यदि कभी कोई सार्वभौमिक धर्म हो सकता है, तो वह ऐसा ही होगा, जो देश या काल से मर्यादित न हो, जो उस अनन्त भगवान के समान ही अनन्त हो, जिस भगवान के सम्बन्ध में वह उपदेश देता है, जिसकी ज्योति श्रीकृष्ण के भक्तों पर और ईसा के प्रेमियों पर, सन्तों पर और पापियों पर समान रूप से प्रकाशित होती हो, जो न तो ब्राह्मणों का हो, न बौद्धों का, न ईसाइयों का और न मुसलमानों का, वरन् इन सभी धर्मों का समष्टिस्वरूप होते हुए भी जिसमें उन्नति का अनन्त पथ खुला रहे, जो इतना व्यापक हो कि अपनी असंख्य प्रसारित बाहुओं द्वारा सृष्टि के प्रत्येक मनुष्य का प्रेमपूर्वक आलिंगन करें।... वह विश्वधर्म ऐसा होगा कि उसमें किसी के प्रति विद्वेष अथवा अत्याचार के लिए स्थान न रहेगा, वह प्रत्येक स्त्री और पुरूष के ईश्वरीय स्वरूप को स्वीकार करेगा और सम्पूर्ण बल मनुष्यमात्र को अपनी सच्ची, ईश्वरीय प्रकृति का साक्षात्कार करने के लिए सहायता देने में ही केन्द्रित रहेगा।
हमें दिखलाना है- हिन्दुओं की आध्यामिकता, बौद्धों की जीवदया, ईसाइयों की क्रियाशीलता एवं मुस्लिमों का बन्धुत्व, और ये सब अपने व्यावहारिक जीवन के माध्यम द्वारा। हमने निश्चय किया- हम एक सार्वभौम धर्म का निर्माण करेंगे।
-स्वामी विवेकानन्द
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NEW WORLD ORDER - ACTION PLAN
First and last action plan based on universal truth-theory for the rebirth of the world / new world.
नई दुनिया आदेश - कार्रवाई योजना
विश्व के पुनर्जन्म/नये विश्व के लिए सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित प्रथम एवं अन्तिम कार्य योजना
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पी.एम. बना लो या सी.एम या डी.एम,
शिक्षा पाठ्यक्रम कैसे बनाओगे?
नागरिक को पूर्ण ज्ञान कैसे दिलाओगे?
राष्ट्र को एक झण्डे की तरह,
एक राष्ट्रीय शास्त्र कैसे दिलाओगे?
ये पी.एम. सी.एम या डी.एम नहीं करते,
राष्ट्र को एक दार्शनिक कैसे दिलाओगे?
वर्तमान भारत को जगतगुरू कैसे बनाओगे?
सरकार का तो मानकीकरण(ISO-9000)करा लोगे,
नागरिक का मानक कहाँ से लाओगे?
सोये को तो जगा लोगे,
मुर्दो में प्राण कैसे डालोगे?
वोट से तो सत्ता पा लोगे,
नागरिक में राष्ट्रीय सोच कैसे उपजाओगे?
फेस बुक पर होकर भी पढ़ते नहीं सब,
भारत को महान कैसे बनाओगे?**************************************************************************
व्यक्तिगत प्रमाणित अनेक आकाशीय किताब
के बाद
पूर्णतः वैज्ञानिक क्रमिक विकास आधारित किताब
एक राष्ट्र - एक शास्त्र - श्रेष्ठ राष्ट्र
एक परिवार - एक किताब - राष्ट्रीय एकता
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“प्रस्तुत शास्त्र का मूल उद्देश्य एक पुस्तक के माध्यम से पूर्ण ज्ञान उपलब्ध कराना है जिससे उस पूर्ण ज्ञान के लिए वर्तमान और हमारे आने वाली पीढ़ी को एक आदर्श नागरिक के लिए बिखरे हुए न्यूनतम ज्ञान के संकलन करने के लिए समय-शक्ति खर्च न करना पड़े। समय के साथ बढ़ते हुए क्रमिक ज्ञान का संगठित रूप और कम में ही उन्हें अधिकतम प्राप्त हो, यही मेरे जीवन का उन्हें उपहार है। मुझे जिसके लिए कष्ट हुआ, वो किसी को ना हो इसलिए उसे हल करना मेरे जीवन का उद्देश्य बन गया”
प्रस्तुत विश्वशास्त्र द्वारा अनेक नये विषय की दिशा प्राप्त हुई है जो भारत खोज रहा था। इन दिशाओं से ही ”आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत के आधार पर एक भारत-श्रेष्ठ भारत निर्माण“, मन (मानव संसाधन) का विश्वमानक, पूर्ण मानव निर्माण की तकनीकी, हिन्दू देवी-देवता मनुष्यों के लिए मानक चरित्र, सम्पूर्ण विश्व के मानवों व संस्था के कर्म शक्ति को एकमुखी करने के लिए सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित एक प्रबन्ध और क्रियाकलाप, एक जीवन शैली इत्यादि प्राप्त होगा। भारत में इतने विद्वान हैं कि इस पर निर्णय लेने और आविष्कार की पुष्टि में अधिक समय नहीं लगेगा क्योंकि आविष्कारों की पुष्टि के लिए व्यापक आधार पहले से ही इसमें विद्यमान है।
-लव कुश सिंह “विश्वमानव”
आविष्कारक - “मन का विश्वमानक-शून्य (WS-0) श्रंृखला और पूर्ण मानव निर्माण की तकनीकी (WCM-TLM-SHYAM.C)”
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”विश्वशास्त्र“ की रचना क्यों?
”विश्वशास्त्र“ की रचना मात्र निम्न कारणो से की गई है और अगर प्रस्तुत शास्त्र, ”विश्वशास्त्र“ नहीं है तो ऐसे शास्त्र की रचना मानव बुद्धि शक्ति समाज द्वारा निम्न कारणों के लिए की जानी चाहिए।
1. प्रकृति के तीन गुण- सत्व, रज, तम से मुक्त होकर ईश्वर से साक्षात्कार करने के ”ज्ञान“ का शास्त्र ”श्रीमदभगवद्गीता या गीता या गीतोपनिषद्“ उपल्ब्ध हो चुका था परन्तु साक्षात्कार के उपरान्त कर्म करने के ज्ञान अर्थात ईश्वर के मस्तिष्क का ”कर्मज्ञान“ का शास्त्र उपलब्ध नहीं हुआ था अर्थात ईश्वर के साक्षात्कार का शास्त्र तो उपलब्ध था परन्तु ईश्वर के कर्म करने की विधि का शास्त्र उपलब्ध नहीं था। मानव को ईश्वर से ज्यादा उसके मस्तिष्क की आवश्यकता है।
2. प्रकृति की व्याख्या का ज्ञान का शास्त्र ”श्रीमदभगवद्गीता या गीता या गीतोपनिषद्“ तो उपलब्ध था परन्तु काल और ब्रह्माण्ड की व्याख्या का तन्त्र शास्त्र उपलब्ध नहीं था।
3. समाज में व्यष्टि (व्यक्तिगत प्रमाणित) धर्म शास्त्र (वेद, उपनिषद्, गीता, बाइबिल, कुरान इत्यादि) तो उपलब्ध था परन्तु समष्टि (सार्वजनिक प्रमाणित) धर्म शास्त्र उपलब्ध नहीं था जिससे मानव अपने-अपने धर्मों में रहते और दूसरे धर्म का सम्मान करते हुए विश्व-राष्ट्र धर्म को भी समझ सके तथा उसके प्रति अपने कर्तव्य को जान सके।
4. शास्त्र-साहित्य से भरे इस संसार में कोई भी एक ऐसा मानक शास्त्र उपलब्ध नहीं था जिससे पूर्ण ज्ञान - कर्मज्ञान की उपलब्धि हो सके साथ ही मानव और उसके शासन प्रणाली के सत्यीकरण के लिए अनन्त काल तक के लिए मार्गदर्शन प्राप्त हो सके अर्थात भोजन के अलावा जिस प्रकार पूरक दवा ली जाती है उसी प्रकार ज्ञान - कर्मज्ञान के लिए पूरक शास्त्र उपलब्ध नहीं था जिससे व्यक्ति की आजिविका तो उसके संसाधन के अनुसार रहे परन्तु उसका ज्ञान - कर्मज्ञान अन्य के बराबर हो जाये।
5. ईश्वर को समझने के अनेक भिन्न-भिन्न प्रकार के शास्त्र उपलब्ध थे परन्तु अवतार को समझने का शास्त्र उपलब्ध नहीं था।
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(द्वापर युग में आठवें अवतार श्रीकृष्ण द्वारा प्रारम्भ किया गया कार्य ”नवसृजन“ के
प्रथम भाग ”सार्वभौम ज्ञान“ के शास्त्र ”गीता“ के बाद कलियुग में
द्वितीय और अन्तिम भाग ”सार्वभौम कर्मज्ञान“ और ”पूर्णज्ञान का पूरक शास्त्र“)
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विश्वशास्त्र - विषय-प्रवेश
पूर्ण ज्ञान में प्रमाण पत्र
(Certificate in Complete Knowledge-CCK)
विषय- सूची
मेरे प्रेरक विश्व राष्ट्र पुत्र स्वामी विवेकानन्द
विभिन्न धर्मों के वर्तमान धर्म गुरूओं को समर्पित “विश्वशास्त्र” साहित्य और मेरी अन्तिम इच्छा
विश्व कल्कि ओलंपियाड (World Kalki Olympiad-WKO)
एकात्म ध्यान (अदृश्य) एवं एकात्म समर्पण (दृश्य)
मेरा प्रकाट्य
विश्व के सभी देशों व नागरिकों को सार्वजनिक सूचना
सार्वजनिक घोषणा
भारत सरकार के लिए सार्वजनिक घोषणा
“विश्वशास्त्र” : विषय प्रवेश की भूमिका
भाग-1: सत्यीकरण का आधार
01. प्रारम्भ के पहले दिव्य-दृष्टि
02. व्यवस्था के परिवर्तन या सत्यीकरण का पहला प्रारूप और उसकी कार्य विधि
03. क्या नई घटना घटित हुई थी 21 दिसम्बर, 2012 को?
04. एक ही मानव शरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विषय क्षेत्र से मुख्य नाम
05. विश्व सरकार के लिए पुनः भारत द्वारा शून्य आधारित अन्तिम आविष्कार
06. पुस्तक का मुख-पृष्ठ श्याम (काला)-श्वेत (सफेद) क्यों?
07. जैसी तुम्हारी इच्छा वैसा करो
08. शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी
09. शिक्षण विधि और आशीर्वाद
10. मानव और पूर्ण मानव
11. जीवन जीने की संचालन विधि
12. इच्छा और आकड़ा
13. ईश्वर, अवतार और मानव की शक्ति सीमा
भाग-2: सत्यीकरण का शास्त्र
01. “विश्वशास्त्र” : भूमिका
02. “विश्वशास्त्र” : शास्त्र-साहित्य समीक्षा
03. “विश्वशास्त्र” संगठन
04. “विश्वशास्त्र” की स्थापना
05. “विश्वशास्त्र” -कुछ तथ्य
अ. रचना क्यों?
ब. आविष्कार किस प्रकार हुआ?
स. उपयोगिता क्या है?
द. बाद का मनुष्य, समाज और शासन
य. कितना छोटा और कितना बड़ा?
र. एक ही शास्त्र-साहित्य के विभिन्न नाम
ल. विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
व. सम्बन्धित स्थान ?
स. उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
06. विश्व या जगत्
07. ब्रह्माण्ड या व्यापार केन्द्र: एक अनन्त व्यापार क्षेत्र
08. ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति
09. ब्लैक होल और आत्मा
10. सौर मण्डल
11. पृथ्वी
12. युगानुसार धर्म, प्रवर्तक और धर्मशास्त्र
13. धर्मशास्त्र-व्यष्टि और समष्टि
14. भारतीय शास्त्रों की एक वाक्य में शिक्षा
15. विश्वात्मा/विश्वमन का विखण्डन व संलयन
अ. सांख्य दर्शन
ब. धर्म विज्ञान (स्वामी विवेकानन्द)
स. आत्मा और विश्वात्मा
1.रज मन
2.तम मन
3.सत्व मन क. निवृत्ति मार्गी ख. प्रवृत्ति मार्गी
4. अवतारी मन
द. विकासवाद
य. अवतारवाद
16. “सम्पूर्ण मानक” का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्य
17. ईश्वर या काल चक्र
18. पुर्नजन्म चक्र मार्ग के
01. सत्व मार्ग से-श्रीकृष्ण और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
02. रज मार्ग से-स्वामी विवेकानन्द और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
03. तम मार्ग से-रावण और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
19. काल चक्र मार्ग के
01. प्रथम-अदृश्य काल में विश्वात्मा का प्रथम जन्म-योगेश्वर श्रीकृष्ण
02. द्वितीय-दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का पहला भाग-स्वामी विवेकानन्द
03. द्वितीय-दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का अन्तिम भाग-भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
20.विश्व का सर्वोच्च आविष्कार-मन का विश्वमानक तथा पूर्णमानव निर्माण की तकनीकी
01. आविष्कार क्यों हुआ?
02. आविष्कारक कौन है?
क. भौतिक रूप से
ख. आर्थिक रूप से
ग. मानसिक रूप से
घ. नाम रूप से
च. समय रूप से
03. आविष्कार विषय क्या है?
04. आविष्कार की उपयोगिता क्या है?
05. आविष्कार किस प्रकार हुआ?
21.युग परिवर्तन और परिवर्तनकर्ता का शास्त्रीय आधार
01.सनातन / हिन्दू शास्त्र व मान्यता के अनुसार
अ. वेद व पुराण के अनुसार
ब. महर्षि दयानन्द के अनुसार
स. पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार
द. नाड़ी ताड़ पत्ते (Nadi Palm Leaves) के अनुसार
य. अन्य के अनुसार
02.बौद्ध धर्म के अनुसार
03.यहूदी शास्त्र के अनुसार
04.ईसाई शास्त्र के अनुसार
05.इस्लाम शास्त्र के अनुसार
06.सिक्ख धर्म के अनुसार
07.मायां कैलण्डर के अनुसार
22.युग परिवर्तन और परिवर्तनकर्ता का भविष्यवाणियों का आधार
01.प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के अनुसार
02.ज्योतिषि श्री बेजन दारूवाला के अनुसार
03.पुस्तक-”अमर भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
04.पुस्तक-”विश्व की आश्चर्यजनक भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
05.पुस्तक-”दुर्लभ भविष्यवाणियाँ“ के अनुसार
06.अन्य भविष्यवक्ताओं के अनुसार
23.युग परिवर्तन और परिवर्तनकर्ता का शास्त्र व भविष्यवाणियों के आँकड़ों पर व्याख्या
24.सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार काल, युग बोध एवं अवतार
25.कल्कि अवतार-महाअवतार क्यों?
26.काल और युग परिवर्तक कल्कि महाअवतार एवं अन्य स्वघोषित कल्कि अवतार
27.कल्कि अवतार और लव कुश सिंह “विश्वमानव”
28.शास्त्रार्थ, शास्त्र पर होता है, शास्त्राकार से और पर नहीं
29.अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार का काशी-सत्यकाशी क्षेत्र से विश्व शान्ति का अन्तिम सत्य-सन्देश
30.अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” का मानवों के नाम खुला चुनौती पत्र
विश्वशास्त्र - अध्याय - एक: ईश्वर
ईश्वर शास्त्र व व्यापार ज्ञान में प्रमाण पत्र
(Certificate in Godics & Business Knowledge-CGBK)
विषय- सूची
अध्याय एक की भूमिका
भाग-1: ईश्वर, अवतार और पुनर्जन्म
01. ईश्वर, ईश्वर का संक्षिप्त इतिहास और ईश्वर के अवतार
02. अवतार और पुनर्जन्म
03. ब्रह्मा के अवतार
04. विष्णु के अवतार
05. शंकर के अवतार
भाग-2: विष्णु के प्रथम नौ अवतार
पहलायुग : सत्ययुग
अ. व्यक्तिगत प्रमाणित पूर्ण प्रत्यक्ष अवतार
01. प्रथम अवतार : मत्स्य अवतार
02. द्वितीय अवतार : कूर्म / कच्छपावतार
03. तृतीय अवतार : बाराह अवतार
04. चतुर्थ अवतार : नृसिंह अवतार
05. पांचवाँ अवतार : वामन अवतार
ब. सार्वजनिक प्रमाणित अंश प्रत्यक्ष अवतार
06. छठा अवतार : परशुराम अवतार
दूसरायुग : त्रेतायुग
स. सार्वजनिक प्रमाणित पूर्ण प्रत्यक्ष अवतार
07. सातवाँ अवतार : श्रीराम अवतार-रामायण (मानक व्यक्ति चरित्र)
तीसरायुग : द्वापरयुग
द. व्यक्तिगत प्रमाणित पूर्ण प्रेरक अवतार
08. आठवाँ अवतार : श्रीकृष्ण अवतार-महाभारत (मानक सामाजिक व्यक्ति चरित्र)
चौथायुग : कलियुग
य. सार्वजनिक प्रमाणित अंश प्रेरक अवतार
09. नौवाँ अवतार : बुद्ध अवतार
भाग-3: विष्णु के दसवें और अन्तिम अवतार के समय विश्व, भारत देश, अन्तर्राष्ट्रीय, राज्य अर्थात् शासन, भारतीय समाज, भारतीय परिवार, भारतीय व्यक्ति स्तर पर निम्न विषयों की स्थिति
1. राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर शासन अर्थात् राज्य की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर राज्य अर्थात् शासन की स्थिति
2. विज्ञान की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर विज्ञान की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर विज्ञान की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर विज्ञान की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर विज्ञान की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर विज्ञान की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर विज्ञान की स्थिति
3. धर्म की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर धर्म की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर धर्म की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर धर्म की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर धर्म की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर धर्म की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर धर्म की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर धर्म की स्थिति
4. व्यापार की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर व्यापार की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर व्यापार की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर व्यापार की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यापार की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यापार की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यापार की स्थिति
5. समाज की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर समाज की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर समाज की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर समाज की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर समाज की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर समाज की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर समाज की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर समाज की स्थिति
6. परिवार की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर परिवार की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर परिवार की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर परिवार की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर परिवार की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर परिवार की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर परिवार की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर परिवार की स्थिति
7. व्यक्ति की स्थिति
अ. विश्व स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
ब. भारत देश स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
भाग-4: विष्णु के दसवें और अन्तिम अवतार के समय स्थिति के विकास की स्थिति
भाग-5: विष्णु के दसवें और अन्तिम अवतार के समय विश्व, भारत देश, अन्तर्राष्ट्रीय, राज्य अर्थात् शासन, भारतीय समाज, भारतीय परिवार, भारतीय व्यक्ति स्तर पर निम्न विषयों का परिणाम
01. राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर शासन अर्थात् राज्य का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर राज्य अर्थात् शासन का परिणाम
02. विज्ञान का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर विज्ञान का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर विज्ञान का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर विज्ञान का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर विज्ञान का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर विज्ञान का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर विज्ञान का परिणाम
03. धर्म का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर धर्म का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर धर्म का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर धर्म का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर धर्म का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर धर्म का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर धर्म का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर धर्म का परिणाम
04. व्यापार का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर व्यापार का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर व्यापार का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर व्यापार का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यापार का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यापार का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यापार का परिणाम
05. समाज का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर समाज का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर समाज का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर समाज का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर समाज का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर समाज का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर समाज का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर समाज का परिणाम
06. परिवार का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर परिवार का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर परिवार का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर परिवार का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर परिवार का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर परिवार का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर परिवार का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर परिवार का परिणाम
07. व्यक्ति का परिणाम
अ. विश्व स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
ब. भारत देश स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
स. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
द. राज्य अर्थात् शासन स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
08. स्थिति के विकास का परिणाम
09. विज्ञान का राज्य और धर्म पर प्रभाव
10. ब्रह्माण्डीय स्थिति और परिणाम
11. विश्व के समक्ष भारत की स्थिति और परिणाम
12. दृश्य पदार्थ विज्ञान और अदृश्य आध्यात्म विज्ञान-स्थिति एवं परिणाम
13. सार्वभौम एकीकरण-स्थिति एवं परिणाम
विश्वशास्त्र - अध्याय - दो: जीवन परिचय
अवतार ज्ञान में प्रमाण पत्र
(Certificate in Avatar Knowledge-CAK)
विषय- सूची
अध्याय दो की भूमिका
भाग-1: विष्णु के दसवें और अन्तिम अवतार
01. भविष्य के लिए प्रक्षेपित कल्कि अवतार की कथा
02. कल्कि पुराण
03. कल्कि अवतार महाअवतार क्यों?
04. काल और युग परिवर्तक कल्कि महाअवतार एवं अन्य स्वघोषित कल्कि अवतार
05. कल्कि अवतार एवं माँ वैष्णों देवी से सम्बन्ध
पाँचवाँयुग : स्वर्णयुग/सत्ययुग
र. सार्वजनिक प्रमाणित पूर्ण प्रेरक अवतार
10. दसवाँ और अन्तिम कल्कि अवतार-लव कुश सिंह “विश्वमानव”
- विश्वभारत (मानक वैश्विक व्यक्ति चरित्र)
भाग-2: मानव सभ्यता
01. मानव सभ्यता का विकास और जाति की उत्पत्ति
02. वंश
अ. पौराणिक वंश
1. मनुर्भरत वंश की प्रियव्रत शाखा
2. मनुर्भरत वंश की उत्तानपाद शाखा
ब. ऐतिहासिक वंश
1. ब्रह्म वंश
2. सूर्य वंश
3. चन्द्र वंश
स. भविष्य के वंश
03. गोत्र
04. कूर्मवंशी क्षत्रिय रियासतें
05. कूर्मवंशी क्षत्रिय वंश के महान विभूतियाँ, संत, अमर शहीद
भाग-3: काशी
उप भाग-1 : काशी (सत्व)
01.शिव
02.तीसरी आँख (Third Eye)
03.योगेश्वर (ज्ञान का विश्वरूप) और भोगेश्वर (कर्मज्ञान का विश्वरूप)
04.ज्योतिर्लिंग : अर्थ और द्वादस (12) ज्योतिर्लिंग
05.ज्योतिर्लिंगों का स्थान
06.काशी
07.मोक्षदायिनी काशी और जीवनदायिनी सत्यकाशी : अर्थ व प्रतीक चिन्ह
उप भाग-2 : मोक्षदायिनी काशी (रज) (www.kashikatha.com)
01. विश्वेश्वर (योगेश्वरनाथ) : प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों?
02. मोक्षदायिनी काशी : पंचम, प्रथम एवं सप्तम काशी
03. मोक्षदायिनी काशी : वाराणसी
काशी विश्वनाथ मन्दिर
रामनगर
काशी (वाराणसी)-घटना क्रम की दृष्टि में
काशी (वाराणसी) में श्रीकृष्ण
काशी (वाराणसी) में भगवान बुद्ध
काशी (वाराणसी) में स्वामी विवेकानन्द
काशी (वाराणसी) में श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
काशी चौरासी कोस यात्रा
04. सोनभद्र
05. शिवद्वार
06. विन्ध्य पर्वत, क्षेत्र और धाम : विन्ध्यक्षेत्र से तय होता है भारत का मानक समय
उप भाग-3: जीवनदायिनी सत्यकाशी (तम)
01. भोगेश्वरनाथ : 13वाँ और अन्तिम ज्योतिर्लिंग क्यों?
02. जीवनदायिनी सत्यकाशी : पंचम, अन्तिम और सप्तम काशी
03. जीवनदायिनी सत्यकाशी : काशी (वाराणसी)-सोनभद्र-शिवद्वार-विन्ध्याचल के बीच का क्षेत्र
मीरजापुर
चुनार एवं चुनार क्षेत्र
सत्यकाशी में श्रीराम
सत्यकाशी में श्रीकृष्ण
सत्यकाशी में भगवान बुद्ध
सत्यकाशी में स्वामी विवेकानन्द
सत्यकाशी में श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
जरगो नदी और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
व्यक्ति, एक विचार और अरबों रूपये का व्यापार
सत्यकाशी महायोजना
सत्यकाशी महायोजना-प्रोजेक्ट को पूर्ण करने की योजना
पाँचवें युग-स्वर्णयुग के तीर्थ सत्यकाशी क्षेत्र में प्रवेश का आमंत्रण
भाग-4: श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”: पृष्ठभूमि एवं जन्म
01. पृष्ठभूमि, जन्म एवं निवास स्थल
02. जन्म कुण्डली
03. हथेली व पैर के तलवे का चित्र
04. शिक्षा, भ्रमण व देशाटन, मित्र व सहयोगी
05. जीवन यात्रा के कुछ रोचक चरित्र व घटनायें
भाग-5: सत्यकाशी : दृश्य काल के प्रथम और अन्तिम युग का तीर्थ
01. क्षेत्र वासीयों गर्व से कहो-“हम सत्यकाशी निवासी हैं”
02. सत्यकाशी क्षेत्र से व्यक्त हुये मुख्य विषय
03. व्यक्ति, एक विचार और अरबों रूपये का व्यापार
04. सत्यकाशी महायोजना
01. चार शंकराचार्य पीठ के उपरान्त 5वाँ और अन्तिम पीठ “सत्यकाशी पीठ”
02. “सत्यकाशी महोत्सव” व “सत्यकाशी गंगा महोत्सव” आयोजन
03. सार्वभौम देवी माँ कल्कि देवी मन्दिर-माँ वैष्णों देवी की साकार रूप
04. भोगेश्वर नाथ-13वाँ और अन्तिम ज्योतिर्लिंग
05. सत्यकाशी पंचदर्शन
06. ज्ञान आधारित मनु-मनवन्तर मन्दिर
07. ज्ञान आधारित विश्वात्मा मन्दिर
08. विश्वधर्म मन्दिर-धर्म के व्यावहारिक अनुभव का मन्दिर
09. नाग मन्दिर
10. विश्वशास्त्र मन्दिर (Vishwshastra Temple)
11. एक दिव्य नगर-सत्यकाशी नगर
12. होटल शिवलिंगम्-शिवत्व का एहसास
13. इन्द्रलोक-ओपेन एयर थियेटर
14. हस्तिनापुर-महाभारत का लाइट एण्ड साउण्ड प्रोग्राम
15. सत्य-धर्म-ज्ञान केन्द्र : ताश्रीरामण्डल की भाँति शो द्वारा कम समय में पूर्ण ज्ञान
16. सत्यकाशी आध्यात्म पार्क
17. वंश नगर-मनु से मानव तक के वंश पर आधारित नगर
18. 8वें सावर्णि मनु-सम्पूर्ण एकता की मूर्ति (Statue of Complete Unity)
19. विस्मृत भारत रत्न स्मारक (Forgotten Bharat Ratna Memorial)
20. विश्वधर्म उपासना स्थल-उपासना और उपासना स्थल के विश्वमानक (WS-00000) पर आधारित
21. सत्यकाशी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विश्वविद्यालय
(Satyakashi Universal Integration Science University-SUISU)
05. पाँचवें युग-स्वर्णयुग के तीर्थ सत्यकाशी क्षेत्र में प्रवेश का आमंत्रण
01. सत्यकाशी क्षेत्र निवासीयों को आमंत्रण
02. काशी (वाराणसी) को आमंत्रण
03. धार्मिक संगठन/संस्था को आमंत्रण
04. रियल इस्टेट/इन्फ्रास्ट्रक्चर व्यवसायिक कम्पनी को आमंत्रण
05. रियल इस्टेट एजेन्ट को आमंत्रण
06. सत्यकाशी महायोजना-प्रोजेक्ट को पूर्ण करने की योजना
07. धर्म स्थापनार्थ दुष्ट वध और साधुजन का कल्याण कैसे और किसका?
08. अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार का काशी-सत्यकाशी क्षेत्र से विश्व शान्ति द्वारा अन्तिम सत्य-सन्देश
विश्वशास्त्र - अध्याय - तीन: ज्ञान परिचय
गुरू ज्ञान में प्रमाण पत्र
(Certificate in Guru Knowledge-CGK)
विषय- सूची
अध्याय तीन की भूमिका
भाग -1: धर्म
01. धर्म का अर्थ, धर्म और रिलिजन
02. धर्म की परिभाषा, तत्व चिंतन और आवश्यकता
03. धर्म एवं दर्शन, धर्मदर्शन, विज्ञान, नैतिकता
04. धर्म में वस्तु तत्व एवं प्रतीक
05. धर्मसमभाव की अवधारणा और विश्वधर्म का आधार
भाग -2: शास्त्र एवं पुराण रहस्य
01. शास्त्र, महर्षि व्यास और उनका शास्त्र लेखन कला
02. पुराणः धर्म, धर्मनिरपेक्ष एवं यथार्थ अनुभव की अन्तिम सत्य दृष्टि
क. पुराणों की सत्य दृष्टि
ख. ब्रह्मा अर्थात् एकात्मज्ञान परिवार
ग. विष्णु अर्थात् एकात्म ज्ञान सहित एकात्म कर्म परिवार
घ. शिव-शंकर अर्थात् एकात्म ज्ञान और एकात्म कर्म सहित एकात्म ध्यान परिवार
च. ब्रह्माण्ड परिवार
03. श्रीमदभवद्गीता की शक्ति सीमा तथा कर्मवेद : पंचमवेद समाहित विश्वशास्त्र के प्रारम्भ का आधार
04. कालभैरव कथा : यथार्थ दृष्टि
05. मानक चरित्र
क. मानक और मानक चरित्र
ख. शिव और जीव
ग. मानव और पूर्ण मानव
घ. पौराणिक देवी-देवता : मनुष्य समाज के विभिन्न पदों के मानक चरित्र
च. भारतीय शास्त्रों की एक वाक्य में शिक्षा
भाग -3 : विश्व-नागरिक धर्म का धर्मयुक्त धर्मशास्त्र
कर्मवेद : प्रथम, अन्तिम तथा पंचम वेदीय श्रृंखला
भाग -4 : विश्व-राज्य धर्म का धर्मनिरपेक्ष धर्मशास्त्र
विश्वमानक शून्य-मन की गुणवत्ता का विश्वमानक श्रृंखला
उप भाग-1: मानक एवं मानकीकरण संगठन परिचय
01. मानक एवं मानकीकरण संगठन
02. अन्तर्राष्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो
03. अन्तर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO)
04. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
05. मानक के सम्बन्ध में विभिन्न वक्तव्य
01. व्यक्ति भी हो सकते हैं आई. एस. ओ. मार्का
02. पं0 जवाहर लाल नेहरु
03. श्री मती इन्दिरा गाँधी
04. श्री राजीव गाँधी
05. डब्ल्यू0.टी.कैबेनो
06. श्री कोफी अन्नान
07. लव कुश सिंह “विश्वमानव”
उप भाग-2 : गणराज्य व संघ परिचय
01. राज्य व गणराज्य : उत्पत्ति और अर्थ
02. भारत गणराज्य : संक्षिप्त शासकीय परिचय
03. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) : परिचय, उद्देश्य एवं कार्यप्रणाली
01. वीटो पावर - संयुक्त राज्य अमेरिका (US)
02. वीटो पावर - फ्रांस
03. वीटो पावर - रूस
04. वीटो पावर - चीन
05. वीटो पावर - ब्रिटेन (UK)
04. गणराज्य : अन्तिम विश्व शासन प्रणाली
05. ग्राम सरकार व विश्व सरकार : एक प्रारूप
उप भाग-3 : मन की गुणवत्ता का विश्वमानक परिचय
01. आविष्कार विषय और उसकी उपयोगिता
02. विश्वकल्याणार्थ आविष्कार की स्थापना कब और कैसे?
03. वैश्विक मानव निर्माण तकनीकी- WCM-TLM-SHYAM.C प्रणाली
तकनीकी का नाम SHYAM.C क्यों?
S - SATYA ( सत्य )
H- HEART ( हृदय )
Y- YOG ( योग )
A - ASHRAM ( आश्रम )
M - MEDITATION ( ध्यान )
. - DOT ( बिन्दु या डाट या दशमलव या पूर्णविराम )
C - CONCIOUSNESS ( चेतना )
04. आदर्श वैश्विक मानव/जन/गण/लोक/स्व/मैं/आत्मा/तन्त्र का सत्य रूप व विश्व मानक
05. विश्व मानक-शून्य (WS-0) : मन की गुणवत्ता का विश्व मानक श्रृखंला
01. डब्ल्यू.एस. (WS)-0 : विचार एवं साहित्य का विश्वमानक
02. डब्ल्यू.एस. (WS)-00 : विषय एवं विशेषज्ञों की परिभाषा का विश्वमानक
03. डब्ल्यू.एस. (WS)-000 : ब्रह्माण्ड (सूक्ष्म एवं स्थूल) के प्रबन्ध और क्रियाकलाप का विश्वमानक
ईश्वर नाम
अदृश्य एवं दृश्य ईश्वर नाम
अदृश्य ईश्वर नाम-”ऊँ“ शब्द का दर्शन
दृश्य ईश्वर नाम- TRADE CENTRE शब्द का दर्शन
ट्रेड सेन्टर के सात चक्र
ट्रेड सेन्टर के सात चक्र की व्याख्या
दृश्य सात चक्र के आधार पर संचालक के प्रकार
दृश्य योग और दृश्य ध्यान
शासन प्रणाली का विश्वमानक
संचालक का विश्वमानक
गणराज्य या लोकतन्त्र के स्वरूप का विश्वमानक
संविधान के स्वरूप का विश्वमानक
शिक्षा व शिक्षा पाठ्यक्रम के स्वरूप का विश्वमानक
विपणन प्रणाली का विश्वमानक
04. डब्ल्यू.एस. (WS)-0000 : मानव (सूक्ष्म तथा स्थूल) के प्रबन्ध और क्रियाकलाप का विश्वमानक
05. डब्ल्यू.एस. (WS)-00000: उपासना और उपासना स्थल का विश्वमानक
उप भाग-4 : विश्व शान्ति
01. विश्व शान्ति
02. विश्व धर्म संसद
01. विश्व धर्म संसद-सन् 1893 ई0 परिचय
स्वामी विवेकानन्द के व्याख्यान,
01. धर्म महासभा स्वागत भाषण का उत्तर, दिनांक 11 सितम्बर, 1893
02. हमारे मतभेद का कारण, 15 सितम्बर, 1893
03. हिन्दू धर्म, 19 सितम्बर, 1893
04. धर्म भारत की प्रधान आवश्यकता नहीं, 20 सितम्बर, 1893
05. बौद्ध धर्म, 26 सितम्बर, 1893
06. धन्यवाद भाषण, 27 सितम्बर, 1893
02. विश्व धर्म संसद-सन् 1993 ई0 परिचय
03. विश्व धर्म संसद-सन् 1999 ई0 परिचय
04. विश्व धर्म संसद-सन् 2004 ई0 परिचय
05. विश्व धर्म संसद-सन् 2009 ई0 परिचय
03. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित सहस्त्राब्दि सम्मेलन-2000 ई0
01. राष्ट्राध्यक्षों का सम्मेलन
02. धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेताओं का सम्मेलन
04. विश्व शान्ति के लिए गठित ट्रस्टों की स्पष्ट नीति
05. श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ द्वारा विश्व शान्ति का अन्तिम सत्य-सन्देश
उप भाग-5 : ईश्वर का मस्तिष्क, मानव का मस्तिष्क और कम्प्यूटर
भाग -5 : विश्व शान्ति का अन्तिम मार्ग
01. एकात्मकर्मवाद और विश्व का भविष्य
02. विश्व का मूल मन्त्र-”जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान-जय ज्ञान-जय कर्मज्ञान“
03. विश्वमानक-शून्य श्रृखंला (निर्माण का आध्यात्मिक न्यूट्रान बम)
04. भारत का संकट, हल, विश्वनेतृत्व की अहिंसक स्पष्ट दृश्य नीति, सर्वोच्च संकट और विवशता
05. गणराज्य व संघ को मार्गदर्शन
01. गणराज्यों के संघ-भारत को सत्य और अन्तिम मार्गदर्शन
02. राष्ट्रों के संघ-संयुक्त राष्ट्र संघ को सत्य और अन्तिम मार्गदर्शन
03. अवतारी संविधान से मिलकर भारतीय संविधान बनायेगा विश्व सरकार का संविधान
04. ”भारत“ के विश्वरूप का नाम है-”इण्डिया (INDIA)“
05. विश्व सरकार के लिए पुन: भारत द्वारा शून्य आधारित अन्तिम आविष्कार
विश्वशास्त्र - अध्याय - चार: कर्म परिचय
(सार्वजनिक प्रमाणित दृश्य महायज्ञ)
संस्थागत धर्म में डिप्लोमा
(Diploma in Institutional Religion-DIR)
विषय- सूची
”विश्वशास्त्र“ - अध्याय चार की भूमिका
भाग - 01. व्यापार
उप भाग-01
01. व्यापार का अर्थ और उसका मूल आधार
02. सफलता का पैमाना
03. सफलता का नाम विशेषज्ञता नहीं
04. लांचिग (Launching)], प्री-लांचिग (Pre-Launching) और प्री-आर्गनाइजेशन (Pre-Organisation)
05. व्यवसाय का लेखांकन (एकाउण्ट बुक किपिंग)-दोहरी प्रविष्टि प्रणाली
उप भाग-02
01. व्यवसाय की विशेषताएँ, उद्देश्य एवं उत्तरदायित्व
02. व्यवसाय आरंभ करने का विचार और योजना बनाना
03. व्यवसाय संगठनों के स्वरूप
अ. पूर्ण स्वामित्व प्रतिष्ठान
ब. साझेदारी प्रतिष्ठान
स. सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी)
द. निजी (प्राइवेट) लिमिटेड कंपनी
य. सार्वजनिक (पब्लिक) लिमिटेड कंपनी
04. व्यवसाय संगठन-सामान्य दिशानिर्देश एवं प्रबंधन
05. सामाजिक उत्तरदायित्व संगठन-समिति एवं ट्रस्ट
उप भाग-03. पारिश्रमिक
01. गुलाम का अर्थ व दास प्रथा (पाश्चात्य)
02. वैश्विक बौद्धिक विकास के साथ बदला गुलामी का स्वरूप
03. पारिश्रमिक का इतिहास और वेतन (सैलरी), मजदूरी, भत्ते और मानदेय, प्रोत्साहन, सौदागर, अभिकर्ता, विशेषाधिकार, दलाली का अर्थ
04. रायल्टी-अर्थ और प्रकार, ईश्वर, पुनर्जन्म और रायल्टी
05. क्या आपकों वस्तु खरीदने पर कम्पनी रायल्टी देती है जबकि कम्पनी आपके कारण हैं?
उप भाग-04. सर्वेक्षण (Survey)
01. आकड़ा (Data)
02. सर्वेक्षण (Survey) -अर्थ एवं प्रकार
03. आधुनिक जीवन में सर्वेक्षण का प्रयोग व उपयोगिता
04. भारत में अध्ययन/सर्वेक्षण/प्रतिवेदन
05. जनमत से अलग सर्वेक्षण के आधार
उप भाग-05. विज्ञापन Advertisement)
01. विज्ञापन
02. विज्ञापन रचना-प्रक्रिया
03. दूरदर्शन (टी.वी)-विज्ञापन
04. ऑनलाइन विज्ञापन
05. विज्ञापन और व्यापार
भाग - 02. उत्पाद
उप भाग-01. उत्पाद-अर्थ एवं प्रकार
उप भाग-02. ईश्वर निर्मित उत्पाद
01. खनिज आधारित ईश्वर निर्मित उत्पाद
02. वन आधारित ईश्वर निर्मित उत्पाद
03. जीव आधारित ईश्वर निर्मित उत्पाद
04. कृषि आधारित ईश्वर निर्मित उत्पाद
05. वायुमण्डल आधारित ईश्वर निर्मित उत्पाद
उप भाग-03. मानव निर्मित उत्पाद
01. शरीर आधारित मानव निर्मित उत्पाद
02. धन आधारित मानव निर्मित उत्पाद
1. बैंकिग उत्पाद और उसका व्यापारिक गणित
2. शेयर, डिबेन्चर तथा म्यूचुल फण्ड और उसका व्यापारिक गणित
3. वायदा बाजार और उसका व्यापारिक गणित
4. सट्टा, पेपर एवं आन लाइन लाटरी और उसका व्यापारिक गणित
5. बाजी और उसका व्यापारिक गणित
03. मन आधारित मानव निर्मित उत्पाद
04. मनोरंजन आधारित मानव निर्मित उत्पाद
05. मशीन आधारित मानव निर्मित उत्पाद
उप भाग-04. एन्टीक एवं सुपर एन्टीक उत्पाद-अर्थ, प्रकार एवं पहचान
उप भाग-05. विचार, रचनात्मक विचार और लाभ की शक्ति
भाग - 03. बाजार एवं विपणन प्रणाली
(Market & Marketing System)
01. पारम्परिक बाजार - अर्थ एवं प्रकार
02. आभासी बाजार - अर्थ एवं प्रकार
03. पारम्परिक विपणन प्रणाली (Traditional Marketing System)
04. प्रत्यक्ष विपणन प्रणाली (Direct Marketing System)
05. मल्टी लेवेल मार्केटिंग (MLM) - एक परिचय, संचालक कौन? और आधार
भाग - 04. राष्ट्र निर्माण का हमारा व्यवसाय-एक मानक व्यवसाय
उप भाग-01. कल्कि महाअवतार से उत्पन्न नयी प्रणाली और व्यापार
अ. ज्ञान से जुड़ा
01.भारतीय आध्यात्म एवं दर्शन आधारित स्वदेशी विपणन प्रणाली : 3-एफ (3-F : Fuel-Fire-Fuel)
02. कार्पोरेट विश्वमानक मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण
(Corporate World Standard Human Resources Development Training)
03. विश्व राजनीति पार्टी संघ (World Political Party Organisation - WPPO)
04. नयी पीढ़ी के लिए नया विषय-ईश्वर शास्त्र, मानक विज्ञान, एकात्म विज्ञान
05. विश्वशास्त्र पर आधारित आॅडियो-विडियो
06. मनोरंजन
01. फिल्म
02. टी0 वी सिरियल
03. गीत
ब. जीवन से जुड़ा-रियल स्टेट
01. सत्यकाशी महायोजना
02. डिजिटल प्रापर्टी और एजेन्ट नेटवर्क (Digital Property & Agent Network)
स. कर्म से जुड़ा
01. उत्पाद ब्राण्ड
01. ब्राण्ड
02. कैलेण्डर
02. शिक्षा ब्राण्ड-सत्य मानक शिक्षा
03. राष्ट्र निर्माण के पुस्तक
उप भाग-02. राष्ट्र निर्माण का हमारा व्यवसाय (प्रत्यक्ष)
01.सत्य मानक शिक्षा का व्यापार-पुनर्निर्माण
(RENEW - RealEducation National Express Way)
01. शिक्षा से सम्बन्धित विचार
02. शिक्षा, शिक्षा माध्यम, शिक्षक/गुरू, विद्यार्थी/छात्र और शिक्षा पाठ्यक्रम
03. ”व्यापार“ और ”शिक्षा का व्यापार“
04. ”सत्य मानक शिक्षा का व्यापार“-एक अन्तहीन व्यापार
05. पुनर्निर्माण-राष्ट्र निर्माण का व्यापार
06. पुनर्निर्माण क्यों?
07. प्रवेश पंजीकरण की योग्यता (Eligibility)
08. छात्रवृत्ति (स्कालरशिप), सहायता और रायल्टी देने का हमारा आधार
09. पाठ्यक्रम शुल्क (Course Fees)
10. छात्रवृत्ति और रायल्टी (Scholarship & Royalty)
11. ये पाठ्यक्रम क्या है?
अ-सामान्यीकरण (Generalization) शिक्षा
01. सत्य शिक्षा (REAL EDUCATION)
02. सत्य पेशा (REAL PROFESSION)
03. सत्य पुस्तक (REAL BOOK)
04. सत्य स्थिति (REAL STATUS)
05. सत्य एस्टेट एजेन्ट (REAL ESTATE AGENT)
06. सत्य किसान (REAL KISAN)
ब-विशेषीकरण (Specialization) शिक्षा
01. सत्य कौशल (REAL SKILL)
02. डिजीटल कोचिंग (DIGITAL COACHING)
स-सत्य नेटवर्क (REAL NETWORK)
01. डिजिटल ग्राम नेटवर्क (Digital Village Network)
02. डिजिटल नगर वार्ड नेटवर्क (Digital City Ward Network)
03. डिजिटल एन.जी.ओ/ट्रस्ट नेटवर्क (Digital NGO/Trust Network)
04. डिजिटल विश्वमानक मानव नेटवर्क (Digital World Standard Human Network)
05. डिजिटल नेतृत्व नेटवर्क (Digital Leader Network)
06. डिजिटल जर्नलिस्ट नेटवर्क (Digital Journalist Network)
07. डिजिटल शिक्षक नेटवर्क (Digital Teacher Network)
08. डिजिटल शैक्षिक संस्थान नेटवर्क (Digital Educational Institute Network)
09. डिजिटल लेखक-ग्रन्थकार-रचयिता नेटवर्क (Digital Author Network)
10. डिजिटल गायक नेटवर्क (Digital Singer Network)
11. डिजिटल खिलाड़ी नेटवर्क (Digital Sports Man Network)
12. डिजिटल पुस्तक विक्रेता नेटवर्क (Digital Book Saler Network)
13. डिजिटल होटल और आहार गृह नेटवर्क (Digital Hotel & Restaurant Network)
12. पुनर्निर्माण-3-एफ विपणन प्रणाली से युक्त
13. हमारा उद्देश्य क्या है?
14. मल्टी लेवेल मार्केटिंग (MLM) का आधार
15. पुनर्निर्माण-मल्टी लेवेल मार्केटिंग (MLM) नहीं हैं।
16. आपकी समस्या और हमारा उपाय
17. पुनर्निर्माण-छात्रवृत्ति, सहायता व रायल्टी वितरण तिथि
18. पुनर्निर्माण-प्रणाली की विशेषताएँ
19. पुनर्निर्माण के प्रेरक (Catalyst)
02. डिजिटल प्रापर्टी और एजेन्ट नेटवर्क (Digital Property & Agent Network)
03. राष्ट्र निर्माण के पुस्तक
04. पेय जल
05. कैलेण्डर
उप भाग-03. राष्ट्र निर्माण का हमारा व्यवसाय (अप्रत्यक्ष)
01. कार्पोरेट विश्वमानक मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण
(Corporate World Standard Human ResourcesDevelopment Training)
02. सत्यकाशी महायोजना
03. फिल्म एवं टी0 वी सिरियल-”महाभारत“ के बाद ”विश्वभारत“
04. गीत
05. राष्ट्र निर्माण के लिए शोध व प्रणाली विकास
1. नयी पीढ़ी के लिए नया विषय-ईश्वर शास्त्र, मानक विज्ञान, एकात्म विज्ञान
2. विश्व राजनीतिक पार्टी संघ (World Political Party Organisation - WPPO)
उप भाग-04. राष्ट्र निर्माण का हमारा सामाजिक एवं वैश्विक उत्तरदायित्व
01. विश्व शान्ति के लिए गठित ट्रस्टों की स्पष्ट नीति
02. मेरे विश्व शान्ति के कार्य हेतु बनाये गये सभी ट्रस्ट मानवता के लिए सत्य-कार्य एवं दान के लिए सुयोग्य पात्र
03. राष्ट्र निर्माण का हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व (अप्रत्यक्ष)
01. साधु एवं सन्यासी के लिए-सत्ययोगानन्द मठ (ट्रस्ट)
02. राजनीतिक उत्थान व विश्वबन्धुत्व के लिए-प्राकृतिक सत्य मिशन (ट्रस्ट)
1. राष्ट्रीय रचनात्मक आन्दोलन: स्वायत्तशासी उपसमिति /संगठन
I. प्राकृतिक सत्य एवं धार्मिक शिक्षा प्रसार केन्द्र (CENTRE)
II. ट्रेड सेन्टर (TRADE CENTRE)
III. विश्व राजनीतिक पार्टी संघ (WPPO)
(क) परिचय
(ख) राष्ट्रीय क्रान्ति मोर्चा
(ग) राष्ट्रीय सहजीवन आन्दोलन
(घ) स्वराज-सुराज आन्दोलन
(च) विश्व एकीकरण आन्दोलन (सैद्धान्तिक)
2. प्राकृतिक सत्य मिशन के विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग
3. राम कृष्ण मिशन और प्राकृतिक सत्य मिशन
03. श्री लव कुश सिंह के रचनात्मक कायों के संरक्षण के लिए-विश्वमानव फाउण्डेशन (ट्रस्ट)
04. व्यावहारिक ज्ञान पर शोध के लिए-सत्यकाशी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विश्वविद्यालय (ट्रस्ट)
05. ब्राह्मणों के लिए-सत्यकाशी (ट्रस्ट)
04. राष्ट्र निर्माण का हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व (अप्रत्यक्ष)
01. वाराणसी (उ0प्र0) - काशी एरिया ब्रेन इन्टीग्रेशन एण्ड रिसर्च चैरिटेबल ट्रस्ट
02. इलाहाबाद (उ0प्र0) - अविरल सरस्वती प्रवाह एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट
03. गाजीपुर (उ0प्र0) - भारत सत्य मिशन ट्रस्ट
04. सहारनपुर (उ0प्र0) - सूर्योदय ट्रस्ट
05. थाने (महाराष्ट्र) - विश्व सेवा तीर्थ ट्रस्ट (www.vishwasevatirth.org)
05. राष्ट्र निर्माण का हमारा वैश्विक उत्तरदायित्व (अप्रत्यक्ष)
उप भाग-05. निवेशक
01. निवेश (Investment)
02. निवेशक (Investor)
03. निवेश के तरीके
04. रियल इस्टेट (प्रापर्टी) में निवेश
05. राष्ट्र निर्माण का हमारे द्वारा उच्च लाभ देने वाले प्रोजेक्ट और निवेश
भाग - 05. राष्ट्र निर्माण का हमारा आमंत्रण
01. काशी (वाराणसी)-सत्यकाशी को आमंत्रण
02. धार्मिक संगठन/संस्था को आमंत्रण
03. रियल इस्टेट/इन्फ्रास्ट्रक्चर व्यवसायिक कम्पनी व एजेन्ट को आमंत्रण
04. छात्रों, बेरोजगारों व एम.एल.एम नेटवर्कर को आमंत्रण
05. सामाजिक उत्तरदायित्व पूर्ण करने हेतु आमंत्रण
विश्वशास्त्र - अध्याय - पाँच: सार्वजनिक प्रमाणित विश्वरूप
पूर्ण शिक्षा में स्नातक
(Bachelor in Complete Education-BCE)
विषय- सूची
अध्याय पाँच की भूमिका
भाग-01. धर्म प्रवर्तक और उनका धर्म चक्र मार्ग से
धर्म ज्ञान का प्रारम्भ
01. वैदिक धर्म-ऋषि-मुनि गण-ईसापूर्व 6000-2500
सत्ययुग के धर्म
02. ब्राह्मण धर्म-ब्राह्मण गण-ईसापूर्व 6000-2500
त्रेतायुग के धर्म
03. वैदिक धर्म-श्रीराम-ईसापूर्व 6000-2500
द्वापरयुग के धर्म
04. वेदान्त अद्वैत धर्म-श्रीकृष्ण-ईसापूर्व 3000
कलियुग के धर्म
05. यहूदी धर्म
06. पारसी धर्म-जरथ्रुस्ट-ईसापूर्व 1700
07. बौद्ध धर्म-भगवान बुद्ध-ईसापूर्व 567-487
08. कन्फ्यूसी धर्म-कन्फ्यूसियश-ईसापूर्व 551-479
09. टोईज्म धर्म-लोओत्से-ईसापूर्व 604-518
10. जैन धर्म-भगवान महावीर-ईसापूर्व 539-467
11. ईसाइ धर्म-ईसा मसीह-सन् 33 ई0
12. इस्लाम धर्म-मुहम्मद पैगम्बर-सन् 670 ई0
13. सिक्ख धर्म-गुरु नानक-सन् 1510 ई0
स्वर्णयुग धर्म
(धर्म ज्ञान का अन्त)
पहले विभिन्न धर्म प्रवर्तक और अब अन्त में “मैं” और मेरा “विश्वधर्म”
14. विश्व/सत्य/धर्मनिरपेक्ष/लोकतन्त्र धर्म-लव कुश सिंह “विश्वमानव” -सन् 2012 ई0
भाग-02. आचार्य और दर्शन चक्र मार्ग से
अ. आस्तिक ईश्वर कारण है अर्थात् ईश्वर को मानना
अ. स्वतन्त्र आधार
01. कपिल मुनि-सांख्य दर्शन
02. पतंजलि-योग दर्शन
03. महर्षि गौतम-न्याय दर्शन
04. कणाद-वैशेषिक दर्शन
ब. वैदिक ग्रन्थों पर आधारित
अ. कर्मकाण्ड पर आधारित
01. जैमिनि-मीमांसा दर्शन
ब. ज्ञानकाण्ड अर्थात् उपनिषद् पर आधारित
01. द्वैताद्वैत वेदांत दर्शन-श्रीमद् निम्बार्काचार्य
02. अद्वैत वेदांत दर्शन-आदि शंकराचार्य
03. विशिष्टाद्वैत वेदांत दर्शन-श्रीमद् श्रीरामानुजाचार्य
04. द्वैत वेदांत दर्शन-श्रीमद् माध्वाचार्य
05. शुद्धाद्वैत वेदांत दर्शन-श्रीमद् वल्लभाचार्य
ब. नास्तिक-ईश्वर कारण नहीं है अर्थात् ईश्वर को न मानना
01. चार्वाक-चार्वाक दर्शन
02. भगवान महावीर-जैन दर्शन
03. भगवान बुद्ध-बौद्ध दर्शन
पहले विभिन्न आचार्य तथा उनके दर्शन और अब अन्त में “मैं” और मेरा “कर्मवेदांत” और “विकास दर्शन”
भाग-03. गुरू चक्र मार्ग से
01. राम कृष्ण परमहंस एवं श्रीमाँ शारदा देवी
02. महर्षि अरविन्द
03. आचार्य रजनीश “ओशो”
04. श्री सत्योगानन्द उर्फ भुईधराबाबा
05. श्री श्री रविशंकर
पहले विभिन्न गुरू और अब अन्त में विश्वगुरू “मैं”
भाग-04. संत चक्र मार्ग से
01. संत श्रीरामानन्द
02. गोरक्षनाथ
03. धर्म सम्राट करपात्री जी
04. सांई बाबा शिरडी वाले
05. अवधूत भगवान राम
पहले विभिन्न संत और अब अन्त में विश्वसंत “मैं”
भाग-05. समाज और सम्प्रदाय चक्र मार्ग से
01. राजा राम मोहन राय-ब्रह्म समाज
02. केशवचन्द्र सेन-प्रार्थना समाज
03. स्वामी दयानन्द-आर्य समाज
04. श्रीमती एनीबेसेन्ट-थीयोसोफीकल सोसायटी
05. स्वामी विवेकानन्द-राम कृष्ण मिशन
पहले विभिन्न समाज सुधारक और अब अन्त में मेरा “ईश्वरीय समाज”
भाग-06. सत्य शास्त्र-साहित्य चक्र मार्ग से
01. श्री हरिवंश राय बच्चन- “मधुशाला”
02. स्वामी अड़गड़ानन्द-“यथार्थ गीता”
03. श्री मनु शर्मा-“कृष्ण की आत्मकथा”
04. श्री बिल गेट्स-“बिजनेस @ द स्पीड आफ थाट”
05. श्री स्टीफेन हाकिंग-“समय का संक्षिप्त इतिहास”
पहले विभिन्न सत्य शास्त्र-साहित्य और अब अन्त में मेरा “विश्वशास्त्र”
भाग-07. कृति चक्र मार्ग से
01. पं0 मदन मोहन मालवीय-“काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी)”
02. पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य-“अखिल विश्व गायत्री परिवार (ऋृषिकेश)”
03. नानाजी देशमुख-“दीनदयाल शोध संस्थान (चित्रकूट)”
04. महर्षि महेश योगी-“महर्षि यूनिवर्सिटी आफ मैंनेजमेन्ट”
05. जगद्गुरु रामभद्राचार्य - ”जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय“
पहले विभिन्न कृति और अब अन्त में मेरी कृति “सत्यकाशी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विश्वविद्यालय”
भाग-08. भूतपूर्व धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता चक्र मार्ग से
(भारत तथा विश्व के नेत्तृत्वकर्ताओं के चिंतन पर दिये गये वक्तव्य का स्पष्टीकरण)
अ. भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के पूर्व जन्में भूतपूर्व नेतृत्वकर्ता
01. महात्मा गाँधी (2 अक्टुबर, 1869-30 जनवरी, 1948)
02. सरदार वल्लभ भाई पटेल (31 अक्टुबर, 1875-15 दिसम्बर, 1950)
03. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन् (5 सितम्बर, 1888-17 अप्रैल 1975)
04. पं0 जवाहर लाल नेहरु (14 नवम्बर, 1889-27 मई, 1964)
05. बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891-6 दिसम्बर, 1956)
06. लोकनायक जय प्रकाश नारायण (11 अक्टुबर, 1902-8 अक्टुबर, 1979)
07. लाल बहादुर शास्त्री (2 अक्टुबर, 1904-11 जनवरी 1966)
08. राम मनोहर लोहिया (23 मार्च, 1910-12 अक्टुबर, 1967)
09. आर. वेंकट रामन (4 दिसम्बर, 1910-27 जनवरी, 2009)
10. पं0 दीन दयाल उपाध्याय (25 सितम्बर, 1916-11 फरवरी, 1968)
11. इन्दिरा गाँधी (19 नवम्बर, 1917-31 अक्टुबर, 1984)
12. शंकर दयाल शर्मा (19 अगस्त, 1918-26 दिसम्बर, 1999)
13. जान पाल, द्वितीय (18 मई, 1920-2 अप्रैल 2005)
14. के. आर. नारायणन (27 अक्टुबर, 1920-9 नवम्बर, 2005)
15. अशोक सिंघल ( 27 सितम्बर 1926-17 नवम्बर 2015)
16. चन्द्रशेखर (1 जुलाई, 1927-8 जुलाई, 2007)
17. रोमेश भण्डारी (29 मार्च, 1928-7 सितम्बर, 2013)
18. के. एस. सुदर्शन (18 जून, 1931-15 सितम्बर, 2012)
19. विश्वनाथ प्रताप सिंह (25 जून, 1931-27 नवम्बर, 2008)
20. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (15 अक्टुबर, 1931-27 जुलाई 2015)
21. स्वामी शिवानन्द (माघ शुक्ल बसन्त पंचमी, सरस्वती जन्मोत्सव, 1932 ई0 में-)
22. राजीव गाँधी (20, अगस्त, 1944-21 मई, 1991)
ब. भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के बाद जन्में भूतपूर्व नेतृत्वकर्ता
01. राजीव दीक्षित (30 नवम्बर 1967-30 नवम्बर 2010)
पहले विभिन्न भूतपूर्व धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता और अब अन्त में “मैं”
भाग-09. वर्तमान धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता चक्र मार्ग से
(भारत तथा विश्व के नेत्तृत्वकर्ताओं के चिंतन पर दिये गये वक्तव्य का स्पष्टीकरण)
अ. भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के पूर्व जन्में नेतृत्वकर्ता
01. स्वामी स्वरूपानन्द (2 सितम्बर, 1924-)
02. श्री अटल बिहारी वाजपेयी ( 25 दिसम्बर, 1926-)
03. श्री लाल कृष्ण आडवाणी (8 नवम्बर, 1927-)
04. डॅा0 कर्ण सिंह (9 मार्च, 1931-)
05. श्री वी.एस.नायपाल (17 अगस्त, 1932-)
06. श्री मुरली मनोहर जोशी (5 जनवरी, 1934-)
07. श्री केशरी नाथ त्रिपाठी (10 नवम्बर, 1934-)
08. श्री हामिद अंसारी (1 अप्रैल, 1934-)
09. श्रीमती प्रतिभा पाटिल (19 दिसम्बर, 1934-)
10. श्री राम नाइक (16 अप्रैल 1934-)
11. दलाई लामा (6 जुलाई, 1935-)
12. स्वामी जयेन्द्र सरस्वती (18 जुलाई, 1935-)
13. श्री प्रणव मुखर्जी (11 दिसम्बर 1935-)
14. श्री बी.एल.जोशी (27 मार्च, 1936-)
15. श्री गिरधर मालवीय (14 नवम्बर 1936-)
16. श्री कौफी अन्नान (8 अप्रैल, 1938-)
17. श्रीमती शीला दीक्षित (31 मार्च, 1938-)
18. श्री अन्ना हजारे (15 जनवरी, 1940-)
19. श्री सैम पित्रोदा (4 मई 1942-)
20. श्री यदुनाथ सिंह (6 जुलाई, 1945-)
21. श्रीमती सोनिया गाँधी (9 दिसम्बर 1946-)
22. श्री बिल क्लिन्टन (19 अगस्त, 1946-)
ब. भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के बाद जन्में नेतृत्वकर्ता
01. भारतीय संविधान
02. भारतीय संसद
03. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
04. भारतीय शिक्षा प्रणाली
05. भारतीय विपणन प्रणाली
06. भारतीय मीडिया (चैथा स्तम्भ-पत्रकारिता)
07. सहस्त्राब्दि विश्व शान्ति सम्मेंलन
08. श्री फर्दिनो इनासियो रिबेलो (31 जुलाई 1949-)
09. श्री नरेन्द्र मोदी (17 सितम्बर 1950-)
10. श्री राज नाथ सिंह (10 जुलाई, 1951-)
11. श्री बराक ओबामा (4 अगस्त, 1961-)
12. बाबा रामदेव (25 दिसम्बर, 1965-)
13. अमर उजाला फाउण्डेशन प्रस्तुति“संवाद”
पहले विभिन्न वर्तमान धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता और अब अन्त में “मैं”
भाग-10. सत्यमित्रानन्द गिरी (19 सितम्बर 1932-)
“भारत माता मन्दिर (ऋृषिकेश) ”
पहले भारतमाता मन्दिर और अब अन्त में उसमें “मैं” और “विश्वधर्म मन्दिर”
भाग-11. प्रकृति, काल और पुर्नजन्म चक्र मार्ग से
प्रकृति चक्र
01. सत् मार्ग के श्रीकृष्ण
02. रज मार्ग के स्वामी विवेकानन्द
03. तम मार्ग के रावण
पहले सर्वोच्च सत्-रज-तम मार्ग के श्रीकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द एवं रावण और अब अन्त में “मैं”
पुर्नजन्म चक्र
01. सत्व मार्ग से-श्रीकृष्ण और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
02. तम मार्ग से-रावण और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
03. रज मार्ग से-स्वामी विवेकानन्द और श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
01. स्वामी विवेकानन्द की वाणीयाँ जो भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” के जीवन में सत्य हुईं
02. स्वामी विवेकानन्द और भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” के जीवन काल का घटना-चक्र
पहले श्रीकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द एवं रावण और अब अन्त में उनका पुनर्जन्म “मैं”
काल चक्र
01. प्रथम भाग-अदृश्य काल में विश्वात्मा का प्रथम जन्म-योगेश्वर श्रीकृष्ण
02. द्वितीय भाग-दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का पहला भाग-स्वामी विवेकानन्द
03. द्वितीय भाग-दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का अन्तिम भाग-भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव”
पहले सर्वोच्च काल मार्ग के श्रीकृष्ण एवं स्वामी विवेकानन्द और अब अन्त में काल “मैं”
भाग-12. आत्मा चक्र मार्ग से
पहले सभी आत्मा और अब अन्त में विश्वात्मा “मैं”
भाग-13. मनु चक्र मार्ग से
पहले अदृश्य सात मनु और अब दृश्य आठवाँ सावर्णि मनु “मैं”
भाग-14. पहले सभी ऋृषि और व्यक्तिगत प्रमाणित अदृश्य “मैं”, अब अन्त में विश्व ऋृषि और सार्वजनिक प्रमाणित दृश्य “सार्वभौम मैं”
विश्वशास्त्र - परिशिष्ट
पूर्ण शिक्षा में परास्नातक
(Master in Complete Education-MCE)
विषय- सूची
परिशिष्ट-अ
(साभार-राम कृष्ण मिशन प्रकाशन)
स्वामी विवेकानन्द
भाग-1: धर्म और योग
01. धर्म-विज्ञान
02. योग क्या है?
03. ज्ञान योग
04. राजयोग
05. भक्ति योग
06. प्रेम योग
07. कर्मयोग
भाग-2: वेद, ईश्वर, अवतार, गुरू और मरणोत्तर जीवन
01. वेद
02. वेदान्त
03. ईश्वर
04. गुरु, शिष्य, अवतार और मन्त्र
05. मरणोत्तर जीवन
भाग-3: संमाज
01. विज्ञान और आध्यात्मिकता
02. प्राच्य और पाश्चात्य
03. जाति, संस्कृति और समाजवाद
04. समाज नीति
05. भारत का ऐतिहासिक क्रम विकास और अन्य प्रबन्ध
भाग-4: संग, सान्निध्य और पत्रावली
भाग-5: समर नीति और समन्वयाचार्य राम कृष्ण ”परमहंस“
परिशिष्ट-ब
लव कुश सिंह ”विश्वमानव“
भाग-1: मेरा मार्ग
01. निर्माण के मार्ग
02. मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
03. लक्ष्य-गणराज्यों का संघ-देश और देशों का संघ-विश्व राष्ट्र
04. पाँचवें युग-स्वर्णयुग में प्रवेश का आमंत्रण
05. मैं-विश्वात्मा ने भारतीय संविधान की धारा-51 (ए) : नागरिक का मौलिक कर्तव्य अनुसार अपना धर्म कर्तव्य निभाया
भाग-2: वार्ता, वक्तव्य, दिशाबोध, पत्रावली एवं जनहित याचिका
उप भाग-1. वार्ता एवं रचना
01. विश्वमानव से वार्ता - 1
02. विश्वमानव से वार्ता - 2
03. विश्वमानव से वार्ता - 3
04. कुछ कविताएँ
05. कुछ गजल व शायरी
उप भाग-2. वक्तव्य
01. विश्व शान्ति के लिए मन का मानकीकरण केवल शब्द नहीं बल्कि उसके मानक का निर्धारण व प्रकाशन हो चुका है।
02. मैं भारत और अमेरिका के हताश होने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ
03. रचनात्मक पत्रकारिता-पत्रकारिता का सत्य-रूप
04. 21 दिसम्बर, 2012 को सर्वनाश नहीं बल्कि पाँचवें युग-स्वर्ण युग और सत्यकाशी तीर्थ प्रकट हुआ है
05. मेरे विश्व शान्ति के कार्य हेतु बनाये गये पाँच ट्रस्ट मानवता के लिए सत्य-कार्य एवं दान के लिए सुयोग्य पात्र
उप भाग-3. दिशाबोध
01. नागरिकों को आह्वान
02. विचारकों को आह्वान
03. शिक्षण क्षेत्र से जुड़े आचार्याे को आह्व
04. प्रबंध शिक्षा क्षेत्र को आह्वान
05. शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माता को आह्वान
06. पत्रकारिता को आह्वान
07. मानकीकरण संगठन और औद्योगिक जगत को आह्वान
08. फिल्म निर्माण उद्योग को आह्वान
09. धर्म क्षेत्र को आह्वान
10. राजनीतिक दलों को आह्वान
11. सरकार / शासन को आह्वान
12. संसद को आह्वान
13. सर्वोच्च न्यायालय को आह्वान
उप भाग-4. प्रसारण एवं पत्रावली
01. प्रारम्भिक प्रसारण
02. समय-समय पर भेजे गये पत्र
03. समय-समय पर प्राप्त पत्र
04. सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के पोस्ट
05. भारत सरकार को अन्तिम पत्र
उप भाग-5. जनहित याचिका
क्या है जनहित याचिका (PIL- Public Interest Litigation)
जनहित याचिका-01. पूर्ण शिक्षा का अधिकार
जनहित याचिका-02. राष्ट्रीय शास्त्र
जनहित याचिका-03. नागरिक मन निर्माण का मानक
जनहित याचिका-04. सार्वजनिक प्रमाणित सत्य-सिद्धान्त
जनहित याचिका-05. गणराज्य का सत्य रूप
भाग-3: सत्य-अर्थ एवं मार्गदर्शन
भाग-4: वाणीयाँ एवं उद्गार
01. श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव“ की वाणीयाँ
02. श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव“ के उद्गार
भाग-5: मैं (व्यक्तिगत या सार्वभौम)
01. क्यों असम्भव था व्यक्ति, संत-महात्माओं-धर्माचार्यों, राजनेताओं और विद्वानों द्वारा यह अन्तिम कार्य?
02. भोगेश्वर रुप (कर्मज्ञान का विश्वरुप) : मैं एक हूँ परन्तु अनेक नामों से जाना जाता हूँ
03. एक ही मानव शरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विषय क्षेत्र से मुख्य नाम (सर्वोच्च, अन्तिम और दृश्य)
04. एक ही ”विश्वशास्त्र“ साहित्य के विभिन्न नाम और उसकी व्याख्या
05. बसुधैव-कुटुम्बकम्
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इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
विमृश्न्यैतदशेषेणयथेच्छसितथाकुरू।।
(श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय-18, श्लोक-63)
अर्थात् -
मैंने तुम्हें जो बताया, वह सब से बड़ा रहस्य है। इस पर भलीभाँति विचार कर तुम्हारी जैसी इच्छा वैसा करो।
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उत्तम अति उत्तम सत्य
ReplyDeleteअति उत्तम ।
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