्दी में उपलब्ध हैं जिसका अन्य भाषाओं में रूपान्तरण भी हो रहा है। ये सभी पुस्तकें वैश्विक स्तर की हैं और उसका बाजार विश्वभर में है। 130 करोड़ की जनसंख्या वाला भारत देश में हिन्दी भाषी जनसंख्या 70 करोड़ है। और लाल किताब - पीला किताब, धर्म ग्रन्थ इत्यादि बिकते रहते हैं। और वो किताब जिसे ”विश्वशास्त्र“ कहा जा रहा है जो एक काल, मनवन्तर, युग परिवर्तन से लेकर विश्व सरकार के गठन तक का मार्गदर्शन से युक्त हो जो व्यक्ति के पूर्ण ज्ञान, पूर्ण शिक्षा पाठ्यक्रम सहित नीति आयोग तक के लिए उपयोगी है। भारत में हिन्दी भाषा जानने वालों की स्थिति ये है- 1. बिहार (जनसंख्या-, 103,804,637 साक्षरता - 63.82 प्रतिशत), 2. छत्तीसगढ़ (जनसंख्या-25,540,196, साक्षरता - 71.04 प्रतिशत), 3. हरियाणा (जनसंख्या- 25,353,081, साक्षरता - 76.64 प्रतिशत), 4. हिमाचल प्रदेश (जनसंख्या- 6,856,509, साक्षरता - 83.78 प्रतिशत), 5. झारखण्ड (जनसंख्या- 32,966,238, साक्षरता - 67.63 प्रतिशत), 6. मध्य प्रदेश (जनसंख्या- 72,597,565, साक्षरता - 70.63 प्रतिशत), 7. महाराष्ट्र (जनसंख्या- 112,372,972, साक्षरता - 82.91 प्रतिशत), 8. पंजाब (जनसंख्या- 27,704,236, साक्षरता - 76.68 प्रतिशत), 9. राजस्थान (जनसंख्या- 68,621,012, साक्षरता - 67.06 प्रतिशत), 10. उत्तर प्रदेश (जनसंख्या- 199,581,477, साक्षरता - 69.72 प्रतिशत), 11. उत्तराखण्ड (जनसंख्या-10,116,752, साक्षरता - 79.63 प्रतिशत), 12. पश्चिम बंगाल (जनसंख्या- 91,347,736, साक्षरता - 77.08 प्रतिशत), 13. चण्डीगढ़ (जनसंख्या- 1,054,686, साक्षरता - 86.43 प्रतिशत), 14. दिल्ली (जनसंख्या- 16,753,235, साक्षरता - 86.34 प्रतिशत)

”विश्वशास्त्र“ त्रिलोक के अदृश्य कल्पना/कथा नहीं बल्कि इस लोक के व्यावहारिक ज्ञान का शास्त्र है।
सभी शिक्षा एक तरफ, ”विश्वशास्त्र“ एक तरफ
सभी पुस्तक-शास्त्र एक तरफ, ”विश्वशास्त्र“ एक तरफ
हर घर का शान और प्राण ”विश्वशास्त्र“,
धरती के नागरिक का जीवनशास्त्र ”विश्वशास्त्र“
स्वर्ण युग का शास्त्र ”विश्वशास्त्र“ की स्थिति है।

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परियोजना – 2 (PROJECT-2)
पुनर्निर्माण - सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग
(RENEW-Real Education National Express Way)
      “राष्ट्र निर्माण...इस महान कार्य में राजनीति तो केवल एक अंग है। हम केवल राजनीति को ही अर्पित नहीं होंगे, न केवल सामाजिक समस्याओं, न ईश्वर-मीमांसा या दर्शन या साहित्य या विज्ञान को बल्कि हम इन सबको एक “सत्व” में एक अस्तित्व में शामिल करेंगे और हमें विश्वास है कि यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यही हमारा राष्ट्रीय धर्म है। जिसके सार्वभौम होने का विश्वास भी हमें है। एक चीज जिसे हमें सबसे पहले प्राप्त करना है वह है शक्ति-शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्ति और सर्वोपरि रूप से आध्यात्मिक शक्ति, जो दूसरी सारी शक्तियों का अक्षय स्रोत है। अगर हममें शक्ति है तो दूसरी हर चीज बहुत आसानी और स्वाभाविकता के साथ हमसे जुड़ जायेगी।”                                                                                                                     
-महर्षि अरविन्द 

“उसी मूल सत्य की फिर से शिक्षा ग्रहण करनी होगी, जो केवल यहीं से, हमारी इसी मातृभूमि से प्रचारित हुआ था। फिर एक बार भारत को संसार में इसी मूल तत्व का-इसी सत्य का प्रचार करना होगा। ऐसा क्यों है? इसलिए नहीं कि यह सत्य हमारे शास्त्रों में लिखा है वरन् हमारे राष्ट्रीय साहित्य का प्रत्येक विभाग और हमारा राष्ट्रीय जीवन उससे पूर्णतः ओत-प्रोत है। इस धार्मिक सहिष्णुता की तथा इस सहानुभूति की, मातृभाव की महान शिक्षा प्रत्येक बालक, स्त्री, पुरुष, शिक्षित, अशिक्षित सब जाति और वर्ण वाले सीख सकते हैं। तुमको अनेक नामों से पुकारा जाता है, पर तुम एक हो। तथाकथित समाज-सुधार के विषय में हस्तक्षेप न करना क्योंकि पहले आध्यात्मिक सुधार हुये बिना अन्य किसी भी प्रकार का सुधार हो नहीं सकता, भारत के शिक्षित समाज से मैं इस बात पर सहमत हूँ कि समाज का आमूल परिवर्तन करना आवश्यक है। पर यह किया किस तरह जाये? सुधारकों की सब कुछ नष्ट कर डालने की रीति व्यर्थ सिद्ध हो चुकी है। मेरी योजना यह है, हमने अतीत में कुछ बुरा नहीं किया। निश्चय ही नहीं किया। हमारा समाज खराब नहीं, बल्कि अच्छा है। मैं केवल चाहता हूँ कि वह और भी अच्छा हो। हमें असत्य से सत्य तक अथवा बुरे से अच्छे तक पहुँचना नहीं है। वरन् सत्य से उच्चतर सत्य तक, श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर और श्रेष्ठतम तक पहुँचना है। मैं अपने देशवासियों से कहता हूँ कि अब तक जो तुमने किया, सो अच्छा ही किया है, अब इस समय और भी अच्छा करने का मौका आ गया है।”
“आखिर इस उच्च शिक्षा के रहने या न रहने से क्या बनता बिगड़ता है? यह कहीं ज्यादा अच्छा होगा कि यह उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी के दफ्तरों को खाक छानने के बजाय लोग थोड़ी सी यान्त्रिक शिक्षा प्राप्त करें जिससे काम-धन्धें में लगकर अपना पेट तो भर सकेंगे।”                                                        
- स्वामी विवेकानन्द 

पुनर्निर्माण-राष्ट्र निर्माण का व्यापार
जो व्यक्ति या देश केवल आर्थिक उन्नति को ही सर्वस्व मानता है वह व्यक्ति या देश एक पशुवत् जीवन निर्वाह के मार्ग पर है-जीना और पीढ़ी बढ़ाना। दूसरे रूप में इसे ऐसे समझा जा सकता है कि ऐसे व्यक्ति जिनका लक्ष्य धन रहा था वे अपने धन के बल पर अपनी मूर्ति अपने घर पर ही लगा सकते हैं परन्तु जिनका लक्ष्य धन नहीं था, उनका समाज ने उन्हें, उनके रहते या उनके जाने के बाद अनेकों प्रकार से सम्मान दिया है और ये सार्वजनिक रूप से सभी के सामने प्रमाणित है। पूर्णत्व की प्राप्ति का मार्ग शारीरिक-आर्थिक उत्थान के साथ-साथ मानसिक-बौद्धिक उत्थान होना चाहिए और यही है ही। इस प्रकार भारत यदि पूर्णता व विश्व गुरूता की ओर बढ़ना चाहता है तब उसे मात्र कौशल विकास ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय बौद्धिक विकास की ओर भी बढ़ना होगा। बौद्धिक विकास, व्यक्ति व राष्ट्र का इस ब्रह्माण्ड के प्रति दायित्व है और उसका लक्ष्य है। 
राष्ट्र के पूर्णत्व के लिए पूर्ण शिक्षा निम्नलिखित शिक्षा का संयुक्त रूप है-

अ-सामान्यीकरण (Generalisation) शिक्षा  
ज्ञान के लिए- यह शिक्षा व्यक्ति और राष्ट्र का बौद्धिक विकास कराती है जिससे व्यक्ति व राष्ट्रीय सुख में वृद्धि होती है।

ब-विशेषीकरण (Specialisation) शिक्षा  
कौशल के लिए- यह शिक्षा व्यक्ति और राष्ट्र का कौशल विकास कराती है जिससे व्यक्ति व राष्ट्रीय उत्पादकता में वृद्धि होती है।

स-सत्य नेटवर्क (REAL NETWORK)  
समाज में प्रकाशित होने के लिए - क्योंकि कोई भी क्यों न हो उसे स्वयं अपना परिचय (BIO-DATA) देना पड़ता है तभी उसके अनुसार समाज उसका उपयोग करता है।
  वर्तमान समय में विशेषीकरण की शिक्षा, भारत में चल ही रहा है और वह कोई बहुत बड़ी समस्या भी नहीं है। समस्या है सामान्यीकरण शिक्षा की। व्यक्तियों के विचार से सदैव व्यक्त होता रहा है कि-मैकाले शिक्षा पद्धति बदलनी चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति व पाठ्यक्रम बनना चाहिए। ये तो विचार हैं। पाठ्यक्रम बनेगा कैसे?, कौन बनायेगा? पाठ्यक्रम में पढ़ायेंगे क्या? ये समस्या थी। और वह हल की जा चुकी है। जो भारत सरकार के सामने सरकारी-निजी योजनाओं जैसे ट्रांसपोर्ट, डाक, बैंक, बीमा की तरह निजी शिक्षा के रूप में “पुनर्निर्माण-सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग” द्वारा पहली बार इसके आविष्कारक द्वारा प्रस्तुत है। जो राष्ट्र निर्माण का व्यापार है।

राष्ट्र निर्माण का व्यापार और उसकी विधि क्या है?
  राष्ट्र निर्माण के लिए परियोजना पुनर्निर्माण के पाठ्यक्रम को बेचने के लिए विद्यार्थीयों का प्रवेश ही व्यापार है और उसके लिए निम्नविधि अपनायी गयी है-

अ. निर्देश विधि (Reffer Method)- द्वारा स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक (Freelance Catalyst-FC)
  पाठ्यक्रम को खरीदने वाले व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे को निर्देश देकर बिकवाने की विधि को निर्देश विधि कहते हैं।
  एक बार पाठ्यक्रम खरीदने वाला व्यक्ति/संस्था हमारे लिए स्वतः ही स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक भी बन जाता है। स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक यदि व्यापार करना चाहता है तो वह पूरे भारत देश में कहीं से भी दूसरे विद्यार्थी को पंजीकृत करवा सकता है। यह पंजीकृत नया विद्यार्थी, जीवन में जब भी पाठ्यक्रम का शुल्क जमा करता है तब स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक को नियमानुसार अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है। स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक द्वारा पंजीकृत विद्यार्थी, जब भी छात्रवृत्ति प्राप्त करता है तब भी स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक को नियमानुसार अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है। यह क्रम स्वतन्त्र प्रवेश प्रेरक द्वारा पंजीकृत प्रत्येक विद्यार्थी के साथ चलता रहता है। 

ब. पारम्परिक विधि (Traditional Method)- द्वारा क्षेत्राधिकृत प्रेरक (Authorized Area Catalyst-AAC)
प्रवेश प्रेरक केन्द्र की विधि। इस विधि में प्रेरक/केन्द्र के क्षेत्र से हुये प्रवेश पर एक सुनिश्चित लाभ प्रेरक/केन्द्र को प्राप्त होती है चाहे विद्यार्थी का प्रवेश किसी के द्वारा हुआ हो। जबकि ये प्रेरक/केन्द्र स्वंय अपने आप में स्वतन्त्र प्रेरक भी हैं। जिस प्रकार वर्तमान में शुल्क में कमीशन आधारित अनेक विश्वविद्यालयों के दूरस्थ शिक्षा के स्टडी सेन्टर खुले हुए हैं या खुल रहे हैं। उसी प्रकार निम्न प्रकार से नीचे से उपर तक के प्रेरक/प्रवेश केन्द्र द्वारा-

पुननिर्माण पद
1. मण्डल प्रेरक (Division Catalyst-Dv.C) - मण्डल क्षेत्र - पद – 1, अनिवार्य योग्यता - MBA
2. जिला प्रेरक (District Catalyst-Dt.C) - जिला क्षेत्र - पद – 1, अनिवार्य योग्यता - NGO
3. ”विश्वशास्त्र“ मन्दिर (Vishwshastra Temple-V.T)-जिला क्षेत्र-पद–1, योग्यता-जन्म से ब्राह्मण
4. ब्राण्ड फ्रैन्चाइजी (Brand Franchisee-B.F) - जिला क्षेत्र - पद - 1, अनिवार्य योग्यता - व्यापारी
5. डाक क्षेत्र प्रवेश केन्द्र (Postal area Admission Center-PAC)- पिन कोड क्षेत्र - पद - 1
6. ग्राम/नगर वार्ड प्रेरक (Village/City ward Catalyst-V.C) - ग्राम/नगर वार्ड क्षेत्र - पद – 1
7. स्वतन्त्र प्रेरक (Freelance Catalyst-F.C) - पद – अनेक

21st Century Definition of MLM Leader, Net worker & Business
* Fix your Business area
* Fix Your Customer/Network
* Refer/Sale any where in India
* No Liability for Collection/Delivery
“कोई दूध पीता है, कोई मक्खन खाता है। कोई पाठ्य पुस्तक पढ़ता है, कोई शोध पत्र पढ़ता है। कम समय में अधिक पाना हो तो मक्खन खाना चाहिए और शोध पत्र पढ़ना चाहिए। पूर्ण नदी का ज्ञान तभी होता है जब प्रारम्भ से अन्त को देखा जाये अन्यथा एक स्थान से देखने पर तो वह मात्र बहता हुआ जल है।”                         
- लव कुश सिंह“विश्वमानव”
छात्रों को आमंत्रण
प्रिय छात्रों एवं विद्यार्थीयों, 
हमारे दृष्टि में छात्र वे हैं जो किसी शैक्षणिक संस्थान के किसी शैक्षणिक पाठ्यक्रम में प्रवेश ले कर अध्ययन करते हैं। और विद्यार्थी वे हैं जो सदैव अपने ज्ञान व बुद्धि का विकास कर रहे हैं और उसके वे इच्छुक भी हैं। इस प्रकार सभी मनुष्य व जीव, जीवन पर्यन्त विद्यार्थी ही बने रहते हैं चाहे उसे वे स्वीकार करें या ना करें। जबकि छात्र जीवन पर्यन्त नहीं रहा जा सकता।
कहा जाता है-”छात्र शक्ति, राष्ट्र शक्ति“, लेकिन कौन सी शक्ति? उसकी कौन सी दिशा? तोड़-फोड़, हड़ताल, या अनशन वाली या समाज व राष्ट्र को नई दिशा देने वाली? स्वामी विवेकानन्द को मानने व उनके चित्र लगाकर छात्र राजनीति द्वारा राष्ट्र को दिशा नहीं मिल सकती बल्कि उन्होंने क्या कहा और क्या किया था, उसे जानने और चिन्तन करने से राष्ट्र को दिशा मिल सकती है और ”छात्र शक्ति, राष्ट्र शक्ति“ की बात सत्य हो सकती है। हम सभी ज्ञान युग और उसी ओर बढ़ते समय में हैं इसलिए केवल प्रमाण-पत्रों वाली शिक्षा से काम नहीं चलने वाला है।
छात्रों की विवशता है कि उनके शिक्षा बोर्ड व विश्वविद्यालय जो पाठ्यक्रम तैयार करेंगे वही पढ़ना है और छात्रों की यह प्रकृति भी है कि वही पढ़ना है जिसकी परीक्षा ली जाती हो। जिसकी परीक्षा न हो क्या वह पढ़ने योग्य नहीं है? बहुत बढ़ा प्रश्न उठता है। तब तो समाचार पत्र, पत्रिका, उपन्यास इत्यादि जो पाठ्क्रम के नहीं हैं उन्हें नहीं पढ़ना चाहिए। शिक्षा बोर्ड व विश्वविद्यालय तो एक विशेष पाठ्यक्रम के लिए ही विशेष समय में परीक्षा लेते हैं परन्तु ये जिन्दगी तो जीवन भर आपकी परीक्षा हर समय लेती रहती है तो क्या जीवन का पाठ्यक्रम पढ़ना अनिवार्य नहीं है? परन्तु यह पाठ्यक्रम मिलेगा कहाँ? निश्चित रूप से ये पाठ्यक्रम अब से पहले उपलब्ध नहीं था लेकिन इस संघनित (Compact) होती दुनिया में ज्ञान को भी संघनित (Compact) कर पाठ्यक्रम बना दिया गया है। इस पाठ्यक्रम का नाम है-”सत्य मानक शिक्षा“ और आप तक पहुँचाने के कार्यक्रम का नाम है-”पुनर्निर्माण-सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग (RENEW- Real Education National Express Way)। यह वही पाठ्यक्रम है जो मैकाले शिक्षा पाठ्यक्रम (वर्तमान शिक्षा) से मिलकर पूर्णता को प्राप्त होगा। इस पाठ्यक्रम का विषय वस्तु जड़ अर्थात सिद्धान्त सूत्र आधारित है न कि तनों-पत्तों अर्थात व्याख्या-कथा आधारित। जिसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है- मैकेनिक जो मोटर बाईडिंग करता है यदि वह केवल इतना ही जानता हो कि कौन सा तार कहाँ जुड़ेगा जिससे मोटर कार्य करना प्रारम्भ कर दे, तो ऐसा मैकेनिक विभिन्न शक्ति के मोटर का आविष्कार नहीं कर सकता जबकि विभिन्न शक्ति के मोटर का आविष्कार केवल वही कर सकता है जो मोटर के मूल सिद्धान्त को जानता हो। ऐसी ही शिक्षा के सम्बन्ध में स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था-”अनात्मज्ञ पुरूषों की बुद्धि एकदेशदर्शिनी (Single Dimensional) होती है। आत्मज्ञ पुरूषों की बुद्धि सर्वग्रासिनी (Multi Dimensional) होती है। आत्मप्रकाश होने से, देखोगे कि दर्शन, विज्ञान सब तुम्हारे अधीन हो जायेंगे“।
यह शिक्षा आप तक पहुँचे और आपकी रूचि बनी रहे इसलिए इसमें पाठ्यक्रम के शुल्क के बदले छात्रवृत्ति व अन्य सहायता के साथ बहुत सी ऐसी सुविधा दी गईं है जो आपके शारीरिक-आर्थिक-मानसिक विकास व स्वतन्त्रता के लिए आवश्यक है। ये सुविधा व सहायता हमारे विद्यार्थीयों को संतुष्टि, स्वतन्त्रता और शक्ति सम्पन्न बनाती है। जिससे वे जिस क्षेत्र में चाहे अपना मार्ग चुन सकते हैं। ”पुनर्निर्माण-सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग (RENEW- Real Education National Express Way) के विद्यार्थी बनते ही विद्यार्थी को निम्न शक्ति प्राप्त हो जाती है चाहे उसका उपयोग-प्रयोग करें या ना करें-

1. हमारा विद्यार्थी सार्वभौम पूर्ण ज्ञान से युक्त होकर मानसिक स्वतन्त्रता के मुख्यधारा के मार्ग पर चलते हुये शिक्षित, विचारशील, रचनात्मक और नेतृत्वशील बनेगा।
2. हमारा विद्यार्थी ”सत्य मानक शिक्षा“ का व्यापार करे या ना करे, दोनों स्थिति में छात्रवृत्ति और सहायता को प्राप्त करता रहेगा।
3. हमारा कोई विद्यार्थी, हमारे से जुड़े 1. रेस्टूरेण्ट (Restaurants) 2. चिकित्सक (Doctors) 3. मेडिकल स्टोर (Medical Store) 4. दैनिक प्रयोग के दुकान (FMCG Store) 5. जैविक स्टोर (Organic Store) 6. हमारा विद्यार्थी (Our Student) या किसी भी डाक क्षेत्र प्रवेश केन्द्र से आवश्यकता पड़ने पर सप्ताह में 1 बार और अधिकतम रू0 500.00 की नगद राशि या सेवा या वस्तु प्राप्त कर सकता है जो लेने वाले के छात्रवृत्ति से समायोजित हो जाती है।
4. हमारा विद्यार्थी, यदि किसी भी प्रकार का व्यापार या समाजसेवा इत्यादि से है तो वह अपना विज्ञापन देकर अपने जिला क्षेत्र तक आसानी से पहुँच सकता है।
5. हमारा विद्यार्थी, अपने व्यवसाय और स्थान के अनुसार पूरे देश के अन्य विद्यार्थी से सम्पर्क कर सकता है और वर्गीकृत विज्ञापन में सूचीबद्ध हो सकता है।
6. हमारा विद्यार्थी, ब्लाग (Blog) के माध्यम से अपने किसी परियोजना (Project), फिल्म स्क्रिप्ट (Film Script), पुरातन, विलक्षण एवं दुर्लभ सूचना (Antique, Unique & Rare Information), पुस्तक (Book), सामान्य (General) को पूरे देश के सामने ला सकता है और लोगों के सम्पर्क में आ सकता है। 
7. हमारा विद्यार्थी शारीरिक-आर्थिक-मानसिक स्थिति से स्वतन्त्र होकर पूरे भारत देश में भ्रमण कर सकता है।
जय छात्र शक्ति, जय राष्ट्र शक्ति
मानने से, 
मानने वाले का कोई कल्याण नहीं होता,
कल्याण तो,
सिर्फ जानने वालों का ही होता रहा है, 
होता है और होता रहेगा।
                 “जो दिखता है वो तो बिकता ही है लेकिन जो नहीं दिखता वो सबसे अधिक बिकता है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ईश्वर, आस्था और ज्ञान है। प्रत्येक मनुष्य का निर्माण सर्वप्रथम न दिखने वाले विषय के खरीदने से ही हुआ है जिसके लिए धन प्रत्येक घर से जाता है और जो आता है वह दिखता नहीं है जिसे शिक्षा कहते है।”                      
- लव कुश सिंह“विश्वमानव”

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परियोजना – 3 (PROJECT-3)

 एक शहर - प्रोजेक्ट को पूर्ण करने की योजना

इतिहास गवाह है मँहगाई कभी कम नहीं हुयी है। समय के साथ प्रत्येक का विकास होता रहा है। बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती आवश्यकता और बढ़ते धन के साथ प्रत्येक वस्तु की कीमत भी बढ़ रही है। निवेश के अनेक साधन के बावजूद भूमि-मकान में निवेश सबसे सुरक्षित साधन है। सामान्यतः व्यक्ति इसमें निवेश करना पसन्द करते हैं। किसी भी भूमि की उपयोगिता को अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग नजरिये से भी देख सकते हैं। एक किसान, का नजरिया कृषि योग्य भूमि के लिए हो सकता है तो एक व्यापारी का व्यापार की दृष्टि से हो सकता है, तो किसी हाउसिंग डेवलपमेन्ट कम्पनी का घर-मकान बनाकर बेचने का हो सकता है, तो किसी का उद्योग स्थापित करने की दृष्टि, तो किसी का धार्मिक स्थल बनाने का हो सकता है। यह सब दृष्टि, उस भूमि और उसके आस-पास के संसाधन व उस क्षेत्र की ऐतिहासिकता से सम्बन्धित होता है। रियल स्टेट में निवेश की निम्न विधियाँ है जो अच्छा लाभ देती है-

01. रियल इस्टेट (प्रापर्टी) में निवेश की पारम्परिक विधि (प्राकृतिक चेतना विधि)

इस विधि को पारम्परिक विधि कहते हैं क्योंकि इसमें किसी बुद्धि की आवश्यकता नहीं होती। यदि आपके पास धन है तो किसी भी शहर में या उसके आस-पास भूमि-मकान खरीद ले, आपका धन समय के साथ बढ़ता रहेगा। इसे प्राकृतिक चेतना विधि इसलिए कहते हैं कि यह स्वाभाविक विकास के साथ विकास करता है अर्थात् उसके कीमत के विकास में आपका कोई योगदान नहीं होता।

02. रियल इस्टेट (प्रापर्टी) में निवेश की आधुनिक विधि (सत्य चेतना विधि)

इस विधि को आधुनिक विधि कहते हैं क्योंकि इसमें बुद्धि-योजना-व्यापार नीति की अत्यधिक आवश्यकता होती। यदि आपके पास धन है तो किसी भी शहर में या उसके आस-पास भूमि खरीद ले, और वहाँ के लिए एक अच्छी योजना बनायें, उसे प्रचारित करें जिससे आपका धन समय के साथ-साथ तथा आपके योजना के कारण तेजी से बढ़ता रहेगा। इसे सत्य चेतना विधि इसलिए कहते हैं कि यह स्वाभाविक विकास के साथ-साथ आपकी योजना के कारण विकास करता है अर्थात् उसके कीमत के विकास में आपकी योजना का योगदान होता है। ऐसी योजना या तो सरकार बनाती है या कोई सरकारी नियमानुसार व्यापारिक-सामाजिक संस्था।

सरकार की योजना में नगर विकास, औद्योगिक क्षेत्र का विकास, पर्यटन क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान इत्यादि के विकास से होता है और उस क्षेत्र के भूमि की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। इसका लाभ वही लोग ले पाते हैं जो सरकार की योजना को पहले ही जान जाते हैं।

ऐसी योजना सरकारी नियमानुसार व्यापारिक-सामाजिक संस्था बना सकती हैं। भारत देश एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता वाला देश है। घूमना मनुष्य की प्रकृति है। उसे उसके घर में चाहे कितना भी संसाधन क्यों न उपलब्ध हो, वह घूमने-पर्यटन करने जायेगा ही जायेगा। साथ ही वह सत्य-सुन्दर-शान्त स्थान पर रहना भी चाहेगा। और जब मनुष्य ऐसे स्थान पर रहना प्रारम्भ करने लगता है तब अपने-आप मनुष्य की आवश्यकता से सम्बन्धित वस्तुओं का व्यापार व व्यापारी भी उन्हीं में से निकल आते हैं। फिर जहाँ मनुष्य निवास करने लगता है तब सरकार व सरकारी व्यवस्था भी अपने-आप वहाँ पहुँचने लगती है। ऐसी योजनाओं के बहुत से उदाहरण हैं जहाँ का विकास का मूल कारण सरकारी नियमानुसार व्यापारिक-सामाजिक संस्था ही हैं।


व्यक्ति, एक विचार और अरबों रूपये का व्यापार

श्रीराम के नाम पर कितने का करोबार है?
श्रीकृष्ण के नाम पर कितने का करोबार है?
शिव-शंकर के नाम पर कितने का करोबार है?
बुद्ध के नाम पर कितने का करोबार है?
माँ वैष्णों देवी के नाम पर कितने का करोबार है?
सांई बाबा के नाम पर कितने का करोबार है?
विश्व के तमाम धर्म संस्थापकों व धर्मों के नाम पर कितने का करोबार है?
क्या ये उस कारोबार के मालिक हैं?
क्या ये उसका हिसाब व लाभ लेने आते हैं?
जबकि संसार के किसी भी व्यापारिक संगठन से सर्वाधिक रोजगार देने वाला उपरोक्त करोबार है।
हे मनुष्यों
जिस दिन तुम इसे समझ जाओगे।
उस दिन तुम धर्म को समझ जाओगे।
धर्म के फल, व्यापार को अपनाओं, 
धर्म-अधर्म का निर्णायक मत बनों।
इसलिए
कल्कि अवतार, सत्यकाशी, सत्य शिक्षा, दृश्य योग, दृश्य ध्यान, 
मन (मानव संसाधन) के विश्वमानक इत्यादि नये युग के नये आविष्कारों
के व्यापार को समझो
यही धर्म का फल
और 
संसार के कल्याण का
सत्य-शिव-सुन्दर
कर्म है।




13 comments:

  1. अच्छे विचार हैं,लेकिन आप को भविष्य जीना है भूत नहीं, राम और रावन दोनों ही नीतिज्ञ थे, हमे व्यक्तियों का सम्मान करना है और उनके गुणों को ग़हण करते हुए आने वाली पीढ़ी को समर्पित करना है।

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    1. बहुत शीघ्र संमझ जाने के लिए, धन्यवाद

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  2. नमस्ते मुझे आपका संदेश बहुत अच्छा लगा मैं जरूर आपसे जुड़ना चाहूंगा

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  3. क्या मैं भी इस संघ से जुड़ सकता हूं, मैं भी इस कार्य को करने के लिए इच्छुक हूं क्योंकि विश्व को परिवर्तन कर भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना मेरा भी है।।। कृपया आप मुझसे संपर्क करें।।। +91 7004325147

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    1. ये संघ नहीं है, आपका पढ़ना ही बहुत है, संघ, पार्टी, गैंग तो लुटेरे बनाते हैं।

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  4. कुछ तो महान कार्य करोगे ये कुछ शब्द को पढ़कर समझ आ गया !! बहुत सुजदर विचार

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  5. अपने ब्लोग्रर डैशबोर्ड में जाकर east pacific 5:30+ टाइम को चुन लें क्योंकि समय गलत दिखा रहा है

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  6. बहुत ही सुंदर विचार!

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  7. Top 50 Most Useful Websites ki jaankari hindi me 2020 |

    https://www.technofact.in/2020/07/most-usefull-website-ki-jankari.html?m=1

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  8. सोगनी त्रकी करेगा जय श्री राम राम राम सा जय हिंद वंदे मातरम् भारत माता की जय हो हर हर महादेव जय महाकाल महादेव जय श्री राम राम राम सा

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